AI का खौफ IT सेक्टर पर हावी
भारतीय IT कंपनियों के लिए मुश्किल वक्त आ गया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) ने TCS, Infosys और HCL Technologies जैसी दिग्गज कंपनियों से भारी मात्रा में अपने शेयर बेचे हैं। सिर्फ फरवरी 2026 के पहले छमाही में ही ₹10,956 करोड़ से ज्यादा का आउटफ्लो (outflow) देखा गया है। यह दिखाता है कि निवेशक अब IT सेक्टर के स्ट्रक्चरल (structural) बदलाव को लेकर चिंतित हैं, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के चलते। इस डर के कारण Nifty IT इंडेक्स फरवरी महीने में 15% से ज्यादा गिर चुका है।
AI कैसे कर रहा है IT की कमाई पर वार?
AI की वजह से IT सर्विसेज के ऑटोमेशन (automation) का खतरा बढ़ गया है। AI अब सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, मेंटेनेंस और टेस्टिंग जैसे कामों को भी कर सकता है, जो IT कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा हैं। साल 2026 में ग्लोबल IT खर्च $6.15 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें AI इंफ्रास्ट्रक्चर (infrastructure) पर खर्च 80.8% तक बढ़ सकता है। लेकिन वहीं, भारतीय IT सर्विस कंपनियां दोहरी मार झेल रही हैं। उन्हें AI का इस्तेमाल करके अपने खर्चे कम करने होंगे, जिससे क्लाइंट्स (clients) भी कीमतों में कटौती की मांग करेंगे। साथ ही, उनके पुराने सर्विस मॉडल AI के आने से बेकार हो सकते हैं।
वैल्युएशन्स (Valuations) पर बड़ा सवाल?
TCS में FII की हिस्सेदारी घटकर 10.4% रह गई है, जो पिछले साल 12.7% थी। Infosys में यह 30.68% और HCL Technologies में 16.2% हो गई है। इन कंपनियों के P/E रेश्यो (ratio) भी लगभग 20x से 23.5x के आसपास हैं। वहीं, Coforge और Persistent Systems जैसी मिड-कैप (mid-cap) कंपनियों के P/E रेश्यो 52.2x और 52.1x जैसे बहुत ज्यादा हैं। एनालिस्ट्स (analysts) का मानना है कि जनरेटिव AI अगले 3-4 सालों में पारंपरिक IT कामों का 25-30% हिस्सा ले सकता है। Nifty IT इंडेक्स अपने हाई (high) से लगभग 30% गिर चुका है।
क्यों दिख रही है कंपनियों में गिरावट?
AI के इस दौर में पुरानी IT सर्विस कंपनियों के लिए खतरा बढ़ गया है। जो कंपनियां एप्लीकेशन डेवलपमेंट, टेस्टिंग और मेंटेनेंस पर ज्यादा निर्भर हैं, उनके बिजनेस मॉडल पर अस्तित्व का संकट आ सकता है। AI पहले के ऑटोमेशन की तरह सिर्फ घंटों के हिसाब से काम को महंगा नहीं करेगा, बल्कि यह कोर IT प्रोसेस में इंसानी दखल की जरूरत को ही खत्म कर सकता है। ऐसे में, 20x P/E वाले बड़े स्टॉक्स या उससे ज्यादा P/E वाले मिड-कैप स्टॉक्स, जो AI को अपनाने में पीछे रह गए, ज्यादा कमजोर दिख रहे हैं। Accenture और Cognizant जैसी विदेशी कंपनियां भी इसी दबाव से गुजर रही हैं।
आगे की राह: AI को अपनाना ही होगा
कई ब्रोकरेज फर्म्स (brokerage firms) ने IT कंपनियों के टारगेट प्राइस (target price) 44% तक घटा दिए हैं। JM Financial ने TCS और Wipro जैसी कंपनियों की रेटिंग डाउनग्रेड (downgrade) कर दी है। उनका मानना है कि AI और ग्लोबल स्लोडाउन (slowdown) का असर कंपनियों की ग्रोथ पर पड़ेगा। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स AI को लेकर डर को ओवरब्लोन (overblown) मान रहे हैं और इसे खरीदारी का मौका भी बता रहे हैं। लेकिन, यह साफ है कि IT कंपनियों को AI-नेटिव (AI-native) क्षमताएं विकसित करनी होंगी, अपने कर्मचारियों को री-स्किल (re-skill) करना होगा और AI से जुड़े नए कॉन्ट्रैक्ट्स (contracts) हासिल करने होंगे। आने वाले क्वार्टर्स (quarters) बताएंगे कि IT सेक्टर इस बड़े बदलाव को कितनी अच्छी तरह से संभाल पाता है।
