ऑस्ट्रेलिया का Big Tech पर 2.25% टैक्स का दांव, Google-Meta हुए नाराज़!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ऑस्ट्रेलिया का Big Tech पर 2.25% टैक्स का दांव, Google-Meta हुए नाराज़!
Overview

ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने बड़ी टेक कंपनियों जैसे Meta और Google पर एक नया 'न्यूज बार्गेनिंग इंसेंटिव' (NBI) प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत, अगर ये कंपनियां न्यूज पब्लिशर्स को भुगतान नहीं करती हैं, तो उनके रेवेन्यू पर **2.25%** का टैक्स लगाया जाएगा।

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ऑस्ट्रेलिया का नया प्रस्ताव: डिजिटल रेवेन्यू पर टैक्स

ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए एक नया नियम प्रस्तावित किया है, जिसे 'न्यूज बार्गेनिंग इंसेंटिव' (NBI) कहा जा रहा है। इस प्रस्ताव के अनुसार, Meta, Google और TikTok जैसी बड़ी टेक कंपनियों को अपने ऑस्ट्रेलियाई रेवेन्यू का 2.25% टैक्स के तौर पर देना होगा, यदि वे स्थानीय समाचार प्रकाशकों के साथ समाचार सामग्री के लिए व्यावसायिक समझौते करने में विफल रहती हैं। सरकार का कहना है कि इससे जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल सीधे पत्रकारिता क्षेत्र को सहारा देने के लिए किया जाएगा।

क्यों लाया गया यह नियम? पिछले समझौतों की विफलता

यह ऑस्ट्रेलिया का दूसरा बड़ा कदम है जो समाचार सामग्री के लिए भुगतान को अनिवार्य बनाने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले 2021 में 'न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड' लाया गया था, जिसके बाद 30 से अधिक व्यावसायिक समझौते हुए थे। हालाँकि, कई प्लेटफॉर्म्स ने बाद में भुगतान से बचने के लिए अपनी सेवाओं से समाचार हटा दिए थे। यह नया प्रस्ताव ऐसे लूपहोल्स को बंद करने के लिए है। जो प्लेटफॉर्म्स डील करेंगे, उन्हें कुछ रियायतें मिल सकती हैं, खासकर छोटे प्रकाशकों के साथ समझौते करने के लिए। Google का तर्क है कि यह कानून विज्ञापन बाजार की बदलती स्थिति को गलत तरीके से आंकता है और Microsoft, Snapchat, व OpenAI जैसे प्लेटफॉर्म्स को बाहर रखता है, जो लोगों द्वारा समाचार उपभोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। AI चैटबॉट सेवाओं को विशेष रूप से बाहर रखा गया है।

टेक कंपनियों का रुख: 'छिपा हुआ टैक्स' और 'धन हस्तांतरण'

टेक उद्योग की प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि NBI को पत्रकारिता के लिए उचित भुगतान के बजाय एक 'पतली चादर में लिपटा डिजिटल टैक्स' माना जा रहा है। Google ने कहा है कि वह इस टैक्स की जरूरत को 'खारिज' करता है। Google और Meta दोनों का तर्क है कि समाचार संगठन दर्शकों तक पहुँचने के लिए स्वेच्छा से सामग्री पोस्ट करते हैं, इसलिए 'समाचार लिए जाने' का विचार गलत है। वे इस ऑस्ट्रेलियाई प्रस्ताव को 'सरकार द्वारा निर्देशित धन हस्तांतरण' के रूप में देखते हैं जो अस्थिर तरीके से समाचार उद्योग को वित्तपोषित कर सकता है। बड़े दिग्गजों को लक्षित करते हुए Microsoft और OpenAI जैसे प्रमुख खिलाड़ियों को बाहर करने से बाजार की निष्पक्षता पर भी बहस छिड़ गई है। 2021 के कोड का परिणाम, जहाँ प्लेटफॉर्म्स ने भुगतान के बजाय समाचार हटा दिए, यह बताता है कि प्रत्यक्ष कर स्थिर पत्रकारिता वित्त पोषण सुनिश्चित नहीं कर सकता है।

आगे की राह: परामर्श और विश्लेषकों के विचार

नियामक चुनौतियों के बावजूद, Meta और Alphabet के लिए विश्लेषकों का दृष्टिकोण काफी हद तक सकारात्मक बना हुआ है। वॉल स्ट्रीट के विश्लेषकों का Meta के लिए 'Strong Buy' का सुझाव है, जिसका औसत टारगेट प्राइस $854.46 है। Alphabet को भी 'Strong Buy' रेटिंग मिली है, जिसका औसत टारगेट $387.68 है। यह ड्राफ्ट कानून वर्तमान में 18 मई, 2026 तक सार्वजनिक परामर्श के लिए खुला है। इस अवधि में विभिन्न पक्षों से गहन विचार-विमर्श और संभावित नीतिगत बदलावों की उम्मीद है। हालाँकि सरकार पत्रकारिता का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन आगे का रास्ता नियामकों और प्रमुख टेक कंपनियों के बीच चल रही चर्चाओं को सुलझाने पर निर्भर करेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.