AI चिप्स का बोलबाला: ताइवान, साउथ कोरिया इमर्जिंग मार्केट्स में बने टॉप; भारत क्यों पिछड़ा?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
AI चिप्स का बोलबाला: ताइवान, साउथ कोरिया इमर्जिंग मार्केट्स में बने टॉप; भारत क्यों पिछड़ा?
Overview

AI चिप्स के दबदबे के कारण ताइवान और साउथ कोरिया इमर्जिंग मार्केट्स (EM) के इंडेक्स में सबसे आगे निकल गए हैं। ताइवान का मार्केट कैप लगभग **$4.6 ट्रिलियन** तक पहुँच गया है, जबकि साउथ कोरिया का Kospi इंडेक्स रिकॉर्ड सेमीकंडक्टर आय के चलते **7,000** अंक के पार चला गया है। इसके विपरीत, भारत का मार्केट कैप 2026 में अब तक लगभग **7%** गिर गया है, जो AI के फाउंडेशनल सेक्टर में भागीदारी की कमी को दर्शाता है।

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AI चिप्स के दबदबे ने इमर्जिंग मार्केट्स (EM) के इंडेक्स में एक बड़ा बदलाव ला दिया है। ताइवान और साउथ कोरिया, AI वैल्यू चेन में अपनी गहरी पैठ के दम पर मार्केट कैप और इंडेक्स वेटेज बढ़ा रहे हैं। वहीं, भारत का पिछड़ना AI सेक्टर में भागीदारी की बढ़ती खाई को उजागर कर रहा है।

ताइवान और साउथ कोरिया की AI क्रांति

ताइवान MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में टॉप पर पहुँच गया है, जिसका वेटेज अब 24.84% है। यह AI हार्डवेयर बूम का नतीजा है, जहां Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC) अकेले TAIEX के मार्केट वैल्यू का 40% से अधिक हिस्सा रखती है। Nvidia और Apple जैसे टेक दिग्गजों के लिए एडवांस्ड AI चिप्स की निर्माता TSMC का मार्केट कैपिटलाइजेशन अनुमानित $1.8 ट्रिलियन तक पहुँच गया है। इससे ताइवान का कुल मार्केट कैप लगभग $4.6 ट्रिलियन हो गया है। TAIEX इंडेक्स भी मई 2026 की शुरुआत में 40,000 अंक के अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गया।

साउथ कोरिया का Kospi इंडेक्स भी AI-संचालित सफलता दिखा रहा है, जो 6 मई 2026 को 7,000 अंक के पार कर गया। देश का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग $4.59 ट्रिलियन है, जो कनाडा को पछाड़कर दुनिया का सातवां सबसे बड़ा इक्विटी मार्केट बन गया है। इस उछाल का मुख्य श्रेय मेमोरी चिप दिग्गजों Samsung Electronics और SK Hynix को जाता है, जिनके High Bandwidth Memory (HBM) चिप्स AI के लिए महत्वपूर्ण हैं। Samsung Electronics ने हाल ही में $1 ट्रिलियन मार्केट कैपिटलाइजेशन का बैरियर तोड़ा, जबकि SK Hynix ने भी रिकॉर्ड ऊंचाई हासिल की। Kospi ने 2026 में अब तक 75% की शानदार बढ़त दर्ज की है। सेमीकंडक्टर्स अब Kospi के ऑपरेटिंग प्रॉफिट का लगभग 60% हिस्सा हैं।

वैल्यूएशन में बड़ा अंतर

वैल्यूएशन मेट्रिक्स में बड़ा अंतर साफ दिख रहा है। मई 2026 की शुरुआत में, Kospi इंडेक्स का फॉरवर्ड P/E रेश्यो 8.1 है, जो S&P 500 (20.7) और जापान के Nikkei 225 (22.7) से काफी कम है, और ताइवान के TAIEX (19.1) से भी कम है। मजबूत आय वृद्धि के बावजूद यह कम वैल्यूएशन साउथ कोरियाई इक्विटी के लिए महत्वपूर्ण री-रेटिंग क्षमता का संकेत देता है। TSMC की एडवांस्ड चिप फैब्रिकेशन में 7nm और उससे नीचे के नोड्स पर 74% की बढ़त एक मजबूत मोएट (moat) स्थापित करती है। इसी तरह, Samsung और SK Hynix का HBM और अन्य AI-महत्वपूर्ण मेमोरी सॉल्यूशंस में दबदबा प्रवेश के लिए बड़े बैरियर बनाता है।

भारत का AI गैप और प्रदर्शन

इसके बिल्कुल विपरीत, भारत के इक्विटी मार्केट्स में 2026 में अब तक लगभग 7% की गिरावट आई है, जबकि 2025 में मामूली 2% की वृद्धि हुई थी। TCS और Infosys जैसी बड़ी भारतीय IT फर्म AI-संबंधित सेवाएं प्रदान करती हैं, लेकिन ये मुख्य रूप से एप्लिकेशन-लेयर बिजनेस हैं, जिनमें AI बूम को चलाने वाली फाउंडेशनल हार्डवेयर और चिप डिजाइन क्षमताएं नहीं हैं। भारत के पास TSMC जैसा कोई लिस्टेड विकल्प नहीं है या पब्लिक AI चिप डिजाइन स्टार्टअप्स का मजबूत पाइपलाइन नहीं है। कोर AI वैल्यू चेन से भारत की अनुपस्थिति का मतलब है कि निवेशक एक बड़े ग्रोथ एरिया को मिस कर रहे हैं। स्ट्रेच्ड वैल्यूएशन, सुस्त आय और विदेशी आउटफ्लो जैसे कारकों ने भारत के अंडरपरफॉर्मेंस को बढ़ा दिया है, लेकिन सबसे बड़ी बाधा AI सेक्टर में सीधी भागीदारी की कमी है। Nifty 50 इंडेक्स 21.2 के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, जो साउथ कोरिया के Kospi की तुलना में प्रीमियम है, जबकि AI भागीदारी में काफी पीछे है।

आगे का रास्ता और जोखिम

AI सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए एनालिस्ट का आउटलुक मजबूत है, जिसमें अगले 12 महीनों में Kospi कंपनियों के लिए 200% से अधिक आय वृद्धि का अनुमान है। TSMC जैसी कंपनियां 2026 में राजस्व में 30% से अधिक वृद्धि का अनुमान लगा रही हैं, जबकि Samsung मेमोरी बिजनेस में लगातार मजबूती की उम्मीद कर रहा है, जो 2026 तक AI बूम जारी रहने का अनुमान लगाता है। हालांकि, कुछ सेमीकंडक्टर दिग्गजों में इस रैली का केंद्रीकरण जोखिम प्रस्तुत करता है। AI खर्च में धीमी गति या टाइट ग्लोबल लिक्विडिटी से महत्वपूर्ण अस्थिरता हो सकती है। भारत के नीति निर्माताओं को भविष्य के विकास को बढ़ावा देने के लिए घरेलू AI कंपनियों को पूंजी बाजारों तक जल्द पहुँचने में मदद करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.