AI के बढ़ते दबदबे और इसके संभावित खतरों को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर भारतीय IT सेक्टर पर देखने को मिल रहा है। इसी चिंता की वजह से Nifty IT इंडेक्स में 4.91% की भारी गिरावट आई और यह लगभग 30,001.2 के स्तर पर आ गया। यह गिरावट सिर्फ तिमाही नतीजों का नतीजा नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण पैदा हुए गहरे डर को दिखाती है। ब्रोकरेज फर्मों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है। Jefferies ने बड़ी भारतीय IT कंपनियों के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि AI के आने से मैनेजमेंट सर्विसेज के ऑटोमेशन के कारण कंपनी के रेवेन्यू में कमी आ सकती है और यह सेक्टर और भी साइक्लिकल (Cyclical) हो सकता है। वहीं, CLSA ने AI से जुड़ी मांग के कारण मेमोरी कंपोनेंट्स जैसे हार्डवेयर की कीमतों में बढ़ोतरी पर ध्यान दिलाया है। इसके विपरीत, JPMorgan IT सर्विसेज सेक्टर को लेकर थोड़ी उम्मीद बनाए हुए है, उनका मानना है कि AI अभी भी जटिल एंटरप्राइज इंटीग्रेशन (Enterprise Integration) के लिए "प्लंबर" (Plumbers) की तरह ही जरूरी रहेगा, जिसे AI अकेले पूरी तरह से नहीं कर सकता।
अगर हम भारतीय IT कंपनियों के वैल्यूएशन (Valuation) को देखें तो तस्वीर थोड़ी जटिल है। फरवरी 2026 के अंत तक, Nifty IT इंडेक्स का P/E Ratio 22.4 से 26.90 के बीच ट्रेड कर रहा है। यह वैल्यूएशन ग्लोबल पीयर्स जैसे Accenture की तुलना में काफी ज्यादा है, जिसका P/E Ratio लगभग 17.6 से 18.2 है, जैसा कि Jefferies ने भी नोट किया है। भारत की बड़ी IT कंपनियों जैसे TCS और Infosys का P/E Ratio 19-21 के रेंज में है, जबकि HCLTech और Wipro 20.9 और 26.5 के बीच ट्रेड कर रहे हैं। दूसरी ओर, सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री पहले से ही AI-संचालित बूम का अनुभव कर रही है। 2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी मेमोरी और लॉजिक डिवाइस की मांग के कारण इस इंडस्ट्री का रेवेन्यू $1 ट्रिलियन के पार जाने का अनुमान है। यह उछाल कंपोनेंट की कीमतों को बढ़ा रहा है, खासकर हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) के लिए, जिससे लागत का दबाव बढ़ रहा है। भारतीय IT सर्विसेज सेक्टर के लिए अनुमानित ग्रोथ मामूली रहने की उम्मीद है, जिसमें फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ 4-8% के बीच रहने का अनुमान है, जो बाजार की सावधानी भरी भावना को दर्शाता है। ऐतिहासिक रूप से, 2023 में मेमोरी चिप में आई गिरावट जैसे बड़े टेक्नोलॉजी सेक्टर के उतार-चढ़ाव ने बाजार में बड़ी गिरावटें देखी हैं, जिसमें IT स्टॉक्स में कुछ समय के लिए 32% तक की गिरावट आई थी।
AI में हो रहे लगातार विकास से कुछ बड़े जोखिम भी खड़े हो गए हैं। CitriniResearch की "2028 ग्लोबल इंटेलिजेंस क्राइसिस" (2028 Global Intelligence Crisis) रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि AI एजेंट्स जटिल R&D (Research & Development) के काम भी कर सकते हैं, जिससे अभूतपूर्व लेबर डिस्प्लेसमेंट (Labor Displacement) यानी श्रमिकों की छंटनी हो सकती है। यह एक ऐसी चिंता है जो टेक इंडस्ट्री में पहले हमेशा देखी गई बात के उलट है कि टेक्नोलॉजी हमेशा ज्यादा नौकरियां बनाती है। Jefferies ने विशेष रूप से रेवेन्यू डिफ्लेशन (Revenue Deflation) के जोखिम को बताया है, क्योंकि AI टूल्स मैनेजमेंट सर्विसेज के बड़े हिस्सों को ऑटोमेट कर सकते हैं, जो कुछ फर्मों के कुल रेवेन्यू का 45% तक हो सकता है। इस बदलाव से सेक्टर की साइक्लिकलिटी बढ़ सकती है और ऑपरेटिंग मॉडल में महंगे बदलाव करने पड़ सकते हैं। इसके अलावा, AI हार्डवेयर की बढ़ती मांग मेमोरी इंडस्ट्री में एक बड़ा सुपर-साइकिल (Super-cycle) पैदा कर रही है, जिससे कंपोनेंट की लागत बढ़ रही है। यह Dixon Technologies जैसी हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए एक जोखिम हो सकता है, जो प्राइस इन्फ्लेशन (Price Inflation) और वॉल्यूम प्रेशर (Volume Pressure) के प्रति संवेदनशील हैं। JPMorgan की सर्विसेज डिमांड के पक्ष में दी गई दलील के बावजूद, ऑटोमेशन और हार्डवेयर लागत में बढ़ोतरी का संयुक्त प्रभाव मार्जिन पर दबाव डाल सकता है और स्टॉक में बड़ी गिरावट ला सकता है। Jefferies का अनुमान है कि ऐसे में शेयर 30-65% तक गिर सकते हैं।
विश्लेषकों का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 में भारतीय IT सर्विसेज सेक्टर मध्यम विकास दर दिखाएगा, जिसमें रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान 4-8% के बीच है। जबकि बड़ी IT कंपनियों को मैक्रो इकोनॉमिक हेडविंड्स (Macroeconomic Headwinds) और बदलते टेक्नोलॉजिकल ट्रेंड्स के कारण तिमाही-दर-तिमाही ग्रोथ बनाए रखने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, वहीं कुछ मिड-टियर (Mid-tier) कंपनियां अपनी गति बनाए रखने की उम्मीद कर रही हैं। बाजार का फोकस अब केवल तिमाही नतीजों से हटकर AI के बिजनेस मॉडल और ग्रोथ आउटलुक पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों की ओर बढ़ गया है। AI-संचालित सर्विसेज और क्लाउड एडॉप्शन (Cloud Adoption) की मांग जारी रहने की उम्मीद है, जो भारत में कुल IT खर्च को सहारा देगा। यह खर्च 2026 तक लगभग $176.3 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।