AI का डर, IT शेयरों में भारी बिकवाली! क्या यह बस ओवररिएक्शन है?

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AuthorAditya Rao|Published at:
AI का डर, IT शेयरों में भारी बिकवाली! क्या यह बस ओवररिएक्शन है?
Overview

AI के बढ़ते खतरे को लेकर निवेशकों में दहशत है, जिसके चलते भारतीय IT शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली है। शुरुआती फरवरी में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने **₹10,956 करोड़** निकाले, जिससे Nifty IT इंडेक्स **14%** लुढ़क गया। यह मार्च **2020** के बाद से इंडेक्स का सबसे खराब मासिक प्रदर्शन रहा है।

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AI का दोहरा खेल: डर या अवसर?

AI की वजह से पारंपरिक IT सर्विस बिजनेस मॉडल के बाधित होने की चिंता ने IT शेयरों में तीखी गिरावट ला दी है। Infosys, LTIMindtree और Coforge जैसी दिग्गज कंपनियां भी इसकी चपेट में आ गई हैं। Coforge 16%, LTIMindtree 15.8%, और Infosys 15.5% तक गिर चुके हैं। AI टूल्स के लॉन्च से कुछ विश्लेषकों का मानना है कि क्लाइंट्स AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाएंगे, जिससे भारतीय IT कंपनियों के ग्रोथ टारगेट पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, यह तस्वीर का सिर्फ एक पहलू है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI नए रेवेन्यू स्ट्रीम (revenue streams) का जरिया भी बनेगा, खासकर ग्लोबल कंपनियों के लिए AI को इंटीग्रेट (integrate) करने में भारतीय IT कंपनियां ऐतिहासिक रूप से माहिर रही हैं।

वैल्यूएशन पर सवालिया निशान

इस बिकवाली के बीच, कंपनियों का वैल्यूएशन (valuation) मिश्रित तस्वीर पेश कर रहा है। Infosys का P/E रेश्यो करीब 19-20 है, जो इसके ऐतिहासिक प्रदर्शन और इंडस्ट्री के मुकाबले सस्ता लग रहा है। Infosys के लिए 'Moderate Buy' या 'Hold' की सलाह है और टारगेट प्राइस में 27-34% तक की तेजी का अनुमान है।

LTIMindtree का P/E रेश्यो लगभग 31-32 है, जिस पर 'Buy' या 'Neutral' की राय है और 26-35% अपसाइड का अनुमान है। वहीं, Coforge का TTM P/E 37 से 49 के बीच है, जो थोड़ा महंगा लग रहा है, भले ही एनालिस्ट्स 'Buy' या 'Strong Buy' की सलाह दे रहे हों।

TCS और HCLTech जैसे शेयर, जिनका P/E रेश्यो लगभग 20-26 है, Coforge की तुलना में वैल्यूएशन के मामले में बेहतर स्थिति में दिख रहे हैं। Wipro का P/E 17 के आसपास है। पूरे IT सेक्टर का P/E 23.22 है। बड़े कैप IT स्टॉक्स का मौजूदा P/E 18x FY27E EPS है, जो पिछले बड़े संकटों के दौरान देखे गए स्तरों से ज्यादा है।

खतरे और संभावनाएं

AI का तेजी से विकास कुछ जोखिम भी लेकर आया है। AI इंसानों द्वारा किए जाने वाले IT टास्क को ऑटोमेट (automate) कर सकता है, जिससे पारंपरिक सर्विसेज की मांग कम हो सकती है और मार्जिन पर दबाव आ सकता है। J.P. Morgan की मानें तो क्लाइंट्स का खर्च AI की ओर शिफ्ट हो सकता है।

हालांकि, भारत में AI को अपनाने की रफ्तार तेज है और साल 2031 तक यह मार्केट $32 बिलियन तक पहुंच सकता है। लेकिन फिलहाल इसका इस्तेमाल IT सेक्टर और कुछ खास राज्यों तक ही सीमित है। ऐसे में नए रेवेन्यू के रास्ते खुलने में वक्त लग सकता है।

ऐतिहासिक मजबूती की छाप

Nifty IT इंडेक्स में फरवरी की 14% की गिरावट मार्च 2020 के बाद सबसे बड़ी है, जब कोविड के कारण बाजार 23.2% गिरा था। लेकिन भारतीय IT कंपनियों ने Y2K और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी कई तकनीकी बाधाओं को पार कर अपनी मजबूती और अनुकूलन क्षमता साबित की है।

यह संभव है कि बाजार AI की तत्काल बाधाओं को लेकर थोड़ा ज्यादा प्रतिक्रिया दे रहा हो और इसके नए अवसर पैदा करने की क्षमता को अनदेखा कर रहा हो। वहीं, Nifty50 जैसे व्यापक बाजार फरवरी में 1.2% ऊपर रहा, जो दर्शाता है कि IT सेक्टर की समस्या फिलहाल AI से जुड़ी सेक्टर-स्पेसिफिक (sector-specific) है, न कि सामान्य बाजार की मंदी।

विश्लेषकों की राय

Infosys पर ज्यादातर विश्लेषकों की राय 'Hold' या 'Moderate Buy' है, जो संभावित रिकवरी का संकेत देते हैं। LTIMindtree को कई एनालिस्ट्स 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं, हालांकि Citi जैसी कुछ फर्म्स 'Sell' पर भी कायम हैं। Coforge पर 'Buy' या 'Strong Buy' की आम राय है, लेकिन कुछ एनालिस्ट्स के टारगेट प्राइस में बड़ा अंतर और हालिया एक्शन (जैसे Elara Securities की डाउनग्रेड) ध्यान देने योग्य हैं।

FY26 के लिए Infosys का अनुमानित रेवेन्यू ग्रोथ 0-3% है, जबकि Wipro -3.5% से -1.5% की गिरावट की उम्मीद कर रहा है। HCLTech 2-5% की ग्रोथ का अनुमान लगा रहा है। यह अनुमान बताता है कि निकट भविष्य चुनौतीपूर्ण रह सकता है, लेकिन AI-संचालित सेवाओं की दीर्घकालिक क्षमता भविष्य की ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.