नई 'डीम्ड लाइसेंसी' पॉलिसी क्या है?
आंध्र प्रदेश सरकार की 'पावर सेक्टर रिफॉर्म्स 3.0' के तहत यह नई पॉलिसी लाई गई है। इसके मुताबिक, Google जैसे बड़े और ऊर्जा-खपत वाले उद्योगों को 'डीम्ड लाइसेंसी' माना जाएगा। इसका मतलब है कि वे अपनी बिजली खुद खरीद सकेंगे, चाहे वह ओपन एक्सेस से हो या खुद के रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स से, और इसके लिए उन्हें राज्य की पारंपरिक बिजली वितरण इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य बड़े प्रोजेक्ट्स को आकर्षित करना है, खासकर डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में, जो देश की डिजिटल ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण हैं।
डिस्कॉम्स पर पड़ेगा क्या असर?
हालांकि, इस पॉलिसी से सीधे तौर पर राज्य की बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका है। Google जैसे बड़े ग्राहक, जो डिस्कॉम्स से काफी महंगी दरों पर बिजली खरीदते हैं, अब सीधे सोर्सिंग करेंगे। इन हाई-पेइंग ग्राहकों के चले जाने से डिस्कॉम्स का रेवेन्यू गंभीर रूप से प्रभावित होगा। भारत में, डिस्कॉम्स अक्सर बड़े औद्योगिक ग्राहकों से मिली कमाई का इस्तेमाल घरों और किसानों को सस्ती बिजली देने के लिए करते हैं। ऐसे में, इन बड़े ग्राहकों के अलग होने से बची हुई बिजली दरों में इजाफा हो सकता है और डिस्कॉम्स का घाटा बढ़ सकता है।
दूसरे राज्यों से कैसे है अलग?
यह मॉडल तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से थोड़ा अलग है, जहाँ डेटा सेंटर निवेश को आकर्षित करने के लिए सीधे पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) या खास इंडस्ट्रियल टैरिफ का सहारा लिया जाता है। आंध्र प्रदेश का 'डीम्ड लाइसेंसी' मॉडल पावर मार्केट में एक नया विभाजन ला सकता है। जब बड़े उपभोक्ता अपनी बिजली खुद मैनेज करेंगे, तो घरों और किसानों पर फिक्स्ड कॉस्ट का बोझ बढ़ेगा, जिससे बिजली के बिल महंगे हो सकते हैं। इससे मौजूदा पावर ग्रिड की एफिशिएंसी भी प्रभावित हो सकती है।
रिन्यूएबल एनर्जी और APERC की भूमिका
इस पॉलिसी की एक अहम शर्त यह भी है कि डेटा सेंटरों को अपनी 51% बिजली रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स से लेनी होगी। यदि वे ऐसा करने में असमर्थ रहते हैं, तो उन्हें बैकअप पावर के लिए डिस्कॉम्स पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे संभावित रूप से लागत विवाद बढ़ सकते हैं। ऐसे मामलों में, आंध्र प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (APERC) को निष्पक्ष रेगुलेशन सुनिश्चित करना होगा। APERC की भूमिका यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण होगी कि नई लाइसेंसी कंपनियों के साथ-साथ डिस्कॉम्स के हितों का भी ध्यान रखा जाए और ग्रिड की ओवरऑल स्टेबिलिटी बनी रहे।
यह नई एनर्जी पॉलिसी भारत में बड़े पैमाने पर औद्योगिक बिजली की सोर्सिंग के भविष्य के मॉडलों के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होगी।
