लॉक-इन एक्सिपायरी का बड़ा झटका
18 फरवरी से 30 मार्च, 2026 के बीच भारतीय शेयर बाज़ार में एक बड़ी उथल-पुथल मचने वाली है। अनुमान है कि इस दौरान 53 अरब डॉलर (लगभग ₹53,000 करोड़) के प्री-लिस्टिंग शेयर होल्डिंग्स ट्रेडिंग के लिए खुल जाएंगे। Nuvama Alternative & Quantitative Research ने इस बारे में विस्तार से बताया है। यह बड़ा सप्लाई इवेंट (Supply Event) कुछ कंपनियों के लिए फ्री फ्लोट (Free Float) बढ़ाएगा, लेकिन कई कंपनियों के लिए यह एक गंभीर लिक्विडिटी की समस्या खड़ी कर देगा।
कई कंपनियां जैसे Regaal Resources, Quality Power Electrical Equipments, Patel Retail, Urban Company, GK Energy, Euro Pratik Sales, Atlanta Electricals, Shringar House of Mangalsutra, Jaro Institute of Technology, और Anand Rathi Share and Stock Brokers ऐसी हैं जिनके लॉक-इन एक्सपायरी (Expiry) के बाद 50% से ज़्यादा इक्विटी ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होगी। इससे शेयर की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) का खतरा बढ़ गया है। निवेशकों को बाज़ार में आने वाले शेयरों की मात्रा और डिमांड (Demand) के बीच के संतुलन का बारीकी से आकलन करना होगा।
कहां 'मैनेजेबल' फ्लोट, कहां 'लिक्विडिटी क्राइसिस'
इन लॉक-इन एक्सिपायरी इवेंट्स पर बाज़ार का रिएक्शन दो तरह का हो सकता है। जिन कंपनियों के कम प्रतिशत शेयर लॉक-इन से बाहर आएंगे, उन पर इसका असर कम दिखेगा। लेकिन जहां ज़्यादातर शेयर ट्रेडिंग के लिए खुलेंगे, वहां कीमत में बड़ी खोज (Price Discovery) का जोखिम बढ़ जाता है।
उदाहरण के लिए, Urban Company, जिसके 66% इक्विटी का लॉक-इन 17 मार्च को खत्म हो रहा है, उसका P/E रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) लगभग 72.4 है और मार्केट कैप (Market Cap) करीब ₹17,356 करोड़ है। इतनी बड़ी मात्रा में शेयर बाज़ार में आने से, खासकर अगर प्री-लिस्टिंग निवेशक बड़ा प्रॉफिट बुक करना चाहें, तो शेयर पर भारी दबाव आ सकता है। इसी तरह, GK Energy, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹2,251 करोड़ है और P/E रेश्यो करीब 17.75 है, उसे भी 24 मार्च को बड़ी लॉक-इन एक्सिपायरी का सामना करना पड़ेगा।
इसके विपरीत, Meesho जैसी कंपनी, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹69,000 करोड़ है, उसका P/E रेश्यो नेगेटिव (Negative) है और लॉक-इन एक्सिपायरी का प्रतिशत कम है। यह बताता है कि अलग-अलग कंपनियों की चुनौतियां भी अलग-अलग होंगी। निवेशकों को लॉक-इन से निकलने वाले शेयरों के प्रतिशत को कंपनी के वैल्यूएशन और मौजूदा लिक्विडिटी के मुकाबले देखना होगा।
'बेयर केस' यानी रिस्क का बड़ा गणित
लॉक-इन पीरियड का खत्म होना IPO के बाद एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन यह कुछ कंपनियों के लिए एक बड़ा रिस्क बन सकता है। पुराने आंकड़े बताते हैं कि लॉक-अप एक्सिपायरी के बाद ट्रेडिंग वॉल्यूम (Volume) बढ़ जाता है और कई बार कीमतों में गिरावट भी आती है, क्योंकि बाज़ार सेलिंग प्रेशर (Selling Pressure) की उम्मीद करता है।
जिन कंपनियों में हाई परसेंटेज (High Percentage) शेयर लॉक-इन से बाहर आएंगे, वहां सप्लाई शॉक (Supply Shock) का खतरा है, जो डिमांड पर भारी पड़ सकता है और कीमतों में तेज़ी से गिरावट ला सकता है। यह रिस्क नई एज की कंपनियों के लिए ज़्यादा है, जो पहले से ही पब्लिक मार्केट में घटते इश्यू साइज़ (Issue Size) और कम वैल्यूएशन के दबाव का सामना कर रही हैं।
अत्यधिक हाई अनलॉक परसेंटेज (High Unlock Percentage) वाली कंपनियों के लिए, शुरुआती निवेशकों का आक्रामक बिकवाली (Aggressive Sell-off) करना यह संकेत दे सकता है कि वे लंबी अवधि के लिए कंपनी में निवेशित नहीं रहना चाहते, जिससे निवेशकों का भरोसा और कमज़ोर हो सकता है। Urban Company जैसी हाई P/E वाली कंपनियों पर इसका ज़्यादा असर होगा। साथ ही, 2026 की शुरुआत में एफआईआई (FII) की सतर्कता भी बड़े सेल-ऑफ को सोखने की बाज़ार की क्षमता को सीमित कर सकती है।