AMD और Meta का ऐतिहासिक समझौता: AI चिप्स की रेस में बड़ा कदम
एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेस (AMD) और Meta Platforms के बीच एक बड़ा और रणनीतिक समझौता हुआ है। इस डील के तहत, AMD अगले पांच सालों में Meta को $60 अरब तक के AI चिप्स और कस्टम CPUs सप्लाई करेगा। इस समझौते में एक खास 'वारंट' (warrant) भी शामिल है, जिसके ज़रिए Meta, AMD के 10% तक शेयर खरीद सकता है, बशर्ते AMD कुछ परफॉरमेंस टारगेट पूरे करे।
Meta का AI पर बड़ा निवेश और AMD का फायदा
Meta का यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर में उसके तेज़ निवेश को दिखाता है। कंपनी 2026 तक AI और डेटा सेंटर के लिए $115 अरब से $135 अरब तक खर्च करने का अनुमान लगा रही है। इस डील से AMD को सीधे तौर पर बड़ा रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है। यह कदम Meta के लिए Nvidia पर अपनी निर्भरता कम करने और सप्लायर्स को डाइवर्सिफाई करने की रणनीति का हिस्सा है, भले ही Meta अपने खुद के चिप्स भी बना रहा हो।
Nvidia के प्रभुत्व को चुनौती?
AI चिप्स की मांग ज़बरदस्त बढ़ रही है। अनुमान है कि 2026 तक ग्लोबल चिप रेवेन्यू $975 अरब तक पहुंच जाएगा, जिसमें AI कंपोनेंट्स का बड़ा योगदान होगा। फिलहाल, Nvidia इस सेक्टर में $4.66 ट्रिलियन के मार्केट कैप और 47.2 के P/E रेश्यो के साथ हावी है। वहीं, AMD का मार्केट कैप लगभग $320 अरब और P/E रेश्यो 75.53 है (फरवरी 2026 के अनुमानित आंकड़े)। Meta की तरह OpenAI जैसी कंपनियां भी AI चिप्स पर भारी निवेश कर रही हैं।
विश्लेषकों की राय और संभावित जोखिम
विश्लेषक AMD की इस डील को लेकर ज़्यादातर सकारात्मक हैं। उन्हें AMD के शेयर में और तेज़ी की उम्मीद है, औसत प्राइस टारगेट $288.17 के आसपास है। हालांकि, इस डील में कुछ जोखिम भी हैं। $60 अरब की यह डील पांच साल में बंटी हुई है, यानी सालाना $12 अरब। Meta द्वारा AMD के 10% शेयर खरीदने का वारंट पूरी तरह से परफॉरमेंस पर आधारित है, और इसके लिए AMD को स्टॉक प्राइस $600 प्रति शेयर तक ले जाने जैसे कड़े लक्ष्य हासिल करने होंगे। अगर AMD ये लक्ष्य पूरे नहीं कर पाता, तो वारंट का महत्व कम हो जाएगा। इसके अलावा, Meta की अपनी चिप्स बनाने की योजना और Nvidia के मज़बूत CUDA सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम के सामने AMD को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।