आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विस्तार से डेटा सेंटरों की भारी मांग बढ़ रही है, जो इस तकनीकी क्रांति की रीढ़ हैं। हालांकि, इन केंद्रों से जुड़ी पर्यावरणीय लागत एक बड़ी चिंता बनती जा रही है। सिनर्जी रिसर्च ग्रुप के एक सर्वेक्षण के अनुसार, दुनिया के लगभग 60% सबसे बड़े डेटा सेंटर संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर स्थित हैं। यह वैश्विक वितरण मेजबान देशों में महत्वपूर्ण पर्यावरणीय दबाव पैदा कर रहा है। उदाहरण के लिए, आयरलैंड में, डेटा सेंटर देश की 20% से अधिक बिजली की खपत करते हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्रीय पावर ग्रिड दबाव में है। चिली अपने जल संसाधनों की कमी का सामना कर रहा है, जिससे सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन हुए हैं जिन्होंने परियोजनाओं को रोक दिया है। ब्राजील, ब्रिटेन, मलेशिया, नीदरलैंड और विशेष रूप से भारत सहित अन्य राष्ट्र भी इन प्रतिष्ठानों द्वारा उत्पन्न चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऊर्जा और जल संसाधनों की कमी को लेकर सार्वजनिक असंतोष बढ़ रहा है। गूगल, अमेज़ॅन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियां अक्सर सहायक कंपनियों (subsidiaries) के माध्यम से ये डेटा सेंटर बनाती हैं, जिसे आलोचकों का कहना है कि यह उनके पर्यावरणीय प्रभाव को छिपाने की एक रणनीति है। जब संसाधन निष्कर्षण के आरोप लगते हैं, तो ये कंपनियां आमतौर पर अपने पर्यावरणीय पदचिह्न (environmental footprint) को बेहतर बनाने के अस्पष्ट वादे करती हैं या सीधे आरोपों से इनकार कर देती हैं। COP 30 जैसे अंतरराष्ट्रीय नियामक निकायों को इस बढ़ती हुई खतरे को संबोधित करने की तत्काल आवश्यकता है, खासकर जब एआई की पर्यावरणीय विषाक्तता कुछ क्षेत्रों और समुदायों को असमान रूप से प्रभावित कर रही है। उदाहरण के लिए, जहां फिनलैंड में गूगल के डेटा सेंटर लगभग 100% कार्बन-मुक्त ऊर्जा पर चलते थे, वहीं एशिया में उनका प्रतिशत काफी कम था। पर्यावरण के लिहाज़ से स्वच्छ एआई समाधानों के लिए जोर देना महत्वपूर्ण है।
प्रभाव (Impact):
यह खबर भारतीय शेयर बाजार को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है क्योंकि यह भारत में डेटा सेंटर संचालित करने वाली टेक कंपनियों के लिए संभावित नियामक चुनौतियों को उजागर करती है। संसाधन खपत पर बढ़ती जांच से परिचालन लागत बढ़ सकती है, जो प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में कंपनियों की लाभप्रदता को प्रभावित कर सकती है। सरकार पर इस क्षेत्र में भविष्य के विकास और निवेश को प्रभावित करने वाले सख्त पर्यावरण दिशानिर्देश लागू करने का दबाव भी हो सकता है। टिकाऊ प्रौद्योगिकी प्रथाओं (sustainable technology practices) की मांग नवाचार को बढ़ावा दे सकती है लेकिन व्यवसायों के लिए अनुपालन बाधाएं भी पैदा कर सकती है। भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रभाव रेटिंग 7/10 है।
कठिन शब्दों के अर्थ (Difficult terms with their meaning):
Data Centres: बड़े प्रतिष्ठान जहां कंप्यूटर सिस्टम और संबंधित घटक रखे जाते हैं, जैसे दूरसंचार और भंडारण प्रणाली, जिनका उपयोग डेटा को संग्रहीत करने, संसाधित करने और प्रसारित करने के लिए किया जाता है।
Grid Strain: एक ऐसी स्थिति जब बिजली आपूर्ति नेटवर्क ओवरलोड हो जाता है, जिससे बिजली कटौती या ब्लैकआउट का खतरा होता है।
Aquifers: भूजल निकालने योग्य, भूमिगत जल-युक्त पारगम्य चट्टान, बजरी या रेत की परतें।
Carbon-free energy: ऊर्जा जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन उत्पन्न किए बिना उत्पन्न होती है, जैसे सौर, पवन या जलविद्युत।
Environmental footprint: मानव गतिविधियों, उद्योगों या उत्पादों का पर्यावरण पर कुल प्रभाव, विशेष रूप से संसाधन खपत और प्रदूषण के संबंध में।
Subsidiaries: मूल कंपनी द्वारा नियंत्रित कंपनियां, जिन्हें अक्सर विशिष्ट व्यावसायिक इकाइयों के संचालन या विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में संचालित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
COP 30: UNFCCC (संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन) के पार्टियों के सम्मेलन का 30वां सत्र, जो एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय जलवायु शिखर सम्मेलन है।