AI की दुनिया में एक नई हलचल ने भारतीय IT कंपनियों की नींद उड़ा दी है। Anthropic नाम की कंपनी ने 'Mythos' नाम का अपना नया AI मॉडल पेश किया है, जो कोडिंग और साइबर सुरक्षा जैसे जटिल कामों में पहले के मॉडलों से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। माना जा रहा है कि यह मॉडल IT सर्विस प्रोवाइडर्स के कई अहम कामों को ऑटोमेट कर सकता है, जिससे कंपनियों के रेवेन्यू और बिजनेस मॉडल पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी खबर के चलते 9 अप्रैल 2026 को Nifty IT इंडेक्स में करीब 1% की गिरावट देखी गई, और Infosys, LTI Mindtree, Coforge जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर 2% तक फिसल गए।
'Mythos' मॉडल कोडिंग, ERP और साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में इंसानों से भी तेज काम करने का दावा कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मॉडल साइबर सुरक्षा खामियों को ढूंढने और ठीक करने में वर्तमान टूल्स से कहीं आगे है। हालांकि यह अभी 'Project Glasswing' के तहत सीमित रूप से रोलआउट किया जा रहा है, लेकिन इसका मतलब साफ है कि AI अब सिर्फ आसान काम नहीं, बल्कि जटिल एंटरप्राइज सिस्टम्स में भी दखल देने वाला है। इससे IT कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल को बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि वे केवल सर्विस प्रोवाइडर बनकर रह जाएंगी अगर उन्होंने AI-बेस्ड सॉल्यूशन और स्ट्रेटेजिक इंटीग्रेशन पर फोकस नहीं किया।
जहां एक तरफ IT सेक्टर AI के डर से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर देश की सबसे बड़ी IT फर्म Tata Consultancy Services (TCS) आज अपने चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे जारी करने वाली है। विश्लेषकों को उम्मीद है कि TCS की रेवेन्यू ग्रोथ मामूली रहेगी, लेकिन ऑपरेटिंग प्रॉफिट में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹9.26 ट्रिलियन है, और इसका P/E रेश्यो करीब 18.1 है, जो IT सेक्टर के औसत P/E (22.4) से कम है।
विश्लेषक TCS को लेकर फिलहाल पॉजिटिव नजर आ रहे हैं। ज्यादातर ने 'Buy' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹3,093 रखा है। निवेशकों की नजरें TCS के मैनेजमेंट से AI स्ट्रेटेजी, डील पाइपलाइन (जो $7 बिलियन से $10 बिलियन के बीच रहने का अनुमान है) और BFSI जैसे सेक्टर्स में परफॉर्मेंस पर टिकी होंगी। यह भी देखना अहम होगा कि कंपनी अपने मार्जिन को लेकर क्या संकेत देती है।
TCS के अलावा Infosys, Wipro और HCL Technologies जैसी कंपनियां भी AI के इस नए दौर में विश्लेषकों के रडार पर हैं। Infosys का P/E करीब 18 है, जबकि HCL Technologies का P/E 23.75 के आसपास है। कुल मिलाकर, भारतीय IT सेक्टर का वैल्यूएशन 2025 में करेक्ट हुआ है। AI से पारंपरिक IT सर्विसेज रेवेन्यू में सालाना 2-3% की गिरावट आ सकती है, लेकिन AI सर्विसेज से मार्केट साइज (TAM) $300-400 बिलियन तक बढ़ सकता है।
IT कंपनियों के लिए अब AI को अपनी सर्विसेज में इंटीग्रेट करना और केवल टास्क एग्जीक्यूशन से आगे बढ़कर AI-ड्रिवन डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में स्ट्रेटेजिक पार्टनर बनना ही भविष्य का रास्ता है। जो कंपनियां AI का इस्तेमाल जटिल समस्याओं को सुलझाने, बेहतर साइबर सुरक्षा और सिस्टम इंटीग्रेशन में कर पाएंगी, वही लंबी दौड़ में टिक पाएंगी। फरवरी 2026 में Nifty IT इंडेक्स में 19.5% की बड़ी गिरावट इस बात का सबूत है कि निवेशक ऐसे डिसरप्टिव AI ट्रेंड्स को लेकर कितने संवेदनशील हैं।