AI का 'सुनामी' और आउटसोर्सिंग का भविष्य
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ प्रोडक्टिविटी (productivity) बढ़ाने का टूल नहीं रह गया है, बल्कि यह एम्प्लॉयमेंट (employment) के पूरे ढांचे को बदल रहा है। Damac Group के फाउंडर और चेयरमैन, Hussain Sajwani ने इस खतरे को आगाह किया है। उन्होंने कहा कि AI की ट्रांसफॉर्मेटिव पावर (transformative power) इंटरनेट से 10 से 100 गुना ज्यादा हो सकती है। उनकी चेतावनी सीधे तौर पर उन इकोनॉमी (economies) पर है जो आउटसोर्स किए गए लेबर (labour) पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। ऐसे में, भारत, जो लंबे समय से IT, बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO), कॉल सेंटर और बैक-ऑफिस फंक्शन्स (back-office functions) में दुनिया का सबसे बड़ा हब रहा है, इस बड़े बदलाव की कगार पर खड़ा है। रिपोर्ट्स (reports) के मुताबिक, AI-ड्रिवन ऑटोमेशन (automation) इस सेक्टर को पूरी तरह बदल सकता है। हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि Tata Consultancy Services (TCS) ने 12,200 कर्मचारियों को कम किया है, जो आने वाले सालों में 5 लाख तक नौकरियों में कटौती का संकेत हो सकता है। AI खास तौर पर रूटीन प्रोग्रामिंग, मैन्युअल टेस्टिंग, कस्टमर सपोर्ट और एडमिनिस्ट्रेटिव फंक्शन्स (administrative functions) को बहुत तेजी से और किफायती रूप से कर सकती है। Sajwani का अनुमान है कि अकाउंटिंग (accounting) और नर्सिंग (nursing) जैसे फील्ड्स में 80% तक भूमिकाएं AI से डिस्प्लेस (displace) हो सकती हैं।
ग्लोबल AI अडॉप्शन में बढ़ता फासला
Sajwani ने AI को अपनाने (adoption) में देशों के बीच बढ़ती खाई पर भी ध्यान खींचा। उन्होंने बताया कि चीन, अमेरिका, UAE और सऊदी अरब जैसे देश AI में भारी निवेश (investment) कर रहे हैं और अपनी क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रहे हैं। यह उन देशों के बिल्कुल उलट है जो AI को लेकर झिझक दिखाते हैं या सख्त रेगुलेशन (regulations) लगाते हैं, और इससे वे कॉम्पिटिटिव एडवांटेज (competitive advantage) खो सकते हैं। इसका एक उदाहरण यह है कि UAE, प्रोफेशनल्स (professionals) के बीच AI टूल के इस्तेमाल में दुनिया भर में दूसरे नंबर पर है। लिंक्डइन (LinkedIn) के एक हालिया पोल (poll) में यह बात सामने आई है, जहां बड़ी संख्या में वर्कर्स (workers) अपनी रोजमर्रा की एक्टिविटीज (activities) में जनरेटिव AI को इंटीग्रेट (integrate) कर रहे हैं। गल्फ रीजन (Gulf region) में रिक्रूटर्स (recruiters) का एक बड़ा हिस्सा नौकरियों पर AI के असर की उम्मीद कर रहा है, और कई कंपनियां उम्मीद करती हैं कि भूमिकाएं या तो विकसित होंगी (evolve) या पूरी तरह से बदल जाएंगी (replaced)। DAMAC Group भी AI की बढ़ती मांग के चलते डेटा सेंटर्स (data centers) में विस्तार कर रहा है।
नौकरियों के खत्म होने से परे: नई भूमिकाएं और स्किल्स का विकास
हालांकि, AI के असर की कहानी सिर्फ नौकरियों के खत्म होने तक सीमित नहीं है। एक्सपर्ट्स (experts) का कहना है कि जहां रूटीन ऑटोमेशन कुछ भूमिकाओं को विस्थापित कर सकता है, वहीं यह नए अवसरों (opportunities) को भी जन्म दे रहा है। साथ ही, उन मानवीय गुणों की निरंतर मांग बनी रहेगी जो AI आसानी से नहीं कर सकती। Indian Economic Survey 2026 भी इसी दोहरेपन की ओर इशारा करता है, जिसमें उभरती हुई भूमिकाओं और सॉफ्ट स्किल्स (soft skills), क्रिएटिविटी (creativity) और एडैप्टेबिलिटी (adaptability) जैसी खूबियों की निरंतर आवश्यकता बताई गई है। भारत के विशाल टैलेंट पूल (talent pool) और मौजूदा AI स्किल पेनिट्रेशन (penetration) को देखते हुए, यह देश लेबर एक्सपोर्टर से इनोवेशन (innovation) और AI सर्विसेज हब बनने की ओर बढ़ सकता है। AI ट्रेनिंग, डिजिटल स्किल्स, डेटा सेंटर्स और मजबूत कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (computing infrastructure) में स्ट्रैटेजिक (strategic) निवेश, जॉब मार्केट के झटकों को कम करने और हाई-वैल्यू एम्प्लॉयमेंट (high-value employment) को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी है। ग्लोबल टेक्नोलॉजी एनालिस्ट्स (analysts) का कहना है कि AI न केवल नौकरियां खत्म कर रही है, बल्कि AI डेवलपमेंट, डेटा साइंस और सिस्टम इंटीग्रेशन जैसे नए एरिया में नई पोजिशन्स (positions) भी बना रही है। UAE और सऊदी अरब सहित खाड़ी देश भी AI टैलेंट डेवलपमेंट और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (digital transformation) की रणनीतियों पर आक्रामक रूप से काम कर रहे हैं, ताकि वे रीजनल टेक्नोलॉजी सेंटर्स के तौर पर अपनी पहचान बना सकें। वर्कर्स और स्टूडेंट्स के लिए यह ज़रूरी है कि वे री-स्किलिंग (re-skilling), टेक्नोलॉजिकल एडॉप्शन (technological adaptation) पर ध्यान दें और उन भूमिकाओं पर फोकस करें जिनमें क्रिएटिविटी, मैनेजमेंट, एथिक्स (ethics) और इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन (interpersonal communication) की जरूरत हो, जहां AI एक सहायक (assistant) के तौर पर काम करे, न कि रिप्लेसमेंट (replacement) के तौर पर। यह विकसित होता आर्थिक परिदृश्य, टेक्नोलॉजिकल पॉलिसी और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस (competitiveness) द्वारा संचालित है, जिसके लिए सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों और व्यक्तियों से एक फॉरवर्ड-लुकिंग अप्रोच (forward-looking approach) की आवश्यकता है।