IT दिग्गज Infosys के सामने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक दोधारी तलवार साबित हो रहा है। कंपनी के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी ने AI के 'रेस टू द बॉटम' (Race to the Bottom) यानी फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले इस्तेमाल की रफ्तार, इसके सकारात्मक विकास की गति से कहीं तेज होने की चेतावनी दी है। यह बयान IT सर्विस सेक्टर की बड़ी कंपनियों, जैसे Infosys, के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रहा है। कंपनी एक तरफ AI को भविष्य की ग्रोथ के बड़े अवसर के तौर पर देख रही है, तो दूसरी तरफ AI के कारण मौजूदा रेवेन्यू पर पड़ने वाले तत्काल गिरावट वाले असर (deflationary impact) से जूझ रही है।
AI का 'रेस टू द बॉटम' का खतरा
नीलेकणी की यह चिंता AI के अनियंत्रित इस्तेमाल से जुड़ी है, जो कहीं ज्यादा तेजी से फायदेमंद होने के बजाय नुकसान पहुंचा सकता है। यह बात सीधे तौर पर निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर रही है। Infosys के शेयर, 19 फरवरी 2026 से पहले के एक महीने में लगभग 20% तक गिर चुके थे, और 2026 में अब तक 15% से ज्यादा का नुकसान दिखा चुके हैं। फरवरी 2026 की शुरुआत में, BSE IT इंडेक्स में भी लगभग 15% की गिरावट देखी गई। यह व्यापक मार्केट की घबराहट दिखाती है कि निवेशक AI के कारण पारंपरिक IT सर्विस रेवेन्यू में आने वाली संभावित 40% तक की गिरावट को, लंबे समय में मिलने वाले फायदों से पहले ही अपनी कीमतों में शामिल कर रहे हैं। यानी, AI से इंसानी कामों के ऑटोमेशन का डर सता रहा है।
AI एंबिशन बनाम मार्केट की हकीकत
इसके बावजूद, Infosys AI की दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रही है। कंपनी 2030 तक $300-400 बिलियन के ग्लोबल AI सर्विस मार्केट पर कब्जा करने का लक्ष्य रखती है। Infosys अपनी AI-फर्स्ट स्ट्रैटेजी पर जोर दे रही है, जिसके तहत Topaz Fabric जैसे प्लेटफॉर्म और 500 से ज्यादा AI एजेंट्स को क्लाइंट्स के सिस्टम में उतारा जा रहा है। वर्तमान में, नए AI सर्विसेज कंपनी के रेवेन्यू का करीब 5.5% हैं, और वह 4,600 से ज्यादा AI प्रोजेक्ट्स पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। मैनेजमेंट ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए 3% से 3.5% के रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान लगाया है, जो पहले के अनुमानों से ज्यादा है, और इसका मुख्य कारण AI की बढ़ती मांग है।
प्रतिस्पर्धा और वैल्यूएशन
हालांकि, इस महत्वाकांक्षा के साथ बाजार की चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। AI को अपनाने की गति और स्पेशल AI टैलेंट व इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश के कारण मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। Infosys के प्रतिद्वंद्वी, जैसे Tata Consultancy Services (TCS) और Wipro भी AI में भारी निवेश कर रहे हैं। TCS पहले ही $1.8 बिलियन की सालाना AI सर्विस रेवेन्यू की रिपोर्ट कर चुका है। Infosys का पिछले बारह महीनों का P/E रेशियो करीब 19-20 है, जो TCS (लगभग 20.6x) और Wipro (लगभग 16.7x) के बीच आता है, और इंडस्ट्री के औसत P/E (22.25) से थोड़ा कम है। यह दर्शाता है कि बाजार फिलहाल Infosys की AI संभावनाओं को उसके साथियों के बराबर ही आंक रहा है, जबकि पूरे सेक्टर के वैल्यूएशन में रीसेट देखा जा रहा है।
निवेशकों की चिंताएं और रेगुलेटरी चुनौतियां
इन सब रणनीतिक निवेशों और बड़े लक्ष्यों के बावजूद, Infosys के सामने कई बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। बाजार अभी भी AI से मिलने वाले रेवेन्यू ग्रोथ के समय को लेकर संशय में है। 'टर्मिनल वैल्यू' (Terminal Value) और AI के विघटनकारी प्रभाव (disruptive impact) के कारण निकट भविष्य में मल्टीपल री-रेटिंग (multiple re-ratings) पर प्रतिबंध लगने की चिंताएं हैं। एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है, Infosys के लिए 'होल्ड' (Hold) की कंसेंसिस रेटिंग है, हालांकि प्राइस टारगेट ₹1,760 से ₹2,200 तक की संभावित बढ़त का सुझाव देते हैं। हालिया स्टॉक गिरावट, जो 2024 के अंत के बाद से सबसे निचले स्तर पर आ गई है, इस निवेशक घबराहट को उजागर करती है। इसके अलावा, भारत में IT सेक्टर को बदलते नियामक नियमों का भी सामना करना पड़ रहा है। 20 फरवरी 2026 से प्रभावी नए नियमों के तहत AI-जनित सामग्री के लिए सख्त अनुपालन दायित्व होंगे, जिसमें अनिवार्य लेबलिंग और 'सिंथेटिक रूप से उत्पन्न जानकारी' (synthetically generated information) के लिए त्वरित हटाए जाने की समय-सीमा शामिल है। यह नियामक माहौल सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए परिचालन जटिलता और जोखिम की एक और परत जोड़ता है।
भविष्य की राह
विश्लेषकों को उम्मीद है कि 2026 में AI को अपनाने की दर बढ़ने के साथ IT सेक्टर में एक सावधानीपूर्ण रिकवरी देखी जा सकती है। Gartner का अनुमान है कि भारत के IT सर्विसेज सेक्टर में 11.1% की ग्रोथ होगी। Infosys के लिए AI-जनित दक्षता (efficiencies) और पुराने व्यवसायों में संभावित रेवेन्यू हानि के बीच के तनाव को सफलतापूर्वक पार करना महत्वपूर्ण होगा। कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति उसके AI रोडमैप के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है, ताकि पायलट प्रोजेक्ट्स और एंटरप्राइज-वाइड, परिणाम-आधारित डिप्लॉयमेंट के बीच के अंतर को पाटा जा सके। हालांकि इंडस्ट्री लीडर्स AI को अपने संचालन में एकीकृत कर रहे हैं, बाजार का वर्तमान वैल्यूएशन लाभप्रदता (profitability) और टिकाऊ ग्रोथ पर AI के सकारात्मक प्रभाव के ठोस सबूतों की तात्कालिक आवश्यकता को दर्शाता है।