Nifty50 में AI का भूचाल, IT का दम घुटा!
भारत के सबसे बड़े शेयर बाजार इंडेक्स Nifty50 में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव आया है। 12 फरवरी, 2026 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर फैली चिंताओं और इसके भविष्य में बिजनेस पर पड़ने वाले संभावित असर की आशंकाओं के चलते, लंबे समय से दबदबा रखने वाले इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर की चमक फीकी पड़ गई है। AI के डर से IT सेक्टर का वेटेज Nifty50 में घटकर 9.2% रह गया है, जबकि पहले यह 10.8% था। वहीं, Oil & Gas सेक्टर का वेटेज 9.9% से बढ़कर 10.1% हो गया है, और इसने IT सेक्टर को पीछे छोड़ दिया है। इस बड़े फेरबदल के कारण Nifty IT इंडेक्स में 5.51% की भारी गिरावट आई, और बीते हफ्ते की बात करें तो यह 14.1% लुढ़क गया। इस गिरावट से भारतीय IT दिग्गज कंपनियों का मार्केट कैप लगभग $52 अरब डॉलर (लगभग ₹4.3 लाख करोड़) घट गया।
सेक्टरों की बदलती तस्वीर और प्रदर्शन का अंतर
Nifty50 में अब Financial Services का वेटेज सबसे अधिक 37.5% है। इसके बाद Oil & Gas सेक्टर 10.1% वेटेज के साथ दूसरे स्थान पर आ गया है, और IT सेक्टर 9.2% वेटेज के साथ तीसरे नंबर पर खिसक गया है। यह बदलाव दिखाता है कि निवेशक अब भविष्य के ग्रोथ इंजन के तौर पर एनर्जी सिक्योरिटी और कमोडिटी साइकिल्स को IT सेवाओं से ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। जहां एक तरफ Nifty Oil & Gas इंडेक्स ने पिछले एक हफ्ते में 3.48% का शानदार रिटर्न दिया है और पिछले एक साल में 22.09% बढ़ा है, वहीं Nifty IT इंडेक्स का एक साल का रिटर्न गिरकर -20.54% पर आ गया है।
AI का खतरा: सिर्फ एक 'करेक्शन' या 'स्ट्रक्चरल' बदलाव?
बाजार में यह बड़ी गिरावट AI प्रॉडक्ट्स के लॉन्च होने और उनके disruptive पोटेंशियल को लेकर फैली चिंता से शुरू हुई है। असली चिंता की बात यह है कि AI का असर पिछले तकनीकी बदलावों जैसे क्लाउड माइग्रेशन से कहीं ज्यादा गहरा है। क्लाउड माइग्रेशन में मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर 'लिफ्ट-एंड-शिफ्ट' होता था, जिससे नए काम के अवसर पैदा होते थे। लेकिन AI तो सीधे तौर पर मुख्य सेवाओं को टारगेट कर रहा है और मौजूदा बिजनेस मॉडल्स को commoditize कर सकता है। सिटी (Citi) की रिपोर्ट के अनुसार, AI से होने वाली नई कमाई अभी शुरुआती दौर में है और यह पारंपरिक IT सेवाओं के काम में आने वाले विघटन की भरपाई नहीं कर पाएगी। इस विश्लेषण से यह संकेत मिलता है कि यह गिरावट सिर्फ एक अस्थायी सुधार नहीं, बल्कि भारतीय IT सेक्टर के लिए एक बड़े, स्ट्रक्चरल बदलाव की शुरुआत हो सकती है। इस आशंका के चलते, TCS के शेयर 5.5% गिरकर दिसंबर 2020 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गए। Infosys के शेयर लगभग 6% लुढ़ककर नवंबर 2023 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। HCL Technologies, Tech Mahindra, और Wipro के शेयरों में भी 5% से 6% तक की तेज गिरावट देखी गई।
वैल्यूएशन पर सवाल और 'बेयर केस'
बाजार की यह री-प्राइसिंग IT कंपनियों के वैल्यूएशन मल्टीपल्स (Valuation Multiples) पर भी साफ दिख रही है। Infosys, जो एक बेंचमार्क स्टॉक है, लगभग 21.32 के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, जबकि TCS का P/E करीब 19.47 है। ये ग्लोबल IT दिग्गज Accenture (लगभग 17.59 P/E) से तो ज्यादा हैं, पर IBM (लगभग 34.9 P/E) से कम। हालांकि, कुछ भारतीय कंपनियों का वैल्यूएशन और भी चिंताजनक लग रहा है। उदाहरण के लिए, Tech Mahindra का P/E करीब 37.90 है, जो सेक्टर में चल रही मुश्किलों और AI सेवाओं के बढ़ते कॉम्पिटिशन को देखते हुए टिकाऊ नहीं लगता। Infosys के लिए एनालिस्ट्स की राय भी अनिश्चितता दर्शाती है, जहां ज्यादातर एनालिस्ट्स ('80%') इसे 'होल्ड' (Hold) रेटिंग दे रहे हैं, और कुछ तो 'Strong Sell' की सलाह भी दे रहे हैं। मुख्य 'बेयर केस' (Bear Case) यह है कि AI, जो दिमाग वाले कामों को ऑटोमेट कर सकता है, सीधे तौर पर भारतीय IT के ग्रोथ मॉडल, जो लेबर आर्बिट्रेज पर आधारित था, को चुनौती दे रहा है। इंडस्ट्री की AI-नेटिव हाई-वैल्यू सेवाओं में सफल होने की क्षमता अभी साबित नहीं हुई है।
आगे का रास्ता और सेक्टर रोटेशन
फिलहाल के बाजार के हालात उन सेक्टरों के पक्ष में हैं जिन्हें ज्यादा मजबूत या मौजूदा मैक्रो ट्रेंड्स से फायदा उठाने वाला माना जा रहा है। Oil & Gas शेयरों का मजबूत प्रदर्शन, IT सेक्टर की मुश्किलों के बिल्कुल विपरीत है, जो एक बड़े थीमैटिक रोटेशन (Thematic Rotation) का संकेत देता है। भले ही भारतीय IT कंपनियां AI से कमाई को लेकर अभी अपनी भविष्य की योजनाएं बना रही हैं, लेकिन फिलहाल निवेशकों का ध्यान इस बदलाव को संभालने पर है। Nifty50 में IT सेक्टर के वेटेज में आई इतनी बड़ी गिरावट बताती है कि निवेशक अब लंबी अवधि की ग्रोथ की संभावनाओं पर दोबारा विचार कर रहे हैं, और ऐसे समय में वे उन कंपनियों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं जिनके पास निकट भविष्य में ठोस रेवेन्यू की संभावनाएँ हैं और जो AI से होने वाले व्यवधान से कम प्रभावित हों।