AI को अपनाने की रफ़्तार तेज़ हो रही है, और Anthropic का भारत पर फोकस इसी का एक बड़ा सबूत है। बेंगलुरु में अपना दूसरा एशियाई ऑफिस खोलना और आईटी दिग्गज Infosys के साथ रणनीतिक साझेदारी का ऐलान करना, कंपनी की मार्केट में मजबूत पकड़ का संकेत देता है। Infosys के शेयर इस खबर के बाद 5% तक चढ़ गए।
Anthropic ने हाल ही में $30 अरब की फंडिंग जुटाई है, जिससे इसकी वैल्यूएशन $380 अरब (फरवरी 2026 तक) तक पहुंच गई है। यह AI फर्मों के लिए चल रहे इन्वेस्टमेंट बूम को दिखाता है। कंपनी का एनुअल रेवेन्यू रन-रेट $14 अरब तक पहुँच गया है, जो इसके 'Claude' मॉडल्स की तेज़ी से बढ़ती मांग का प्रमाण है।
भारत का AI मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है और ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए एक बड़ा अवसर पेश कर रहा है। अनुमान है कि यह मार्केट $8 अरब (2025) से बढ़कर $17 अरब (2027) तक पहुंच जाएगा। सरकारी पहलों, जैसे 'IndiaAI Mission', से इस सेक्टर को और बल मिलने की उम्मीद है। सरकार AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने के लिए 38,000 से ज़्यादा GPU यूनिट्स लाने की योजना बना रही है। इस फील्ड में OpenAI और Google जैसी बड़ी कंपनियां भी भारत में एक्टिव हैं। Microsoft भी OpenAI और Anthropic दोनों के साथ काम करके अपना AI पोर्टफोलियो मज़बूत कर रहा है।
हालांकि, इस AI बूम और भारी भरकम इन्वेस्टमेंट के बीच कुछ चिंताएं भी हैं। Anthropic जैसी कंपनियों का $380 अरब का वैल्यूएशन बाज़ार में ओवरवैल्यूएशन और ग्रोथ की स्थिरता पर सवाल खड़े करता है। एनालिस्ट्स का Infosys जैसी कंपनियों पर मिली-जुली राय है, उनका कहना है कि कई कंपनियाँ अभी AI को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए तैयार नहीं हैं। AI से होने वाली उत्पादकता बढ़ोतरी के साथ-साथ नौकरियों के ख़तरे की चिंता भी बनी हुई है, खासकर मैन्युफैक्चरिंग और कस्टमर सर्विस जैसे सेक्टरों में। AI का इस्तेमाल ज़्यादातर टेक सेक्टर तक सीमित है, जिससे इसके फायदों का असमान वितरण हो सकता है।
आगे चलकर, भारत में AI एडॉप्शन एंटरप्राइज इन्वेस्टमेंट और सरकारी नीतियों से तय होगा। 'IndiaAI Mission' जैसी योजनाएं देश में AI क्षमताएं बढ़ाने का लक्ष्य रखती हैं। ब्रोकरेज फर्मों की Infosys पर मिली-जुली राय के बावजूद, भविष्य में AI-संचालित सेवाओं से ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि, एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनियों को AI को पूरी तरह से अपनाने और इसका ROI (रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट) देखने में समय लग सकता है। क्लाउड माइग्रेशन से अलग, AI के लिए कंपनियों को अपने बिज़नेस मॉडल और डेटा आर्किटेक्चर में बड़े बदलाव करने होंगे।