Anthropic India: AI 'डेवलपमेंट' का नया 'अखाड़ा', पर रफ्तार पकड़ेगा क्या?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Anthropic India: AI 'डेवलपमेंट' का नया 'अखाड़ा', पर रफ्तार पकड़ेगा क्या?
Overview

AI की दुनिया में अपना खास मुकाम बनाने वाली कंपनी Anthropic, भारत को अपने 'AI for Development' विजन के लिए एक अहम 'प्रयोगशाला' के तौर पर देख रही है। भारत में उनके AI मॉडल 'Claude' का इस्तेमाल दुनिया भर में दूसरे नंबर पर है, लेकिन इस टेक को आम लोगों तक पहुंचाने की राह में कई चुनौतियां भी हैं।

भारत: Anthropic के AI विजन की 'कसौटी'

Anthropic सिर्फ भारत में पैर नहीं पसार रही, बल्कि देश को अपने "AI for Development" यानी 'विकास के लिए AI' के नजरिए को परखने का एक बड़ा मौका दे रही है। इस सोच का मुख्य मकसद AI को बनाते वक्त ही उसमें सुरक्षा और सामाजिक भलाई को शामिल करना है, ताकि बड़े विकास संबंधी मुद्दों को हल किया जा सके। भारतीय NGO 'प्रथम' के साथ उनकी साझेदारी इसका एक बड़ा उदाहरण है। 'Anytime Testing Machine' (ATM) के ज़रिए, Anthropic अपने AI मॉडल 'Claude' का इस्तेमाल करके बच्चों के लिए सिलेबस के हिसाब से सेल्फ-असेसमेंट टेस्ट बना रही है, जवाबों को डिजिटाइज़ कर रही है, ग्रेडिंग को ऑटोमेट कर रही है और व्यक्तिगत फीडबैक दे रही है, ताकि लर्निंग आउटकम्स को बेहतर बनाया जा सके। यह पहल Anthropic के AI को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए इस्तेमाल करने के इरादे को दर्शाती है, जो कि दूसरे कॉम्पिटिटर्स से अलग है जो सिर्फ कमर्शियल फायदे पर ध्यान दे रहे हैं।

भारत के कॉम्पिटिटिव AI बाज़ार में Anthropic

भारत का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसके $8 बिलियन (2025) और $17 बिलियन (2027) तक पहुँचने का अनुमान है। अकेले IT सेक्टर AI-संचालित ऑटोमेशन की वजह से $400 बिलियन (2030) तक पहुँच सकता है। भारत सरकार की 'IndiaAI Mission' और GPU क्षमता में हुई भारी बढ़ोतरी, जो 38,000 से ज़्यादा यूनिट्स का लक्ष्य रखती है, देश को AI सुपरपावर बनाने में मदद कर रही है। इस तेज़ी भरे माहौल में दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां भी भारत की ओर देख रही हैं। हाल ही में OpenAI और Google के एग्जीक्यूटिव्स ने नई दिल्ली में AI Impact Summit में हिस्सा लिया, जो भारत जैसे बाज़ार में उनकी गहरी रुचि को दिखाता है, खासकर पश्चिमी देशों में जहां ग्रोथ धीमी हो रही है। Microsoft, Google और OpenAI जैसी कंपनियां भारत में भारी निवेश कर रही हैं, जिससे एंटरप्राइज़ AI को अपनाने की रेस और भी कॉम्पिटिटिव हो गई है। Anthropic के CEO, Dario Amodei का कहना है कि AI की क्षमताएं तेज़ी से बढ़ रही हैं और यह कुछ ही सालों में इंसानों की काबिलियत से आगे निकल सकती हैं, जो समाज और नियमों को बदलने की गति से कहीं ज़्यादा है।

सरकारी नियम और अपनाने की दिक्कतें

भारत में Anthropic की मौजूदगी बढ़ रही है, और देश अब 'Claude AI' के इस्तेमाल में दुनिया भर में दूसरे नंबर पर आ गया है। हालांकि, इसका इस्तेमाल अभी भी बड़े शहरों जैसे बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, मुंबई और दिल्ली NCR के टेक प्रोफेशनल्स तक ही सीमित है, खासकर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और इंजीनियरिंग रोल्स में। भारतीय यूज़र्स को जटिल कामों में 15x तक स्पीड में बढ़ोतरी का अनुभव हुआ है। Cognizant जैसी कंपनियां अपने ग्लोबल वर्कफोर्स में Claude को सिस्टम को मॉडर्न बनाने और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। दूसरी तरफ, भारत सरकार भी 'National AI Strategy' जैसे पहलों के ज़रिए AI के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार कर रही है, जिसमें इनोवेशन के साथ-साथ आर्थिक प्रभाव और ज़िम्मेदार AI के लिए नियम बनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। इस तरह Anthropic को जहां तेज़ी से टेक्नोलॉजी लानी है, वहीं बदलते नियमों और IT सेक्टर के बाहर AI को अपनाने की ज़रूरत के बीच संतुलन बनाना होगा।

असली चुनौती: बड़े पैमाने पर पहुंचना, कॉम्पिटिशन और एग्जीक्यूशन

भारत में Claude AI के बड़े इस्तेमाल के बावजूद, प्रति व्यक्ति इस्तेमाल में देश का 101वां स्थान दिखाता है कि AI को आम लोगों तक पहुँचाने में बड़ी चुनौतियां हैं। यह दिखाता है कि Anthropic के 'AI for Development' मॉडल को सीधे तौर पर निचले आय वाले समुदायों तक पहुंचाने के लिए खास कोशिशों की ज़रूरत होगी। Google और Microsoft जैसे स्थापित खिलाड़ियों से कड़ी टक्कर मिल रही है, जिनके पास भारत में पहले से ही क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और एंटरप्राइज़ कनेक्शन्स मजबूत हैं। इसके अलावा, AI इंडस्ट्री में वैल्यूएशन बबल्स की भी चिंताएं हैं, जहां OpenAI जैसी कंपनियां भारी रेवेन्यू के मुकाबले अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। यह सवाल उठाता है कि क्या इस हाई-ग्रोथ मॉडल की स्थिरता बनी रहेगी और क्या प्रचार से ज़्यादा वास्तविक वैल्यू बन पाएगी। Amodei ने जिस तेज़ी से AI के विकास का ज़िक्र किया है, वह आर्थिक उथल-पुथल और गलत इस्तेमाल जैसे जोखिम भी पैदा करती है, जो मौजूदा गवर्नेंस स्ट्रक्चर्स के लिए एक चुनौती है। भारतीय संगठनों के लिए डेटा सिक्योरिटी और स्किल्ड लोगों की कमी भी एक बड़ी चिंता है, जहाँ 67% कंपनियां सिक्योरिटी को एक बड़ी चुनौती मानती हैं और 54% कुशल कर्मचारियों को खोजने में संघर्ष कर रही हैं।

भारत में AI इकोसिस्टम को बढ़ावा

Anthropic की रणनीति में भारत के विशाल डेवलपर टैलेंट पूल को तैयार करना और एक मज़बूत लोकल AI इकोसिस्टम बनाना भी शामिल है। कंपनी अपने दूसरे एशियाई ऑफिस, बेंगलुरु में स्थानीय इंजीनियर्स की हायरिंग कर रही है। 'Karya' और 'Collective Intelligence Project' जैसी कंपनियों के साथ मिलकर, वे भारतीय भाषाओं में Claude के प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं, ताकि खेती और कानून जैसे सेक्टर्स में इसका ज़्यादा असर हो सके। पब्लिक सेक्टर के साथ सहयोग, जैसे कि कृषि के लिए EkStep Foundation और कानूनी सेवाओं के लिए Adalat AI के साथ, AI का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करने का लक्ष्य है। यह लोकल टैलेंट, भाषा अनुकूलन और पब्लिक सेक्टर इंटीग्रेशन पर ज़ोर, Anthropic की भारत के अनूठे संदर्भ के अनुसार अपनी ग्लोबल AI विजन को तैयार करने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

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