AI का डर IT शेयरों पर हावी, पर बाज़ार में बाकी सेक्टर्स की मजबूती जारी!

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AuthorAditya Rao|Published at:
AI का डर IT शेयरों पर हावी, पर बाज़ार में बाकी सेक्टर्स की मजबूती जारी!
Overview

भारतीय शेयर बाज़ार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज़ तरक्की के कारण IT सेक्टर में घबराहट और बिकवाली देखी जा रही है, वहीं ऑटो, मेटल और हेल्थकेयर जैसे दूसरे सेक्टर्स में अभी भी मजबूती बनी हुई है।

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AI का साया, IT सेक्टर पर गिरी गाज!

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज़ी से बदलती दुनिया भारतीय IT कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। AI के एडवांस्ड फीचर्स और प्लग-इन्स, खासकर जो मैनपावर पर आधारित काम और बिलिंग मॉडल को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकते हैं, ने निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है। इसी डर के चलते Nifty IT Index अपने 20-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) से करीब 12% नीचे लुढ़क गया। इस बिकवाली ने Infosys और TCS जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर भी गिरा दिए और अरबों रुपये का मार्केट कैपिटलाइजेशन खत्म हो गया। फिलहाल, Nifty IT Index का एक साल का फॉरवर्ड P/E रेश्यो लगभग 23.6x पर आ गया है, जो कि थोड़ा कम है पर अभी भी कुछ एनालिस्ट्स के लिए ऊँचा माना जा रहा है, खासकर कंपनी की ग्रोथ को देखते हुए। ग्लोबल IT कंपनी Accenture का P/E रेश्यो लगभग 19.34x है।

IT के नीचे, पर बाज़ार अभी भी खड़ा!

IT सेक्टर की इस भारी गिरावट के बावजूद, बाज़ार के दूसरे हिस्से मज़बूती दिखा रहे हैं। Nifty Consumer Durables index अपने 20-दिन के SMA से 5.4% ऊपर बना हुआ है। Nifty Auto और Metals इंडेक्स के 66.7% स्टॉक्स अपने 50-दिन के SMA से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं, जो बताता है कि बाज़ार में गिरावट उतनी गहरी नहीं है जितनी दिख रही है। ऑटो सेक्टर में थोड़ी मज़बूती बनी हुई है, जबकि मेटल इंडेक्स भी ग्लोबल कमोडिटी की मिली-जुली चाल के बीच एक रेंज में बना हुआ है।

विदेशी निवेशक (FIIs) की सोच: क्या है रणनीति?

विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) फिलहाल बाज़ार को लेकर सतर्क दिख रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने इंडेक्स फ्यूचर्स में अपनी शॉर्ट पोजीशन 4% बढ़ाई और लॉन्ग पोजीशन 10.9% घटाई, जिससे उनका लॉन्ग-शॉर्ट रेश्यो 19.4 पर आ गया। लेकिन, अगर पिछले हफ्ते की पोजीशनिंग देखें तो तस्वीर थोड़ी अलग है। FIIs ने लगातार अपनी लॉन्ग पोजीशन 7.3% बढ़ाई है, जबकि शॉर्ट पोजीशन में सिर्फ 2.7% की बढ़ोतरी हुई है। यह एक रणनीतिक बदलाव का संकेत देता है, न कि पूरी तरह से मंदी का। इतना ही नहीं, फरवरी के पहले पंद्रह दिनों में FPIs ने भारतीय इक्विटीज़ में लगभग ₹19,675 करोड़ का निवेश किया है, जो पिछले आउटफ्लो के विपरीत है और दिखाता है कि उन्हें नए US-India ट्रेड डील और ग्लोबल इकोनॉमी की चिंताओं के कम होने से भरोसा बढ़ा है।

हेल्थकेयर में तेज़ी, PSU बैंक्स में उतार-चढ़ाव

Nifty Healthcare Index में एक अच्छी रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं। यह 14,000 के अहम सपोर्ट लेवल के ऊपर बना हुआ है। वीकली चार्ट्स पर हायर-लो फॉर्मेशन और RSI का 50 से ऊपर बने रहना, साथ ही MACD क्रॉसओवर की संभावना, सेक्टर में ताक़त की ओर इशारा कर रही है। Sun Pharma (एवरेज टारगेट ₹1,963.26) और Apollo Hospitals (एवरेज टारगेट ₹8,742.55) जैसे बड़े हेल्थकेयर स्टॉक्स पर भी एनालिस्ट्स का भरोसा बना हुआ है। वहीं, Nifty PSU Bank Index में प्रॉफिट-टेकिंग (मुनाफ़ावसूली) का दौर चल रहा है। SBI का RSI 75 से ऊपर है, जो कुछ ज़्यादा ही तेज़ी का संकेत देता है, जबकि PNB, Canara Bank (एवरेज टारगेट ₹160.23) और Bank of Baroda (एवरेज टारगेट ₹330.94) का RSI 41-46 की रेंज में है, जो धीरे-धीरे कमजोर होती मोमेंटम दिखा रहा है। डेरिवेटिव पोजीशंस भी PSU बैंक्स में सावधानी का संकेत दे रही हैं।

आगे क्या?

US-India ट्रेड डील से उम्मीदें बढ़ी हैं, और FY27 के लिए इंडिया की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ने की भी उम्मीद है, जिससे FIIs का निवेश जारी रह सकता है। बजट 2026 के टैक्स हॉलिडे और IT सर्विसेज के लिए इंसेंटिव्स लॉन्ग-टर्म के लिए अच्छे हैं, लेकिन AI का इम्पैक्ट फिलहाल एक बड़ा कंसर्न बना हुआ है। हेल्थकेयर सेक्टर पर एनालिस्ट्स का रुख सकारात्मक है। वहीं, IT सेक्टर का फ्यूचर AI की वजह से अनिश्चित है और इसमें अभी वोलेटिलिटी (उतार-चढ़ाव) जारी रह सकती है। भारतीय IT कंपनियों को AI को अपनाकर अपने बिज़नेस मॉडल को बदलना होगा, ताकि वे सिर्फ मैनपावर सप्लाई करने वाली कंपनियों से आगे बढ़कर AI ऑर्केस्ट्रेटर्स बन सकें।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.