AI का IT Jobs पर कब्ज़ा: एंट्री-लेवल नौकरियों पर मंडराया खतरा, स्पेशलिस्ट की हो रही बम्पर डिमांड!

TECH
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
AI का IT Jobs पर कब्ज़ा: एंट्री-लेवल नौकरियों पर मंडराया खतरा, स्पेशलिस्ट की हो रही बम्पर डिमांड!
Overview

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत के IT सेक्टर में बड़ा बदलाव ला रहा है। इसके चलते एंट्री-लेवल की नौकरियों में भारी कमी आई है, जबकि AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सिक्योरिटी जैसे स्पेशलाइज्ड स्किल्स की डिमांड आसमान छू रही है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

IT सेक्टर में AI का तूफ़ान!

भारत का IT जॉब मार्केट इस वक्त एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रहा है, जिसका मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेज़ी से बढ़ता प्रभाव है। ऑटोमेशन और जनरेटिव AI टूल्स के आने से एंट्री-लेवल और मिड-लेवल की कई नौकरियां लगभग ख़त्म सी हो गई हैं। Ramani Dathi, जो TeamLease Services की CFO हैं, के मुताबिक, IT सेक्टर में छंटनी का दौर 2024 के अंत और 2025 की शुरुआत में काफी ज़्यादा था। अब कॉन्ट्रैक्ट स्टाफिंग में थोड़ी स्थिरता आई है, लेकिन हायरिंग का तरीका हमेशा के लिए बदल गया है।

Dathi ने कहा, "एंट्री-लेवल और शुरुआती मिड-लेवल जॉब्स में AI के प्रभाव की वजह से बिल्कुल भी नेट हायरिंग नहीं हो रही है।" ऑटोमेशन टूल्स ने टेस्टिंग, कोडिंग और बेसिक IT सपोर्ट जैसे कामों को बेकार कर दिया है। आलम यह है कि इन शुरुआती भूमिकाओं के लिए जितनी मांग है, सप्लाई उससे कहीं ज़्यादा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन स्किल्स के लिए सिर्फ 30% मांग ही पूरी हो पा रही है।

स्पेशलिस्ट की डिमांड, घट रही एंट्री-लेवल की ज़रूरत!

यह मांग और सप्लाई का गैप खासतौर पर एडवांस्ड और स्पेशलाइज्ड IT स्किल्स के लिए बहुत ज़्यादा है। कंपनियां AI इंजीनियरिंग, डेटा एनोटेशन, क्लाउड आर्किटेक्चर और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स को ढूंढ रही हैं और उनके लिए अच्छे खासे सैलरी प्रीमियम देने को तैयार हैं। Quess Corp की एक रिपोर्ट बताती है कि AI टैलेंट पूल बढ़ा तो है, लेकिन मांग-आपूर्ति का अंतर अभी भी बना हुआ है। GenAI जैसे स्पेशलाइज्ड एरिया में तो आलम यह है कि हर 10 ओपन जॉब्स के लिए सिर्फ 1 क्वालिफाइड प्रोफेशनल मिल पा रहा है।

इसकी वजह से कंपनियां मौजूदा कर्मचारियों को री-ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) देने पर ज़्यादा ध्यान दे रही हैं। कई ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) ने सफलतापूर्वक अपने स्टाफ को 3 से 4 महीनों के अंदर नए AI-आधारित प्रोजेक्ट्स के लिए तैयार कर लिया है। 2025 में कुल IT जॉब की मांग 1.8 मिलियन तक पहुंच गई, जो 16% ज़्यादा है। लेकिन इस मांग का आधा से ज़्यादा हिस्सा उभरती हुई डिजिटल क्षमताओं के लिए है, जबकि पुरानी टेक्नोलॉजी स्किल्स की डिमांड कुल मांग का 10% से भी कम है।

बाज़ार की चाल और कंपनियों की वैल्यूएशन

TeamLease Services, जिसका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग ₹2,250 करोड़ है और P/E रेश्यो करीब 16-17x है, इसी बदले हुए माहौल में काम कर रही है। वहीं, Quess Corp, जो इससे बड़ी कंपनी है और जिसका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन ₹30,000 करोड़ से ज़्यादा है, उसकी वैल्यूएशन थोड़ी अलग है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार इसका P/E रेश्यो 49-63x के आसपास है, जबकि कुछ इसे 12-13x के करीब बताती हैं। यह अंतर बाज़ार की अलग-अलग राय या कंपनी के अलग-अलग बिज़नेस सेगमेंट्स के परफॉरमेंस को दर्शाता है। ये दोनों कंपनियां भारत के स्टाफिंग और वर्कफोर्स सॉल्यूशंस सेक्टर में प्रमुख खिलाड़ी हैं।

खतरे की घंटी: स्टाफिंग फर्म्स के लिए चुनौती

AI से प्रेरित यह तेज़ बदलाव स्टाफिंग फर्म्स के लिए कुछ जोखिम भी लेकर आया है। एंट्री-लेवल की नौकरियों के कम होने का मतलब है कि पारंपरिक कैंडिडेट्स का पूल सिकुड़ रहा है। ऐसे में फर्म्स को स्पेशलाइज्ड टैलेंट पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिसकी सप्लाई कम है और वे ज़्यादा सैलरी मांगते हैं। इससे कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है, खासकर अगर वे भर्ती की बढ़ी हुई लागत को अपने क्लाइंट्स पर पास ऑन नहीं कर पाते या अपने मौजूदा वर्कफोर्स को बड़े पैमाने पर री-ट्रेन करने में सफल नहीं होते।

इसके अलावा, IT इंडस्ट्री में कर्मचारियों की लागत का रेवेन्यू के प्रतिशत के तौर पर बढ़ना भी एक चिंता का विषय है, जो फाइनेंशियल ईयर 24 में 57% तक पहुंच गया था। AI प्रोडक्टिविटी बढ़ाता है, लेकिन रूटीन कामों को ऑटोमेट करने की वजह से IT सर्विसेज फर्म्स अब कम नेट एम्प्लॉई जोड़ रही हैं। उदाहरण के लिए, टॉप IT कंपनियों ने फाइनेंशियल ईयर 26 के पहले नौ महीनों में सिर्फ 17 नेट एम्प्लॉई जोड़े, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 17,000 से ज़्यादा एम्प्लॉई जोड़े गए थे। स्टाफिंग फर्म्स को इस मुश्किल स्थिति से निपटना है: क्लाइंट्स एफिशिएंसी और स्पेशलाइज्ड स्किल्स मांगते हैं, लेकिन ऐसे टैलेंट की सप्लाई टेक्नोलॉजी में तेज़ बदलाव और टैलेंट गैप की वजह से सीमित है।

भविष्य की राह: री-स्किलिंग ही है सबसे ज़रूरी!

IT एम्प्लॉयमेंट का भविष्य एडैप्टेबिलिटी (अनुकूलन क्षमता) और लगातार सीखने पर टिका है। इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि AI, साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड टैलेंट की मांग अगले कुछ सालों तक बनी रहेगी और शॉर्टेज भी जारी रहेगी। अनुमान है कि AI दुनिया भर की 40% नौकरियों को प्रभावित करेगा, जिसका सबसे ज़्यादा असर युवा वर्कर्स और एंट्री-लेवल पोजिशंस पर पड़ेगा। भारत के IT सेक्टर का GDP में योगदान बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन बढ़ती सैलरी और डीप-टेक स्किल्स के गैप की वजह से मार्जिन पर दबाव एक बड़ी चुनौती बना रहेगा। इस बदलते माहौल से निकलने का सबसे अच्छा तरीका है कि आक्रामक तरीके से अप-स्किलिंग (कौशल बढ़ाना) और री-स्किलिंग (नए कौशल सीखना) पर ज़ोर दिया जाए, ताकि भारत AI क्रांति का पूरा फायदा उठा सके।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.