AI का साया: सॉफ्टवेयर कंपनियों के भविष्य पर सवाल
AI के तेजी से बढ़ते कदम और उसके नए फीचर्स ने सॉफ्टवेयर कंपनियों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। इसी वजह से अमेरिकी बाज़ारों में टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। Infosys के ADRs 5%, Wipro के ADRs 4.5%, और Cognizant के शेयर 4.9% तक गिर गए।
Anthropic का नया 'AI असिस्टेंट' बना डर की वजह
इस डर को हवा मिली है Google की सहायक कंपनी Anthropic से, जिसने अपने Claude Cowork एजेंट के लिए ग्यारह नए प्लग-इन्स लॉन्च किए हैं। यह AI असिस्टेंट कंपनियों के कानूनी, बिक्री, मार्केटिंग और डेटा विश्लेषण जैसे अहम कामों को ऑटोमेट कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह AI सीधे, ज़्यादा असरदार और शायद सस्ते विकल्प देकर मौजूदा सॉफ्टवेयर बिज़नेस मॉडल को पूरी तरह बदल सकता है।
'टर्मिनल मल्टीपल प्रॉब्लम': निवेशकों की नई चिंता
Citi में US इक्विटी स्ट्रैटेजी के डायरेक्टर, Drew Pettit, बताते हैं कि असली चिंता मौजूदा नतीजों को लेकर नहीं है, जो काफी अच्छे थे। दिक्कत भविष्य को लेकर है। जब किसी इंडस्ट्री में कोई नई तकनीक आती है, तो यह भविष्य के लिए एक समस्या बन जाती है। इसे 'टर्मिनल मल्टीपल प्रॉब्लम' कहा जाता है। इसका मतलब है कि निवेशक उन कंपनियों के लंबे समय के मुनाफे और वैल्यूएशन पर सवाल उठा रहे हैं, जिनके मुख्य प्रोडक्ट्स AI की वजह से पुराने या कम प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं।
छोटी IT कंपनियों पर भी असर की आशंका
टेक्नोलॉजी शेयरों वाले Nasdaq 100 इंडेक्स पर भी दबाव बना हुआ है। बड़ी IT कंपनियों पर मंडराता यह डर छोटी कंपनियों पर भी असर डाल सकता है। Persistent Systems, Oracle Financial Services Software, Coforge, L&T Technology Services और Mphasis जैसी कंपनियाँ, जो पहले से ही गिरावट में थीं, अब और बिकवाली का सामना कर सकती हैं। कुल मिलाकर, बाज़ार का सेंटिमेंट इस तकनीकी बदलाव की कहानी से काफी प्रभावित हुआ है।