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AI का जलवा! Indian IT Jobs में बड़ा फेरबदल, TCS-Infosys जैसी कंपनियां बदल रहीं रणनीति

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
AI का जलवा! Indian IT Jobs में बड़ा फेरबदल, TCS-Infosys जैसी कंपनियां बदल रहीं रणनीति
Overview

भारत का टेक्नोलॉजी सेक्टर इस वक्त एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। Artificial Intelligence (AI) की वजह से काम में तेजी आ रही है और नौकरियों का स्वरूप बदल रहा है। TCS और Infosys जैसी दिग्गज IT कंपनियां अब सिर्फ कम लोगों को हायर करने से आगे बढ़कर अपनी वर्कफोर्स में बड़े फेरबदल कर रही हैं।

AI की वजह से IT सेक्टर में बड़ा बदलाव

भारतीय टेक्नोलॉजी सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से काम करने के तरीके और बिजनेस मॉडल में ज़बरदस्त बदलाव आ रहे हैं। यह सिर्फ हायरिंग में कटौती की बात नहीं है, बल्कि AI के बढ़ते इस्तेमाल से वर्कफोर्स की डायनामिक्स पूरी तरह बदल रही है। इस बदलाव का असर बड़ी IT सर्विसेज फर्मों, स्टार्टअप्स और ग्लोबल प्रोवाइडर्स पर दिख रहा है। उम्मीद है कि भारतीय IT सर्विसेज मार्केट 2024 के अंत तक 6.3% की ग्रोथ के साथ 15.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा, जिसकी मुख्य वजह क्लाउड और GenAI हैं। हालांकि, यह ग्रोथ छंटनी के साथ-साथ हो रही है। सेक्टर अब एक नए मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जहां प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए लोगों से ज्यादा टेक्नोलॉजी पर जोर दिया जा रहा है। इसका मतलब है कि कंपनियां अब कम स्टाफ के साथ ज्यादा काम कर सकती हैं।

AI कैसे बदल रहा है कंपनियों की स्ट्रैटेजी और जॉब्स?

Tata Consultancy Services (TCS) और Infosys जैसी कंपनियां सीधे तौर पर छंटनी की घोषणा करने के बजाय, नए हायरिंग को टालकर या कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने के लिए प्रेरित करके (attrition) स्टाफ कम कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, TCS मार्च 2026 तक अपने स्टाफ में 2% की कटौती करने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसका असर करीब 12,000 कर्मचारियों पर पड़ सकता है। Microsoft India भी खर्चों को कम करने के लिए ऑपरेशन्स को सुव्यवस्थित कर रही है और पे स्ट्रक्चर में बदलाव कर रही है, यह भी वर्कफोर्स एडजस्टमेंट का ही एक तरीका है। AI की क्षमता, जो आम इंजीनियरिंग टास्क को ऑटोमेट कर सकती है और एफिशिएंसी बढ़ा सकती है, इस ट्रेंड को हवा दे रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 'सर्विसेज' बेचने से 'सॉफ्टवेयर-लाइक सर्विसेज' बेचने की ओर एक बड़ा बदलाव आया है, जहां काम के घंटों से ज्यादा नतीजों पर ध्यान दिया जाता है। इसका मतलब है कि समान या उससे ज्यादा आउटपुट के लिए कंपनियों को कम लोगों की जरूरत पड़ सकती है।

बदलती नौकरियों के साथ चाहिए नई स्किल्स

इस बदलाव के लिए वर्कफोर्स की स्किल्स में एक बड़े फेरबदल की जरूरत है। डोमेस्टिक IT फर्म्स और ग्लोबल सेंटर्स अपने कर्मचारियों की संख्या और स्किल्स दोनों को एडजस्ट कर रहे हैं। ऑटोमेशन की वजह से रूटीन और दोहराए जाने वाले कामों पर फोकस वाली जॉब्स कम हो रही हैं। हालांकि, स्पेशलाइज्ड फील्ड्स में नए मौके खुल रहे हैं। AI इंजीनियर्स, डेटा इंजीनियर्स और मॉडल गवर्नेंस और प्रॉम्प्ट डिजाइन जैसे क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स की भारी डिमांड है। AI में स्किल्ड होना अब इंडिविजुअल की प्रासंगिकता और प्रोडक्टिविटी के लिए बहुत जरूरी हो गया है। साथ ही, एफिशिएंसी बढ़ने के साथ-साथ डिजाइन, साइकोलॉजी और सिस्टम इंजीनियरिंग जैसी स्किल्स का महत्व भी बढ़ रहा है। IT सर्विसेज इंडस्ट्री GenAI, क्लाउड आर्किटेक्चर और साइबर सिक्योरिटी में अपने मौजूदा स्टाफ को ट्रेनिंग देने में भारी निवेश कर रही है।

फाइनेंशियल हेल्थ: वैल्यूएशन और एनालिस्ट्स का नजरिया

TCS और Infosys जैसे बड़े IT प्लेयर्स का P/E रेशियो (Price-to-Earnings ratio) उनके करंट मार्केट पोजीशन और ग्रोथ की उम्मीदों को दर्शाता है। अप्रैल 2026 तक, TCS का P/E रेशियो लगभग 17.2-17.9 के बीच है। Infosys का P/E रेशियो करीब 18.5-18.9 है। ये वैल्यूएशन बताते हैं कि इन्वेस्टर्स तेज विस्तार की नहीं, बल्कि स्थिर ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। Infosys का P/E 18.95 सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के मीडियन से 10% कम है, जबकि TCS का P/E 17.89 पिछले चार तिमाहियों के उसके औसत से 28.20% कम है। TCS का मार्केट कैप करीब ₹8.86 लाख करोड़ है, और Infosys का वैल्यूएशन अप्रैल 2026 की शुरुआत में लगभग ₹5.22-5.27 लाख करोड़ था, जो TCS को बड़ा दिखाते हुए भी बड़ा मार्केट वैल्यू दर्शाता है। Infosys के लिए एनालिस्ट्स का कलेक्टिव व्यू 'होल्ड' (Hold) है, जिसमें एक एवरेज प्राइस टारगेट अप्रैल 2026 की शुरुआत में ₹1300 के प्राइस से लगभग 30-40% का संभावित अपसाइड दिखाता है। TCS के लिए भी कई एनालिस्ट्स ने 'बाय' (Buy) रेटिंग दी है, जिनके टारगेट प्राइस Rs 2,660 से लेकर Rs 3,162 तक हैं।

आगे के रिस्क और चुनौतियां

AI और एफिशिएंसी को लेकर उत्साह के बावजूद, कुछ बड़े रिस्क बने हुए हैं। AI को तेजी से अपनाने से ट्रेडिशनल, लोगों पर ज्यादा निर्भर IT सर्विसेज कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है, अगर वे जल्दी से खुद को नहीं बदलते हैं। Microsoft का AI के जरिए कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन पर फोकस, भारत में निवेश करते हुए भी, यह दिखाता है कि ग्लोबल कंपनियां कैसे वर्कफोर्स की लागत को एडजस्ट कर रही हैं। 'साइलेंट लेऑफ' (Silent Layoffs) का ट्रेंड कुछ क्षेत्रों में प्रतिभा की अधिकता और वर्तमान स्किल्स और भविष्य की इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच एक मिसमैच की ओर इशारा करता है। हालांकि भारतीय IT सेक्टर से मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन यह ग्रोथ सिर्फ ट्रेडिशनल IT सपोर्ट से AI-ड्रिवन सर्विसेज की ओर शिफ्ट होने पर निर्भर करेगी। जो कंपनियां यह शिफ्ट करने में फेल होंगी, वे पिछड़ने का जोखिम उठा सकती हैं। पिछले लेऑफ साइकिल अनावश्यक भूमिकाओं और ओवरस्टाफिंग पर केंद्रित थे। हालांकि, वर्तमान बदलाव AI द्वारा संचालित मौलिक बदलावों से अधिक जुड़े हुए हैं, जो एक स्थायी प्रभाव का संकेत देते हैं।

आगे क्या: भविष्य के लिए जरूरी स्किल्स

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स उम्मीद कर रहे हैं कि ये ट्रेंड जारी रहेंगे क्योंकि कंपनियां AI-ड्रिवन बिजनेस मॉडल अपना रही हैं और ग्राहकों की नई मांगों को पूरा कर रही हैं। फोकस लगातार ट्रेनिंग और अनुकूलन (adaptability) के जरिए स्थिरता बनाने पर है। Infosys और TCS जैसी कंपनियों के लिए कुछ एनालिस्ट प्राइस टारगेट्स अपसाइड दिखा रहे हैं, लेकिन सेक्टर की लॉन्ग-टर्म सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह अपनी वर्कफोर्स और सर्विसेज को कितनी जल्दी अडॉप्ट कर पाती है। AI नॉलेज और स्पेशलाइज्ड स्किल्स के साथ-साथ जरूरी ह्यूमन स्किल्स विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। कर्मचारियों के लिए, इस बदलते दौर में प्रासंगिक बने रहने के लिए अनुकूलन क्षमता और सीखने की प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है। श्रिंकिंग जॉब एरियाज और AI इंजीनियरिंग जैसे ग्रोइंग एरियाज के बीच का अंतर यह दर्शाता है कि जॉब मार्केट में स्किल्स ही आपकी प्रासंगिकता और करियर पाथ तय करेंगी।

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