AI की रॉकेट जैसी रफ़्तार के साथ, डेटा सेंटर्स की बिजली की ज़रूरत आसमान छू रही है। अनुमान है कि 2035 तक यह ज़रूरत लगभग तीन गुना हो जाएगी। लेकिन इस ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा, पावर कन्वर्शन (Power Conversion) के दौरान बर्बाद हो जाता है। यह बर्बादी 15% से 20% तक हो सकती है, जो सीधे तौर पर ऑपरेशनल कॉस्ट (Operational Cost) और गर्मी बढ़ाने वाली चुनौती है।
इसी समस्या को जड़ से उखाड़ने के लिए, भारतीय स्टार्टअप C2i Semiconductors ने $15 मिलियन की सीरीज A फंडिंग (Series A Funding) जुटाई है। यह फंडिंग कंपनी को अपना खास 'ग्रिड-टू-GPU' (Grid-to-GPU) पावर डिलीवरी सिस्टम (Power Delivery System) बनाने में मदद करेगी। C2i का दावा है कि यह इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म (Integrated Platform) पारंपरिक तरीकों की तुलना में बिजली की कुल बर्बादी को लगभग 10% तक कम कर सकता है। सोचिए, हर 1 मेगावाट पर लगभग 100 किलोवाट की बचत! इससे डेटा सेंटर्स के ऑपरेटिंग खर्च, कूलिंग की ज़रूरतें और मुनाफा, सब पर सीधा असर पड़ेगा।
AI डेटा सेंटर पावर इंफ्रास्ट्रक्चर (Power Infrastructure) का बाज़ार 2030 तक $35.87 बिलियन का होने का अनुमान है। इस फील्ड में Schneider Electric, Vertiv, ABB और Eaton जैसी दिग्गज कंपनियां पहले से मौजूद हैं। ये कंपनियां अपने UPS और PDU जैसे प्रोडक्ट्स से बाज़ार पर कब्ज़ा जमाए हुए हैं। C2i का तरीका अलग है; यह पावर कन्वर्शन, कंट्रोल और पैकेजिंग को एक ही सिस्टम में समेटकर सिस्टमिक इनएफिशिएंसी (Systemic Inefficiency) को टारगेट करता है, जो शायद इन बड़ी कंपनियों के लिए तुरंत हल करना मुश्किल हो।
यह इन्वेस्टमेंट भारत के तेजी से बढ़ते सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम (Semiconductor Design Ecosystem) को भी एक बड़ा बूस्ट देता है। भारत सरकार की DLI स्कीम (Design Linked Incentive Scheme) जैसी पहलें स्टार्टअप्स को लगभग 50% तक डिज़ाइन खर्च में मदद करती हैं। दुनिया के लगभग 20% सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर्स भारत में हैं, जो C2i जैसी कंपनियों के लिए ग्लोबल लेवल का टैलेंट पूल (Talent Pool) उपलब्ध कराते हैं। C2i की फाउंडिंग टीम के पास पावर सेमीकंडक्टर फील्ड में सालों का अनुभव है।
लेकिन राह इतनी भी आसान नहीं है। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में प्रोडक्ट्स को अप्रूव (Approve) होने में लंबा समय लगता है और दिग्गजों की मौजूदगी कड़ी चुनौती पेश करती है। C2i को अपने इंटीग्रेटेड डिज़ाइन को सफलतापूर्वक लागू करने और बताए गए एफिशिएंसी गेन्स (Efficiency Gains) हासिल करने होंगे। कंपनी के पहले सिलिकॉन डिज़ाइन (Silicon Design) इसी साल गर्मियों तक आने की उम्मीद है।
अगर C2i अपने पावर डिलीवरी सिस्टम की एफिशिएंसी साबित कर पाता है, तो यह हाइपरस्केलर्स (Hyperscalers) और डेटा सेंटर ऑपरेटर्स (Data Center Operators) के लिए बड़ी लागत बचत का ज़रिया बन सकता है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग को देखते हुए, पावर और कूलिंग सोल्युशंस (Cooling Solutions) का बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है, और C2i इस महत्वपूर्ण सेगमेंट में अपनी जगह बना सकता है।