निवेश का बंपर उछाल
ऐप-आधारित होम सर्विसेज सेक्टर में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। 2023 से 2025 के बीच इस सेक्टर में कुल फंडिंग लगभग 3 गुना हो गई है। Traxn डेटा के अनुसार, 2025 में इन ऑनलाइन कंपनियों ने करीब $83 मिलियन का फंड जुटाया, जो 2024 के $64.7 मिलियन और 2023 के $30.5 मिलियन से काफी ज्यादा है। इस फंड का बड़ा हिस्सा स्नैबिट (Snabbit) और प्रॉन्टो (Pronto) जैसी बड़ी कंपनियों के साथ-साथ अर्बन कंपनी (Urban Company) में गया, जो बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं।
स्नैबिट ने 2025 में तीन बार फंड जुटाने की कोशिश की और करीब $55 मिलियन हासिल किए। कंपनी इस साल एक और $50-60 मिलियन का राउंड लाने की तैयारी में है। वहीं, प्रॉन्टो, जो एक नई कंपनी है, ने तीन राउंड में लगभग $40 मिलियन जुटाए हैं, जिसमें इसी महीने $25 मिलियन का बड़ा निवेश शामिल है। इस सेगमेंट की सबसे बड़ी कंपनी अर्बन कंपनी ने पिछले सितंबर में स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग के साथ ₹1,900 करोड़ जुटाए थे।
'इंस्टा-हेल्प' की बढ़ती डिमांड
एनालिस्ट्स और निवेशकों के मुताबिक, इस बूम के पीछे ग्राहकों के व्यवहार में आया एक बड़ा बदलाव है। अब लोग कभी-कभार होने वाली मरम्मत (repairs) की बजाय बार-बार और तुरंत मिलने वाली 'इंस्टेंट हेल्प' सर्विसेज की मांग कर रहे हैं, खासकर शहरी इलाकों में। लाइट्सस्पीड (Lightspeed) के पार्टनर राहुल तनेजा के अनुसार, अब यह मॉडल हाई-फ्रीक्वेंसी (High-Frequency) जरूरतों को पूरा कर रहा है, जैसे सामान्य होम क्लीनिंग, जो प्लंबिंग जैसे कम होने वाले कामों से अलग है। यह बदलाव एक नई ब्रांड कैटेगरी बना रहा है और निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। तनेजा का कहना है कि मौजूदा फंडिंग स्थापित कंपनियों को प्रमुख क्षेत्रों में 'डिमांड को घना' (densify demand) बनाने में मदद कर रही है। इसका मतलब है कि कंपनियां नए इलाकों में फैलने के बजाय मौजूदा क्षेत्रों में अपनी सर्विस की पैठ गहरी कर रही हैं, ताकि स्केल और प्रॉफिटेबिलिटी हासिल की जा सके।
ग्रोथ की उम्मीदें और खतरे
रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स (Redseer Strategy Consultants) के पार्टनर रोहन अग्रवाल के मुताबिक, ऑनलाइन सर्विसेज सेगमेंट अभी कुल होम सर्विसेज मार्केट का 1% से भी कम है (FY2025 तक)। इसके बावजूद, FY2030 तक इस खास सेगमेंट में सालाना 18-22% की जोरदार ग्रोथ का अनुमान है, क्योंकि ग्राहक सुविधा, विश्वसनीयता और जवाबदेही को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
हालांकि, इस सेक्टर को महत्वपूर्ण जोखिमों का भी सामना करना पड़ रहा है। अग्रवाल ने बार-बार होने वाले छोटे-छोटे लेनदेन (low-value transactions) को मैनेज करने की आर्थिक चुनौतियों और व्यस्त समय में योग्य विशेषज्ञों की लगातार सप्लाई बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। तनेजा ने बड़ी संख्या में कर्मचारियों की हायरिंग, ट्रेनिंग और सपोर्ट के लिए मजबूत सिस्टम बनाने की अहमियत बताई, साथ ही ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी बात की। इन ऑपरेशनल जटिलताओं से पार पाना एक लीडिंग प्लेटफॉर्म बनाने के लिए बेहद जरूरी है।