IT Stocks में AI का डर, ₹5.7 लाख करोड़ साफ! JPMorgan बोला - ये 'प्लंबर' हैं, रहेंगे कामयाब

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AuthorAditya Rao|Published at:
IT Stocks में AI का डर, ₹5.7 लाख करोड़ साफ! JPMorgan बोला - ये 'प्लंबर' हैं, रहेंगे कामयाब
Overview

Artificial Intelligence (AI) के बढ़ते डर ने भारतीय IT सेक्टर को हिलाकर रख दिया है। इस चिंता के चलते सेक्टर का मार्केट वैल्यू **₹5.7 लाख करोड़** से ज्यादा घट गया है, और Nifty IT इंडेक्स में पिछले 8 ट्रेडिंग सेशन में करीब **19%** की भारी गिरावट आई है।

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AI के खौफ से IT सेक्टर में हाहाकार

AI के आने से नौकरियां जाने के डर ने भारतीय IT सेक्टर में भूचाल ला दिया है। इस वजह से Nifty IT इंडेक्स पिछले 8 ट्रेडिंग दिनों में लगभग 19% टूट चुका है, जिससे निवेशकों की जेब से ₹5.7 लाख करोड़ से ज्यादा की मार्केट वैल्यू साफ हो गई है। बड़ी IT कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट देखी गई है: Infosys 21%, Tata Consultancy Services (TCS) 19%, HCLTech 17%, Wipro 13% और Tech Mahindra भी 13% तक गिर चुके हैं। TCS का मार्केट कैप गिरकर ₹10 लाख करोड़ के नीचे चला गया है, जो कि 2020 के बाद का सबसे निचला स्तर है।

JPMorgan का 'कॉन्ट्रारियन' नज़रिया: 'प्लंबर' की अहमियत

बाजार की इस घबराहट के बीच, JPMorgan के एनालिस्ट्स का मानना है कि यह सेक्टर खत्म नहीं हो रहा है। उनकी रिपोर्ट में बड़ी IT कंपनियों की तुलना "टेक्नोलॉजी की दुनिया के प्लंबर" (Plumbers of the technology world) से की गई है। इसका मतलब है कि ये कंपनियां कॉम्प्लेक्स टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेट करने, लागू करने और सुचारू रूप से चलाने का बेहद जरूरी काम करती हैं। JPMorgan का तर्क है कि AI टूल्स जैसे कोडिंग असिस्टेंट डेवलपमेंट को तेज कर सकते हैं, लेकिन वे एंटरप्राइज-लेवल की जरूरतें और खास सॉल्यूशंस की जगह नहीं ले सकते जो IT सर्विस वेंडर्स देते हैं। इसके बजाय, AI क्रांति से नई पार्टनरशिप और काम के नए तरीके सामने आएंगे।

AI: तबाही नहीं, विकास का नया ज़रिया

JPMorgan की रिसर्च के मुताबिक, AI के विकास से IT सर्विसेज की मांग खत्म नहीं होगी, बल्कि नए काम के रास्ते खुलेंगे। इनमें वो पुराने सिस्टम्स को मॉडर्नाइज करना शामिल है जिन्हें पहले बदलना बहुत महंगा था, AI-ड्रिवन SaaS प्लेटफॉर्म बनाना, ऑपरेशनल फंक्शन्स के लिए AI एजेंट्स को तैनात करना, AI गवर्नेंस और रिलायबिलिटी फ्रेमवर्क को बेहतर बनाना, और AI को फिजिकल सिस्टम्स में इंटीग्रेट करना शामिल है। कंपनी का अनुमान है कि काम के ये नए क्षेत्र, साथ ही लंबे समय से चले आ रहे टेक्निकल डेट (Technical Debt) को निपटाने की जरूरत, IT सर्विसेज फर्मों की विशेषज्ञता की मांग बनाए रखेगी। यह वैसा ही है जैसे पहले ऑफशोर लेबर, एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर और क्लाउड एडॉप्शन ने नई मांग पैदा की थी। मौजूदा फ्री कैश फ्लो (Free Cash Flow) और डिविडेंड यील्ड (Dividend Yield) उन स्तरों पर हैं जो ऐतिहासिक रूप से गंभीर मार्केट तनाव के दौर, जैसे ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस (GFC) और COVID-19 महामारी के समय देखे गए थे। यह गहरी वैल्यू (Deep Value) का संकेत देता है।

वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट और आगे की राह

JPMorgan के अनुमानों के अनुसार, मौजूदा स्टॉक प्राइस बताते हैं कि सेक्टर के लिए भविष्य की ग्रोथ की उम्मीदें बहुत कम हैं। उदाहरण के लिए, TCS, Infosys और HCLTech के शेयर अगले दशक में लगभग 4%, 4% और 5.6% की रेवेन्यू ग्रोथ पर वैल्यू किए जा रहे हैं। ये आंकड़े सेक्टर की ऐतिहासिक लॉन्ग-टर्म ग्रोथ रेंज 7-8% से काफी कम हैं। ब्रोकरेज का कहना है कि मौजूदा स्तरों से 30% से ज्यादा की गिरावट का मतलब होगा कि टर्मिनल ग्रोथ हमेशा के लिए शून्य हो जाएगी, जो कि एक एक्सट्रीम परिदृश्य है। अगर सेक्टर की हालिया सिंगल-डिजिट ग्रोथ भी बनी रहती है, तो नुकसान का जोखिम लगभग 10% तक सीमित है, जो कि हालिया बिकवाली के पैमाने को सही नहीं ठहराता। इस आकलन के आधार पर, JPMorgan लार्ज-कैप वैल्यू स्टॉक्स जैसे Infosys और TCS पर 'ओवरवेट' रेटिंग के साथ निवेश करने की सलाह दे रहा है। वे Persistent Systems और Sagility जैसी ग्रोथ-ओरिएंटेड कंपनियों को भी देख रहे हैं।

चिंताओं का पहलू: AI पर अति-निर्भरता और एक्शन का जोखिम

हालांकि JPMorgan का नज़रिया सकारात्मक है, AI को कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से इंटीग्रेट किया जाएगा, इस पर चिंताएं बनी हुई हैं। कोड जनरेशन के लिए AI एजेंट्स का उपयोग करना आकर्षक है, लेकिन यह अभी भी एंटरप्राइज-ग्रेड स्टैंडर्ड्स को लगातार पूरा करने और इंसानी IT प्रोफेशनल्स की बारीकियों को समझने में बाधाओं का सामना कर रहा है। AI टूल्स से उत्पन्न 'AI स्लोप' (AI Slop) या त्रुटियों को कम करने के लिए काफी मानवीय निगरानी और 'प्लंबिंग' सेवाओं की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, सेक्टर का डिस्क्रीशनरी IT खर्च पर निर्भर रहना एक जोखिम है, जो मैक्रो-इकोनॉमिक बदलावों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। Infosys को कुछ एनालिस्ट 'होल्ड' रेटिंग दे रहे हैं, जबकि अन्य 'बाय' रेटिंग और प्राइस टारगेट बता रहे हैं। Accenture जैसी ग्लोबल कंपनियों ने AI बुकिंग में भारी वृद्धि देखी है, लेकिन यह भी स्वीकार किया है कि AI से रेवेन्यू पर बड़ा असर आने में समय लगेगा और कुछ कर्मचारियों को निकाला भी जा रहा है जो AI के दौर के लिए खुद को रीस्किल नहीं कर पा रहे। Tech Mahindra का P/E रेश्यो लगभग 32-33 है, जो TCS (लगभग 20.76-21.53) और Infosys (लगभग 19.28-25.5) जैसे साथियों की तुलना में काफी ज्यादा है, जो इसके हाई P/E को लगातार ग्रोथ में बदलने के एक्शन जोखिम को दर्शाता है।

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