AI का खौफ: भारतीय IT स्टॉक्स में सुनामी, Nifty IT 6% लुढ़का

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
AI का खौफ: भारतीय IT स्टॉक्स में सुनामी, Nifty IT 6% लुढ़का
Overview

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते खतरे और एंथ्रोपिक (Anthropic) जैसे स्टार्टअप्स द्वारा नए टूल्स लॉन्च करने की खबरों ने भारतीय IT शेयरों में हड़कंप मचा दिया है। नतीजतन, बुधवार को Nifty IT इंडेक्स में **5.9%** की भारी गिरावट दर्ज की गई। Infosys, Wipro और TCS जैसे बड़े नामों के शेयरों में तेज बिकवाली देखी गई।

यह बिकवाली बुधवार, 4 फरवरी 2026 को तब शुरू हुई जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप एंथ्रोपिक ने इन-हाउस लीगल टीमों के लिए एक नया प्रोडक्टिविटी टूल लॉन्च किया। इस डेवलपमेंट ने निवेशकों के मन में यह डर पैदा कर दिया कि AI की एडवांस्ड क्षमताएं सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में प्रॉफिटेबिलिटी को काफी कम कर सकती हैं। Nifty IT इंडेक्स ने अप्रैल 7, 2025 के बाद अपनी सबसे तेज इंट्राडे गिरावट दर्ज की, जो 5.9% रही।

दिग्गजों पर गिरी गाज

इस बिकवाली का सबसे ज्यादा असर देश की बड़ी IT कंपनियों पर पड़ा। Persistent Systems Ltd. और LTIMindtree के शेयर 7.5% से ज्यादा टूटे, जबकि Infosys और Tata Consultancy Services (TCS) के शेयरों में 6% से अधिक की गिरावट आई। Wipro के शेयर में भी लगभग 6.7% की गिरावट दर्ज की गई।

ग्लोबल मार्केट में भी AI का डर

भारतीय बाजार में दिखी यह घबराहट वैश्विक रुझानों का ही आईना थी। वॉल स्ट्रीट मंगलवार, 3 फरवरी 2026 को भारी गिरावट के साथ बंद हुआ, जहाँ Nasdaq Composite इंडेक्स 1.43% नीचे आया। ब्लूमबर्ग के अनुसार, गोल्डमैन सैक्स ग्रुप इंक. द्वारा ट्रैक किए जाने वाले अमेरिकी सॉफ्टवेयर स्टॉक्स के एक बास्केट में 6% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो कि अप्रैल में टैरिफ-संचालित बिकवाली के बाद से एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट है। एशियाई बाजार भी इसी तर्ज पर गिरे, जहाँ लीगल सॉफ्टवेयर और डेटा सर्विसेज फर्मों को काफी नुकसान हुआ।

ट्रेड डील से थोड़ी राहत

AI-प्रेरित दबाव के बावजूद, भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए सब कुछ नकारात्मक नहीं था। हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संपन्न हुए ट्रेड डील ने एक अहम सहारा प्रदान किया। हालांकि IT सर्विसेज और सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट्स सीधे तौर पर टैरिफ के दायरे में नहीं आते, ICICI सिक्योरिटीज के अनुसार, अमेरिका के साथ बेहतर व्यापारिक संबंध - जो इस सेक्टर के 60% से अधिक रेवेन्यू का बाजार है - रणनीतिक संरेखण (strategic alignment) में वृद्धि और भू-राजनीतिक ओवरहैंग (geopolitical overhang) में कमी का संकेत देते हैं। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि ट्रेड डील का असर सेंटीमेंटली पॉजिटिव है, जिसमें वीजा रेगुलेशन, टेक बजट और डेटा गवर्नेंस IT सर्विसेज के लिए प्रमुख कैटेलिस्ट बने रहेंगे।

डेटा सेंटर्स को बजट का सहारा

2026 के यूनियन बजट से भी उम्मीदें बढ़ी हैं। डेटा सेंटर्स में निवेश को बढ़ावा देने के प्रस्तावों में उन विदेशी कंपनियों के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे शामिल है जो भारतीय डेटा सेंटर्स से वैश्विक स्तर पर क्लाउड सर्विसेज प्रदान करती हैं। इस पहल का उद्देश्य टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के भविष्य के विकास का समर्थन करने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है, जिससे सेवा प्रदाताओं के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं।

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