वैल्यूएशन और एनालिस्ट्स की राय (Valuation & Analyst View)
Apple का मार्केट वैल्यूएशन फिलहाल लगभग $3.76 ट्रिलियन है, और पिछले साल का इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 32.3 रहा है। यह इसे Microsoft (P/E ~23.36) और Alphabet (P/E ~27.36) जैसी कंपनियों से महंगा बनाता है, हालांकि Nvidia (P/E ~36.20) से थोड़ा सस्ता है। इन सब के बावजूद, कई एनालिस्ट्स Apple के शेयर को 'Buy' या 'Strong Buy' की रेटिंग दे रहे हैं, और उनका अनुमान है कि स्टॉक में करीब 16-17% तक की तेजी आ सकती है। शेयर फिलहाल $255.92 के आसपास ट्रेड कर रहा है।
प्रोडक्शन सेंटर्स में बड़ा फेरबदल (Production Centers Shake-up)
चीन के साथ बढ़ते ट्रेड टेंशन (trade tensions) और एक ही देश पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को कम करने के लिए, Apple अपनी सप्लाई चेन (supply chain) को डायवर्सिफाई (diversify) कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, India में iPhone का प्रोडक्शन काफी बढ़ा है, जिसका लक्ष्य 2027 तक 25% तक पहुंचना है, जिसमें प्रो मॉडल्स (Pro models) भी शामिल होंगे। कंपनी US में भी मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा रही है और डोमेस्टिक कंपोनेंट (domestic component) प्रोडक्शन के लिए नए पार्टनरशिप कर रही है। यह स्ट्रेटेजी (strategy) सप्लाई चेन को टैरिफ (tariff) और ग्लोबल डिस्प्यूट्स (global disputes) से बचाने के लिए है, लेकिन इसमें लॉजिस्टिकल कॉम्प्लेक्सिटी (logistical complexity) और शायद ज्यादा लागत भी शामिल है।
रेगुलेटरी और लेबर इश्यूज (Regulatory & Labour Issues)
Apple दुनिया भर में कड़ी रेगुलेटरी जांच (regulatory scrutiny) का सामना कर रही है, खासकर अपने App Store रूल्स और एंटीट्रस्ट (antitrust) मुद्दों को लेकर। Department of Justice (DOJ) और European Commission जैसी संस्थाएं कंपनी के बिजनेस प्रैक्टिसेज (business practices) की जांच कर रही हैं। Italy और Germany जैसे देशों ने भी Apple को App Tracking Transparency (ATT) पॉलिसी को लेकर फाइन (fine) लगाया है, क्योंकि यह बाहरी डेवलपर्स (developers) के लिए कॉम्पिटिशन (competition) को नुकसान पहुंचाती है।
इन लीगल फाइट्स (legal fights) से बड़े फाइन या बिजनेस स्ट्रैटेजी में बदलाव हो सकते हैं। इसके अलावा, सप्लाई चेन में लेबर प्रैक्टिसेज (labour practices) को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं, खासकर China में Foxconn फैक्ट्रियों में। अनपेड वेजेस (unpaid wages), लंबे वर्किंग आवर्स (working hours) और गलत तरीके से टेम्परेरी स्टाफ (temporary staff) के इस्तेमाल जैसी रिपोर्ट्स सामने आई हैं। Apple इन चिंताओं की जांच और ऑडिट (audit) कर रही है, लेकिन इसकी विशाल और जटिल सप्लाई चेन के कारण पूरी तरह से नजर रखना मुश्किल और महंगा है।