AI का कंसल्टिंग पर दबदबा: पुरानी फर्मों की कमाई पर बड़ा संकट!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
AI का कंसल्टिंग पर दबदबा: पुरानी फर्मों की कमाई पर बड़ा संकट!
Overview

कंसल्टिंग इंडस्ट्री एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से कंपनियां अब पुराने 'पिरामिड' और 'डायमंड' जैसे टैलेंट स्ट्रक्चर से हटकर नए 'X' मॉडल की ओर बढ़ रही हैं। AI के आने से कई एनालिटिकल काम आसान हो गए हैं, प्रोजेक्ट्स जल्दी पूरे हो रहे हैं और इंसानों के काम का महत्व घट रहा है। ऐसे में, अब घंटे के हिसाब से बिलिंग की बजाय नतीजों (Results) के आधार पर फीस लेने का चलन बढ़ रहा है। पुरानी स्टाइल वाली कंसल्टिंग फर्मों के बिजनेस मॉडल पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

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AI ने बदला कंसल्टिंग का खेल: 'X' मॉडल का उदय

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंसल्टिंग इंडस्ट्री के काम करने के तरीके को पूरी तरह से बदल रहा है। सदियों से यह इंडस्ट्री इंसानी मेहनत और ऊंचे-ऊंचे स्ट्रक्चर पर टिकी थी। हाल ही में ऑटोमेशन के कारण जूनियर कर्मचारियों की जरूरत कम होने पर 'डायमंड' जैसे फ्लैट स्ट्रक्चर की ओर झुकाव बढ़ा था, लेकिन अब यह भी काफी नहीं दिख रहा। बड़ी ग्लोबल फर्म्स कम ग्रैजुएट्स हायर कर रही हैं और सीनियर स्टाफ के कंपनी छोड़ने के मामले बढ़ रहे हैं, जो पूरे टैलेंट सिस्टम पर दबाव दिखा रहा है। यह सिर्फ एक अस्थायी बदलाव नहीं है; यह एक बड़ा स्ट्रक्चरल शिफ्ट है क्योंकि AI अब रिसर्च, एनालिसिस और राइटिंग जैसे काम कर सकता है, जिनके लिए पहले बड़ी टीमों और लंबे प्रोजेक्ट टाइम की जरूरत होती थी।

अब प्रोजेक्ट टीम्स छोटी हो रही हैं, काम तेजी से पूरा हो रहा है, और क्लाइंट्स उस काम के लिए पैसे देने पर सवाल उठा रहे हैं जिसे AI लगभग तुरंत कर सकता है। कंसल्टिंग की कमाई और मुनाफे के मॉडल, जो ऐतिहासिक रूप से इंसानी मेहनत के बिलिंग पर आधारित थे, स्टाफ बढ़ाकर आगे बढ़ते थे और हाई यूटिलाइजेशन रेट से मार्जिन बचाते थे, वे अब टूट रहे हैं। AI की वजह से काम पूरा होने का समय बहुत कम हो गया है, जिससे घंटे के हिसाब से बिलिंग बेमानी हो गई है। अब सारा जोर बेहतर प्रॉब्लम फ्रेमिंग, निर्णय लेने की क्षमता और नतीजों की जिम्मेदारी पर आ गया है। इसका मतलब है कि फर्मों को फिक्स्ड फीस, सब्सक्रिप्शन और नतीजों से जुड़े मॉडल अपनाने होंगे।

इकोनॉमिक असर और इंटीग्रेटेड कंपनियों का फायदा

बड़ी कंसल्टिंग फर्म्स पहले से ही AI सर्विसेस से मोटी कमाई कर रही हैं, जो दिखाता है कि यह बदलाव ग्रोथ का एक बड़ा जरिया है। Accenture ने फाइनेंशियल ईयर 2023 में जेनरेटिव AI कंसल्टिंग से $3.6 बिलियन की कमाई की, वहीं IBM ने $6 बिलियन का AI बिजनेस हासिल किया। BCG का अनुमान है कि 2026 तक AI से जुड़ा काम उसकी कुल कमाई का 40% हो जाएगा।

इस संभावना के बावजूद, इंडस्ट्री में उथल-पुथल मची हुई है। प्रमुख कंपनी Accenture के शेयर एक साल में 39.6% तक गिर गए और मल्टी-ईयर लो पर पहुंच गए। इसकी फॉरवर्ड P/E (Price-to-Earnings ratio) 15.2x है, जो इसके पांच साल के औसत से कम है। Accenture की मौजूदा P/E लगभग 16.17x है और इसका मार्केट कैप $121 बिलियन है। इसकी तुलना में, IBM का P/E 20.70x है (मार्केट कैप $217 बिलियन)। वहीं, कंपीटिटर्स Capgemini (P/E 10.97x) और Cognizant (P/E 12.71x) के P/E रेश्यो कम हैं, जो बताता है कि बाजार उनके ग्रोथ या रिस्क को अलग तरह से देख रहा है।

सिर्फ कंसल्टिंग बेचने वाली फर्मों (Pure-play consultancies) के सामने एक बड़ी चुनौती है। उन्हें एक साथ प्राइसिंग, डिलीवरी, टैलेंट और कल्चर में बड़े बदलाव करने होंगे, जबकि अपने पुराने बिजनेस मॉडल को भी बचाना होगा। इसके विपरीत, ग्लोबल टेक और सर्विसेस कंपनियों के साथ एकीकृत (Integrated) कंसल्टिंग सर्विसेस वाली फर्मों को फायदा मिल रहा है। ये कंबाइंड मॉडल AI को सिर्फ एक आइडिया नहीं, बल्कि एक प्रैक्टिकल टूल मानते हैं और असली प्रोजेक्ट डिलीवरी व नतीजों के करीब रहते हैं, जिससे परफॉरमेंस पर केंद्रित कल्चर को बढ़ावा मिलता है।

पुरानी फर्मों पर दबाव

पारंपरिक कंसल्टिंग पिरामिड में बड़ी संख्या में जूनियर स्टाफ समय लेने वाले एनालिसिस का काम करते थे, लेकिन AI की एफिशिएंसी ने अब इस मॉडल को खतरे में डाल दिया है। क्लाइंट्स खुद AI का इस्तेमाल करके उन सर्विसेस को वापस इन-हाउस ले रहे हैं जिन्हें वे पहले आउटसोर्स करते थे, जिससे पारंपरिक कंसल्टिंग की डिमांड कम हो रही है।

इसके अलावा, इकोनॉमिक्स भी बदल रहे हैं। AI के कारण डिलीवरी का समय बहुत कम हो गया है, जिससे घंटे के हिसाब से बिलिंग बेकार हो गई है और मार्जिन में कटौती हो रही है, जो पहले कई स्टाफ होने से सुरक्षित थे। सबसे बड़ा रिस्क यह है कि फर्म्स अभी भी ऐसे बिजनेस मॉडल का इस्तेमाल कर रही हैं जो AI के आने से पहले के समय के लिए बने थे। क्लाइंट्स अब सिर्फ बिल करने योग्य घंटों के बजाय मापे जा सकने वाले नतीजे (Measurable Results) चाहते हैं, जिससे प्राइसिंग आउटकम्स (Outcome-based pricing) की ओर बढ़ रही है। यह बदलाव उन फर्मों के लिए मुश्किल है जो समय और क्षमता बेचने की आदी हैं।

इनके बिजनेस मॉडल में फंडामेंटल रेजिलिएंस (Resilience) की कमी है, और आर्थिक अनिश्चितता तथा लंबे मंदी के डर ने इन पुराने स्ट्रक्चर्स पर दबाव और बढ़ा दिया है। 'डायमंड' मॉडल, जिसमें वैल्यू कुछ गिने-चुने हाई-पेड एक्सपर्ट्स के बीच सिमट जाती है, अतीत के वितरित स्टाफ की तुलना में फर्म्स को कम रेजिलिएंट बनाती है।

भविष्य: नतीजों पर फोकस

जो कंसल्टिंग फर्म्स खुद को नहीं बदलेंगी, वे अप्रासंगिक (Irrelevant) होने का जोखिम उठा रही हैं। एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। Cognizant के पास 'होल्ड' रेटिंग है, जबकि Accenture के टारगेट प्राइस AI रेवेन्यू में ग्रोथ से संभावित अपसाइड का संकेत देते हैं।

कंसल्टिंग की भविष्य की सफलता 'X' मॉडल में महारत हासिल करने पर निर्भर करती है, जहां मानवीय निर्णय AI के साथ मिलकर स्पष्ट, स्वामित्व वाले और नतीजों के आधार पर मूल्य-निर्धारित (Results-priced) आउटकम्स प्रदान करते हैं। इसके लिए सिर्फ नई तकनीक अपनाने की नहीं, बल्कि टैलेंट, ट्रेनिंग और बिजनेस मॉडल में बड़े रणनीतिक बदलाव की जरूरत है।

फर्मों को प्रयास के बजाय डिलीवर किए गए वैल्यू को दर्शाने वाले प्राइसिंग मॉडल पर स्विच करना होगा। इस ट्रांजिशन से छोटी अवधि में वित्तीय दर्द हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि के जीवित रहने के लिए यह महत्वपूर्ण है। कॉम्पिटिटिव एडवांटेज उन कल्चर्स से आएगा जो निर्णय लेने का समर्थन करते हैं, उन लीडर्स से आएगा जो सिस्टम मैनेज करते हैं, और उन ऑपरेटिंग मॉडल से आएगा जो सीधे इनसाइट्स को क्लाइंट रिजल्ट्स से जोड़ते हैं।

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