AI का क्रेज़ बढ़ा, पर E-commerce का दम बाकी! Zomato, Swiggy की खास रणनीति

TECH
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
AI का क्रेज़ बढ़ा, पर E-commerce का दम बाकी! Zomato, Swiggy की खास रणनीति
Overview

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के ऐप्स ने गज़ब की रफ्तार पकड़ी है, जहाँ ChatGPT जैसे प्लेटफॉर्म्स हर दिन **10 करोड़** से ज़्यादा यूज़र्स को जोड़ रहे हैं। वहीं, ई-कॉमर्स दिग्गज Zomato और Swiggy जैसी कंपनियां अपनी जटिल सप्लाई चेन और ज़बरदस्त लॉजिस्टिक्स के दम पर AI के सीधे मुकाबले में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।

डिजिटल दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बोलबाला तेज़ी से बढ़ रहा है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है। AI एप्लीकेशन्स हर दिन 10 करोड़ से ज़्यादा एक्टिव यूज़र्स को आकर्षित कर रहे हैं, और लोग इन प्लेटफॉर्म्स पर हर रोज़ औसतन 17 मिनट बिता रहे हैं। यह संख्या देश के सभी ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स ऐप्स के कुल यूज़र्स से भी ज़्यादा है।

AI का यूज़र बेस बनाम हकीकत

AI एप्लीकेशन्स, खासकर ChatGPT, भारत में तेज़ी से फैले हैं। लेकिन, इन प्लेटफॉर्म्स पर यूज़र एंगेजमेंट का यह उछाल सीधे तौर पर बड़े ट्रांज़ैक्शन वैल्यू में नहीं बदल रहा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि AI फिलहाल चीज़ों को खोजने (discovery) और जानकारी जुटाने (information gathering) में ज़्यादा मदद कर रहा है, न कि तुरंत खरीद (purchase conversion) करवाने में। इसके बावजूद, भारतीय ई-कॉमर्स मार्केट का साइज़ तेज़ी से बढ़ रहा है और साल 2026 तक यह करीब $225.9 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2030 तक यह $300 बिलियन का आंकड़ा छू सकता है। यह ग्रोथ इस बात का सबूत है कि लोग अभी भी खरीदारी के लिए स्थापित ऑनलाइन चैनल्स का ही इस्तेमाल कर रहे हैं।

ई-कॉमर्स का 'ऑपरेशनल फोर्ट'

भारत में ई-कॉमर्स या क्विक कॉमर्स बिज़नेस चलाना एक बड़ा और कैपिटल-इंटेंसिव काम है। इसमें मुश्किल सप्लाई चेन मैनेजमेंट, विशाल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और ज़मीनी स्तर पर सही ढंग से डिलीवरी करना शामिल है। ये चीज़ें AI-ओनली प्लेटफॉर्म्स के लिए आसानी से पार करना नामुमकिन है। Zomato और Swiggy जैसी कंपनियां सेलर्स के इकोसिस्टम को मैनेज करने, रोज़मर्रा की ऑपरेशनल चुनौतियों, लास्ट-माइल डिलीवरी और कस्टमर सर्विस जैसी जटिलताओं से निपटती हैं, और वह भी अक्सर सिंगल डिजिट EBITDA मार्जिन पर। उदाहरण के लिए, Zomato के फूड डिलीवरी ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) में FY24 की चौथी तिमाही में 28% की सालाना ग्रोथ देखी गई, जबकि क्विक कॉमर्स GOV में इसी अवधि में 97% की बढ़त दर्ज की गई। बर्नस्टीन (Bernstein) की रिसर्च साफ तौर पर कहती है कि वेयरहाउसिंग, लास्ट-माइल डिलीवरी और सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसी फिजिकल इम्प्लीमेंटेशन क्षमताएं क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी मार्केट में महत्वपूर्ण कॉम्पिटिटिव बैरियर बनाती हैं, जिससे AI-संचालित प्लेटफॉर्म्स के लिए मौजूदा मार्केट लीडर्स को सीधे चुनौती देना मुश्किल हो जाता है।

Zomato का AI इंटीग्रेशन

Zomato, जो स्टॉक मार्केट में Eternal Limited के नाम से लिस्टेड है, AI को सीधे तौर पर मार्केट को डिसरप्ट करने वाली ताकत के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी और कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल कर रही है। कंपनी ने Nugget नाम का एक AI-पावर्ड, नो-कोड कस्टमर सपोर्ट प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जो हर महीने 1.5 करोड़ से ज़्यादा इंटरैक्शन्स को हैंडल करता है। Zomato ने MCP (Model Context Protocol) सर्वर भी लगाया है, जो AI एजेंट्स को ऑर्डर प्लेस करने और पेमेंट जैसे रियल-वर्ल्ड कामों के लिए कनेक्ट होने में मदद करता है। इनवेस्टमेंट के लिहाज़ से, Zomato ने FY26 में ₹21,320 करोड़ का रेवेन्यू और ₹527 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया है। इसकी मार्केट कैप लगभग ₹2.37 लाख करोड़ है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसका P/E रेश्यो 1,000 से ज़्यादा है, फिर भी कई एनालिस्ट्स इस पर पॉजिटिव बने हुए हैं। बर्नस्टीन ने Zomato की 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग बरकरार रखी है और 45% अपसाइड का अनुमान लगाया है। यह भी बताया गया है कि स्टॉक को कवर करने वाले 33 में से 30 एनालिस्ट्स 'बाय' की सलाह दे रहे हैं। Zomato का AI इंटीग्रेशन DevOps में भी हो रहा है, जिससे ऑटोस्केलिंग, इंसिडेंट रिस्पांस और अनोमली डिटेक्शन जैसे काम ऑप्टिमाइज़ हो रहे हैं।

दूसरी बड़ी कंपनियों की AI स्ट्रेटेजी

Amazon जैसी बड़ी ग्लोबल कंपनियां भी भारत के AI और ई-कॉमर्स इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रही हैं। Amazon ने 2030 तक AI-ड्रिवन डिजिटाइजेशन, एक्सपोर्ट ग्रोथ और जॉब क्रिएशन के लिए $35 बिलियन से ज़्यादा निवेश करने की घोषणा की है। वे 40 लाख स्टूडेंट्स को AI लिटरेसी देना चाहते हैं और 1.5 करोड़ छोटे बिज़नेस को AI टूल्स से सशक्त करना चाहते हैं। Amazon India ने शॉपिंग के लिए Rufus जैसे AI असिस्टेंट और विज़ुअल डिस्कवरी के लिए Lens AI जैसे टूल पेश किए हैं। Flipkart, जिसका भारतीय ई-कॉमर्स मार्केट में करीब 47% हिस्सा है, AI के लिए एक हाइब्रिड स्ट्रेटेजी अपना रही है। वे स्पीड के लिए कमर्शियल API का इस्तेमाल करते हैं, जबकि स्ट्रेटेजिक वैल्यू और सिक्योरिटी के लिए अपने खुद के सॉल्यूशंस विकसित कर रहे हैं। Flipkart AI का इस्तेमाल हाइपर-पर्सनलाइजेशन, सर्च ऑप्टिमाइज़ेशन, सेलर्स को सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने के लिए कर रहा है, जिसमें 98% एड्रेस क्लासिफिकेशन एक्यूरेसी के दावों से डिलीवरी टाइम में कमी आई है।

AI सिर्फ डिमांड बढ़ाने का ज़रिया?

AI एप्लीकेशन्स की यूज़र ग्रोथ भले ही साफ दिख रही हो, लेकिन 'बेयर केस' (bear case) का कहना है कि AI ई-कॉमर्स मार्केट को सीधे तौर पर डिसरप्ट करने की बजाय, यह सिर्फ एक अलग डिमांड चैनल (demand channel) के तौर पर काम कर सकता है। क्विक कॉमर्स की ऑपरेशनल इंटेंसिटी और लो-मार्जिन प्रकृति नए, AI-सेंट्रिक प्लेयर्स के लिए बड़ी चुनौती पेश करती है। बर्नस्टीन की रिसर्च के अनुसार, क्विक कॉमर्स की सफलता उसके परफॉरमेंस और कॉम्पिटिशन पर ज़्यादा निर्भर करती है, न कि सिर्फ कंजम्पशन ट्रेंड्स पर। चिंता यह भी है कि AI सर्च और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से ट्रैफिक को डायवर्ट कर सकता है, जिससे एक ऐसी डिमांड लेयर बन सकती है जो मौजूदा प्लेयर्स को फायदा पहुंचाए। हालांकि, Amazon, Flipkart और Jio जैसे स्थापित प्लेयर्स के पास मज़बूत फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर (लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, डिलीवरी सिस्टम्स) है, जो एक ऐसा 'हार्डवेयर फोर्ट' है जिसे नए AI प्लेटफॉर्म्स आसानी से कॉपी नहीं कर सकते। दूसरी तरफ, भारतीय IT सेक्टर AI डिसरप्शन के डर से दबाव में है, निफ्टी IT इंडेक्स में गिरावट देखी गई है, हालांकि कुछ एनालिस्ट्स मौजूदा कम वैल्यूएशन को एक मौके के तौर पर देख रहे हैं।

सेक्टर का आउटलुक और इन्वेस्टर्स का नज़रिया

AI-ड्रिवन मार्केट वोलाटिलिटी के बावजूद, एनालिस्ट्स भारतीय ई-कॉमर्स के भविष्य को लेकर काफी पॉजिटिव हैं। बर्नस्टीन ने Swiggy और Zomato (Eternal) पर पॉजिटिव आउटलुक बनाए रखा है, क्योंकि उनकी मज़बूत लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर उन्हें डिसरप्शन से बचाती है और AI को एफिशिएंसी बढ़ाने और डिमांड जनरेट करने वाला फैक्टर माना जा रहा है। क्विक कॉमर्स सेगमेंट, हालांकि बहुत कॉम्पिटिटिव है, 2030 तक $35 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। बर्नस्टीन 2026 के लिए क्विक कॉमर्स में Zomato (Eternal) को Swiggy की तुलना में बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड वाला विकल्प मानता है। कुल मिलाकर, बड़े ई-कॉमर्स प्लेयर्स के लिए मार्केट का सेंटीमेंट आशावादी बना हुआ है। इन्वेस्टर्स को लॉन्ग-टर्म के लिए अपनी पोजीशन बनाए रखने की सलाह दी जाती है। यह समझना ज़रूरी है कि AI कंज्यूमर इंटरेक्शन के तरीके को बदल रहा है, लेकिन भारत के स्थापित ई-कॉमर्स दिग्गजों की ऑपरेशनल पॉवर उन्हें एक मज़बूत आधार देती है। यह सेक्टर कुछ वोलैटिलिटी के बावजूद अपने स्ट्रक्चरल ग्रोथ ट्रैक पर आगे बढ़ता रहेगा।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.