क्यों सिकुड़ रहा है स्मार्टफोन बाज़ार?
इस बार स्मार्टफोन इंडस्ट्री के लिए मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। मेमोरी चिप (Memory Chip) बनाने वाली कंपनियां AI डेटा सेंटरों की मांग को प्राथमिकता दे रही हैं। इस वजह से मोबाइल DRAM और NAND की कीमतें पिछली तिमाही के मुकाबले करीब 90% तक बढ़ गई हैं। बढ़ी हुई लागत का सबसे ज़्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ा है जो सस्ते, एंट्री-लेवल फोन बेचती हैं।
Apple की सफलता का राज
Apple की सफलता का मुख्य कारण उसका प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस और मजबूत सप्लाई चेन मैनेजमेंट है। कंपनी ने अपने एकीकृत (Integrated) सप्लाई चेन का फायदा उठाते हुए इंडस्ट्री की मुश्किलों का सामना किया। iPhone 17 सीरीज़ की ज़बरदस्त डिमांड, खासकर एशिया-पैसिफिक जैसे चीन, भारत और जापान जैसे बाजारों में, Apple के वॉल्यूम ग्रोथ में बड़ा ज़ोरदार साबित हुई।
कंपटीटर्स की हालत'
इस दौरान, Apple के प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को बड़ा झटका लगा है। Samsung की शिपमेंट्स में 6% की गिरावट आई और बाज़ार में उसकी हिस्सेदारी घटकर 20% रह गई। Galaxy S26 लॉन्च में देरी और लो-एंड सेगमेंट में कमजोरी इसके पीछे के कारण रहे। वहीं, Xiaomi, जो तीसरे नंबर पर है, की हिस्सेदारी 12% रही, लेकिन उसकी सेल्स में 19% की भारी गिरावट दर्ज की गई। Xiaomi के ज़्यादातर ग्राहक कीमत के प्रति बहुत संवेदनशील हैं, इसलिए बढ़ी हुई लागत ने उसे सबसे ज़्यादा प्रभावित किया।
पिछले साल Q1 2025 में जहां ग्लोबल शिपमेंट्स 2% बढ़ी थी और Samsung 20% हिस्सेदारी के साथ टॉप पर थी, वहीं Apple 19% के साथ दूसरे नंबर पर थी। यह बदलाव Q1 2026 के बाज़ार की स्थिति और Apple के दमदार प्रदर्शन को दर्शाता है।
भविष्य की चुनौतियाँ
एक्सपर्ट्स का मानना है कि मेमोरी कंपोनेंट की यह कमी 2027 के अंत तक बनी रह सकती है। Xiaomi जैसी कंपनियों के लिए यह बड़ी चुनौती है, क्योंकि वे एंट्री-लेवल बाज़ार पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। अगर कंपोनेंट की कीमतें और बढ़ीं तो उन्हें अपने फोन की कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी, जिससे उपभोक्ताओं की मांग और कम हो सकती है। Samsung भी अपने प्रीमियम S26 Ultra के साथ कुछ शुरुआती सफलता के बावजूद मास मार्केट में स्ट्रगल कर रहा है।