Amazon की यह चाल उसकी लो-अर्थ-ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट स्पेस में अपनी पकड़ मज़बूत करने की एक बड़ी स्ट्रेटेजी का हिस्सा मानी जा रही है। इस डील से Amazon मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और अप्रूवल्स का फायदा उठाते हुए अपने AWS Ground Station नेटवर्क को तेज़ी से बेहतर बना सकता है। यह कदम सीधे तौर पर SpaceX के Starlink को टक्कर देगा और Amazon को सरकारी व बड़े कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए अधिक सक्षम बनाएगा।
इस संभावित अधिग्रहण की खबर आते ही Globalstar के शेयर में ज़बरदस्त उछाल देखा गया, जिसका मार्केट कैप लगभग $8.5 अरब से $9 अरब के बीच है। हालांकि, Globalstar अभी निगेटिव P/E रेश्यो पर चल रही है, जो बताता है कि कंपनी का मूल्यांकन उसके भविष्य की संभावनाओं पर आधारित है, न कि मौजूदा मुनाफे पर। दूसरी ओर, Amazon के शेयर में 1.1% की मामूली बढ़त दिखी और यह $210.57 पर बंद हुआ। Amazon का $2.2 ट्रिलियन से ज़्यादा मार्केट कैप और 29.4 का P/E इसे एक बड़े खिलाड़ी के तौर पर दिखाता है, और यह डील उसके लिए एक स्ट्रेटेजिक निवेश है।
Amazon का अपना LEO प्रोजेक्ट, जिसे पहले Project Kuiper के नाम से जाना जाता था, अब तक लगभग 212 सैटेलाइट्स डिप्लॉय कर चुका है। लेकिन उसे Starlink जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिसके पास पहले से 10,000 से ज़्यादा सैटेलाइट्स हैं। OneWeb भी अपने नेटवर्क का विस्तार कर रही है। Amazon का मुख्य फायदा यह है कि वह अपनी LEO सेवाओं को Amazon Web Services (AWS) के साथ इंटीग्रेट कर सकता है, जिससे क्लाउड ऐप्स के लिए लोअर लेटेंसी मिलेगी और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस बेहतर होंगे।
यह डील पूरी तरह से आसान नहीं है। इसमें सबसे बड़ी बाधा Apple की Globalstar में 20% हिस्सेदारी है, जिसके लिए Apple ने $1.5 अरब का निवेश किया है। इसका मतलब है कि Amazon को Apple के साथ सीधी बातचीत करनी पड़ेगी। इसके अलावा, Amazon Leo को FCC (फेडरल कम्युनिकेशन्स कमीशन) की डेडलाइन का भी सामना करना पड़ रहा है। कंपनी को 30 जुलाई, 2026 तक 1,618 सैटेलाइट्स डिप्लॉय करने हैं, जिसके लिए उसने दो साल का एक्सटेंशन मांगा है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि यह डील Amazon के लिए काफी फायदेमंद हो सकती है, लेकिन इसमें कई रिस्क भी हैं। Globalstar की लगातार हो रही हानि और FCC की मंजूरी में देरी जैसी चुनौतियाँ हैं। SpaceX के साथ सीधी राइवलरी और LEO इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी लागत इस डील की राह मुश्किल बना सकती है। Apple का बड़ा निवेश इस डील में एक अनिश्चितता का तत्व जोड़ता है।
हालांकि, एनालिस्ट्स Amazon को लेकर ज़्यादातर पॉजिटिव हैं। उनका मानना है कि AWS की ग्रोथ और Amazon Leo सेवाओं के लॉन्च से कंपनी को नया और बड़ा रेवेन्यू स्ट्रीम मिलेगा, खासकर एंटरप्राइजेज और गवर्नमेंट्स के बीच। यह डील LEO मार्केट का चेहरा बदल सकती है और AWS की कनेक्टिविटी पोजीशन को मज़बूत कर सकती है।