AI का खौफ या IT कंपनियों का भविष्य?
एडवांस्ड AI की काबिलियत ने भारतीय IT कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन कंपनियों की कमाई ज्यादातर मैन-पावर और बिल किए जाने वाले घंटों पर आधारित है, लेकिन AI के आने से इन कामों को ऑटोमेट (Automate) करने का डर सता रहा है। इसी वजह से बाजार में बिकवाली देखी गई।
AI के कारण IT शेयरों में आई गिरावट
पिछले हफ्ते, Nifty IT इंडेक्स में करीब 8% की भारी गिरावट दर्ज की गई। Infosys के शेयर 13 फरवरी 2026 को 6.48% तक गिर गए, और इसके ट्रेडिंग वॉल्यूम (Trading Volume) में जबरदस्त उछाल आया। वहीं, TCS भी 2,579 रुपये के अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस बिकवाली के कारण कंपनियों के मार्केट कैप से अनुमानित $50 बिलियन (लगभग ₹4,15,000 करोड़) का सफाया हो गया। यह गिरावट कमजोर नतीजों के कारण नहीं, बल्कि AI के सामने बिजनेस मॉडल के पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) के कारण हुई।
Nifty IT इंडेक्स का P/E (Price-to-Earnings) रेशियो 13 फरवरी 2026 तक घटकर करीब 23.22 रह गया, जो इसके 1-साल के औसत 27.8 से काफी कम है। इससे पता चलता है कि निवेशकों ने कंपनियों का मूल्यांकन (Valuation) कम कर दिया है।
ऑटोमेशन (Automation) या विकास (Evolution): असली बहस
कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर AI की मदद से कंपनियां खुद ही सॉफ्टवेयर बनाने लगीं, तो पारंपरिक IT सर्विस प्रोवाइडर्स (Service Providers) का वजूद खतरे में पड़ सकता है। लेकिन, यह सोच थोड़ी अधूरी हो सकती है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि AI सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लाइफसाइकिल (Lifecycle) को काफी तेज कर देगा, जिससे प्रोडक्टिविटी (Productivity) बढ़ेगी। AI कोडिंग (Coding) में लगने वाले समय को कम कर सकता है, माइग्रेशन (Migration) और लेगेसी मॉडर्नाइजेशन (Legacy Modernization) को आसान बना सकता है। इससे रुकी हुई प्रोजेक्ट्स (Projects) को फिर से शुरू करने और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (Digital Transformation) की रफ्तार तेज हो सकती है, जिसके नतीजे में काम कम होने के बजाय बढ़ भी सकता है। अनुमान है कि IT Services मार्केट 2026 से 2034 तक 7.10% CAGR की दर से बढ़कर $2.64 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है, लेकिन भारतीय IT कंपनियों पर इसका सटीक असर देखना होगा।
निवेशकों के लिए AI का नया टूलकिट
AI अब खुद निवेश प्रक्रिया को भी बदल रहा है। ये नए टूल स्टॉक यूनिवर्स (Stock Universe) को तेजी से स्कैन करने, पैटर्न का विश्लेषण करने और जोखिमों का बेहतर आकलन करने में मदद करते हैं। 12 फरवरी 2026 तक, Infosys पर 5 एनालिस्ट्स (Analysts) की 'होल्ड' (Hold) रेटिंग थी, जिसका औसत टारगेट प्राइस $17.6 (लगभग ₹1460) था, जो 19.73% की संभावित बढ़ोतरी का संकेत देता है। वहीं, TCS के लिए 46 एनालिस्ट्स की 'बाय' (Buy) रेटिंग है, जिसका औसत टारगेट प्राइस ₹3,783.20 है, यानी 36.95% का बड़ा अपसाइड (Upside) संभव है।
हालांकि, AI के आउटपुट पर आँख बंद करके भरोसा करने के बजाय, उसे एक सहायक के तौर पर इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है। मानव निर्णय (Human Judgement) और गहरी समझ आज भी सबसे ज्यादा मायने रखती है। बाजार ऐसे निवेशकों को पुरस्कृत करेगा जो AI का इस्तेमाल करके गहरी अंतर्दृष्टि (Insights) हासिल कर सकें।
जोखिम और आगे का रास्ता
AI से प्रोडक्टिविटी बढ़ने पर कीमतों पर दबाव आ सकता है, जिससे ग्रोथ रेट (Growth Rate) कम हो सकती है। मिड-कैप (Mid-cap) IT कंपनियों पर इसका असर ज्यादा हो सकता है। उदाहरण के लिए, Wipro का P/E रेशियो 16.91x के आसपास है, जो Infosys (P/E ~19.83x) और TCS (P/E ~20.31x) से सस्ता लगता है। ग्लोबल कंपनी Accenture का P/E भी करीब 19.34 है।
हालांकि, बड़ी कंपनियों के जटिल सिस्टम, रेगुलेशन (Regulation) और मिशन-क्रिटिकल ऑपरेशन (Mission-critical Operations) की वजह से AI को लागू करने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत बनी रहेगी। गार्टनर (Gartner) का अनुमान है कि 2026 में ग्लोबल IT खर्च 9.8% बढ़कर $6.08 ट्रिलियन तक पहुंच जाएगा, जिसमें AI एक बड़ी वजह होगा।
कुल मिलाकर, IT शेयरों में आई यह गिरावट एक अंत का नहीं, बल्कि एक बड़े बदलाव का संकेत है। कंपनियाँ जो AI को अपने मॉडल में सही ढंग से इंटीग्रेट (Integrate) कर पाएंगी, वही आगे बढ़ेंगी।