BCC Fuba India अपने विस्तार की योजनाओं को पंख लगाने और वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए ₹35 करोड़ (या ₹3,500.00 लाख) की भारी रकम जुटाने जा रही है।
कंपनी के डायरेक्टर्स का बोर्ड 5 मार्च, 2026 को एक अहम बैठक करेगा। इस बैठक में राइट्स इश्यू से जुड़ी सभी शर्तों और नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
अच्छी खबर यह है कि शेयर बाजार नियामक BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) ने इस पूंजी जुटाने की योजना को अपनी इन-प्रिंसिपल मंजूरी दे दी है, जिससे कंपनी को आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
यह कदम कंपनी के लिए काफी अहम है, खासकर हाल ही में 51% हिस्सेदारी आईओजेम्स टेक्नोलॉजीज (Iogems Technologies) के अधिग्रहण के बाद। राइट्स इश्यू से मिलने वाली पूंजी का इस्तेमाल इस अधिग्रहण को मजबूत करने और कंपनी की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने में किया जाएगा।
फिलहाल, कंपनी के शेयरों में ट्रेडिंग 2 मार्च, 2026 से लेकर बोर्ड मीटिंग के 48 घंटे बाद तक बंद रहेगी, ताकि नियमों का पालन किया जा सके।
BCC Fuba India की स्थापना 1985 में हुई थी और इसका नाता जर्मनी की Fuba Hans Kolbe & Co. से रहा है। कंपनी प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) बनाने में माहिर है। कंपनी ने 1992 के बाद अब जाकर कोई बड़ा फंड जुटाने का कदम उठाया है, जो करीब तीन दशक बाद हो रहा है।
हाल की रिपोर्टों के अनुसार, Q2 FY26 में कंपनी के मुनाफे में 9.83% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹144.83 लाख पर पहुंच गया। वहीं, कुल आय 9.75% बढ़कर ₹1,703.48 लाख रही। H1 FY26 (सितंबर 30, 2025 तक) में मुनाफे में 54.78% का उछाल आया और यह ₹276.70 लाख रहा।
हालांकि, कुछ बाहरी विश्लेषक कंपनी की 'क्वालिटी' और 'मैनेजमेंट' को 'खराब' रेट कर रहे हैं। साथ ही, कंपनी का पीई रेश्यो (P/E ratio) 0 बताया जा रहा है, जो कुछ चिंताएं खड़ी करता है।
राइट्स इश्यू के जरिए मौजूदा शेयरधारकों को नए शेयर खरीदने का मौका मिलेगा, जिससे वे अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं। लेकिन, अगर वे इसमें हिस्सा नहीं लेते हैं, तो उनकी शेयरहोल्डिंग प्रतिशत और प्रति शेयर आय (earnings per share) में कमी आ सकती है, जिसे डायल्यूशन रिस्क (dilution risk) कहते हैं।
निवेशकों को 5 मार्च, 2026 को होने वाली बोर्ड मीटिंग के नतीजों का बेसब्री से इंतजार रहेगा। इसके बाद इश्यू प्राइस, रिकॉर्ड डेट और एंटाइटलमेंट रेशियो जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी। साथ ही, Iogems Technologies के साथ कंपनी के इंटीग्रेशन और EMS (Electronic Manufacturing Services) सेक्टर में उसके प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी।