India-US ट्रेड डील का 'Avalon' पर असर
यह शानदार तेजी India-US के बीच सोमवार रात हुए एक अहम ट्रेड पैक्ट का नतीजा है। इस समझौते का मुख्य हिस्सा अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट पर लगने वाले टैरिफ में भारी कटौती है। पहले यह टैरिफ 50% था, जिसे घटाकर अब सिर्फ 18% कर दिया गया है। Avalon Technologies, जो कि एक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) प्रोवाइडर है, के लिए यह बड़ी राहत है, क्योंकि कंपनी अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका से ही करती है।
Avalon के लिए अमेरिका है बड़ा बाजार
फाइनेंशियल ईयर 2026 के सितंबर क्वार्टर तक, Avalon की कुल कमाई का करीब 61% हिस्सा अमेरिकी क्लाइंट्स से आ रहा था। कंपनी का US बिजनेस सेगमेंट पहले से ही अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, फाइनेंशियल ईयर 2026 की पहली छमाही में इसमें 52% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ देखी गई थी। इसी का असर है कि 3 फरवरी 2026 को Avalon Technologies के शेयर 20% के अपर सर्किट पर ₹1,022.7 के लेवल पर बंद हुए। पिछले 5 में से 4 ट्रेडिंग सेशन में स्टॉक में तेजी आई है और पिछले 12 महीनों में यह 51% चढ़ चुका है।
सेक्टर की चाल और Avalon की वैल्यूएशन
फिलहाल, Avalon Technologies का P/E रेश्यो लगभग 66.5x से 78.6x के बीच चल रहा है, जो निवेशकों का कंपनी के ग्रोथ आउटलुक पर भरोसा दिखाता है। फरवरी 2026 की शुरुआत तक, कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹6,870 करोड़ के आसपास है।
इस बीच, ब्रोकरेज फर्म JP Morgan के मुताबिक, इंडियन EMS सेक्टर 2025 में थोड़ी सुस्ती के बाद 2026 में रिकवरी की राह पर है। हाल ही में, फरवरी 2026 के यूनियन बजट में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत ₹40,000 करोड़ के आवंटन से इस सेक्टर के शेयरों में पहले ही तेजी देखी गई है। Avalon भी इसी फेवरेबल पॉलिसी एनवायरनमेंट का हिस्सा है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग स्पेस में Dixon Technologies, Kaynes Technology India, और Cyient DLM जैसी कंपनियां भी इसके कॉम्पिटीटर हैं।
कंपनी की ऑपरेशनल स्ट्रेंथ और परफॉरमेंस
टैरिफ बेनिफिट्स के अलावा, Avalon Technologies की अपनी ऑपरेशनल स्ट्रक्चर भी इसकी ग्रोथ को सपोर्ट करती है। कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग का 20% हिस्सा अमेरिका में भी रखती है, जो इसके रेवेन्यू सोर्स को और मजबूत करता है। मैनेजमेंट के मुताबिक, उनके क्लाइंट्स के साथ मजबूत रिलेशनशिप हैं, और वे टैरिफ के 99% से अधिक की रिकवरी क्लाइंट्स से कर लेते हैं।
हाल के फाइनेंशियल रिजल्ट्स भी कंपनी की ग्रोथ को दर्शाते हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 की दूसरी तिमाही में Avalon का रेवेन्यू 39.1% बढ़कर ₹382.5 करोड़ हुआ, जबकि नेट प्रॉफिट 42.9% बढ़कर ₹25 करोड़ रहा। फाइनेंशियल ईयर 2026 की पहली छमाही में रेवेन्यू 48.7% बढ़कर ₹705.8 करोड़ और नेट प्रॉफिट 158.3% बढ़कर ₹39.2 करोड़ दर्ज किया गया।
कंपनी सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही है और ESDM मार्केट का फायदा उठाना चाहती है। मैनेजमेंट का फोकस मार्जिन को बढ़ाना और प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखना है, जिसके लिए कंपनी के पास मजबूत ऑर्डर पाइपलाइन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी है।
निवेशकों की नजरें 4 फरवरी 2026 को होने वाली Avalon के बोर्ड मीटिंग पर भी होंगी, जहां दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही के वित्तीय नतीजों की समीक्षा की जाएगी।