Andhra Pradesh Data Centers: अब खुद खरीदेंगे बिजली! नए पॉवर लाइसेंस से इंफ्रा में आएगी बम्पर तेजी

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AuthorAditya Rao|Published at:
Andhra Pradesh Data Centers: अब खुद खरीदेंगे बिजली! नए पॉवर लाइसेंस से इंफ्रा में आएगी बम्पर तेजी
Overview

Andhra Pradesh सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी नई नीति के तहत **300 मेगावाट (MW)** से बड़े **डेटा सेंटर (Data Center)** को अपने पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस (Power Distribution License) हासिल करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से ये कंपनियां अब सीधे बिजली खरीद पाएंगी और अपने पावर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर सकेंगी।

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नई नीति का मतलब क्या है?

इस 'डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस' (DDL) के जरिए, 300 MW की क्षमता वाले या उससे अधिक के डेटा सेंटर ऑपरेटर अब अपनी बिजली खुद पैदा करने वाले प्लांट (captive power plants) या पॉवर एक्सचेंज से सीधे बिजली खरीद सकेंगे। इससे वे पारंपरिक यूटिलिटी सप्लायर्स पर निर्भरता कम कर सकेंगे और अपनी जरूरत के हिसाब से बिजली की अबाध आपूर्ति सुनिश्चित कर पाएंगे। इस नीति की एक खास शर्त यह है कि डेटा सेंटरों को अपनी कुल ऊर्जा खपत का कम से कम 51% हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) स्रोतों से लेना होगा।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

यह नीति ऐसे समय आई है जब भारत का डेटा सेंटर बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि यह 2025 तक $8.9 बिलियन से बढ़कर 2035 तक $31 बिलियन तक पहुंच सकता है। आंध्र प्रदेश, खासकर विशाखापत्तनम को AI इंफ्रास्ट्रक्चर और सबमरीन इंटरनेट केबल के हब के रूप में विकसित कर रहा है।

  • Google (Alphabet Inc.) विशाखापत्तनम में $15 बिलियन का निवेश करके एक AI हब और डेटा सेंटर क्लस्टर स्थापित करेगा। यह राज्य में इस नई नीति के तहत पहला प्राइवेट डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस पाने वाला होगा।
  • Reliance Industries भी शहर में $11 बिलियन का डेटा सेंटर प्रोजेक्ट शुरू कर रही है।
  • RMZ Corp अगले पांच सालों में $35 बिलियन का निवेश करके 1.5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता बनाने की योजना बना रहा है।
    यह कदम भारत के 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल पावर कैपेसिटी के लक्ष्य के साथ भी तालमेल बिठाता है।

चुनौतियाँ और भविष्य:

हालांकि, इस नीति में कुछ चुनौतियाँ भी हैं। 300 MW की बड़ी सीमा केवल बड़े 'हाइपरस्केल' ऑपरेटर्स को फायदा पहुंचाएगी। सीधा बिजली खरीद और खुद के डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम बनाने से मौजूदा बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) के राजस्व पर असर पड़ सकता है। रिन्यूएबल एनर्जी पर अधिक निर्भरता से बिजली की आपूर्ति में रुकावट (intermittency) की समस्या आ सकती है, जिसके लिए मजबूत एनर्जी मैनेजमेंट और स्टोरेज की जरूरत होगी।
फिर भी, आंध्र प्रदेश का यह कदम उसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगा और भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था व AI क्षमताओं को बढ़ावा देगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.