Vikas Khemani: बाजार में खरीदारी का मौका? मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बनेगा ग्रोथ का इंजन!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Vikas Khemani: बाजार में खरीदारी का मौका? मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बनेगा ग्रोथ का इंजन!

Carnelian Capital के फाउंडर, विकास खेमानी का मानना है कि मौजूदा बाजार का मूल्यांकन (Valuation) और मजबूत माइक्रो इकोनॉमिक संकेत, क्वालिटी स्टॉक्स को जमा करने का अच्छा मौका दे रहे हैं। उन्होंने भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को ग्रोथ का एक बड़ा इंजन बताया है, हालांकि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं छोटी अवधि के लिए जोखिम बनी हुई हैं।

बाजार की चाल और भारत की इकोनॉमी

Carnelian Asset Management के फाउंडर, विकास खेमानी ने ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक माहौल और भारत की डोमेस्टिक माइक्रो इकोनॉमिक हकीकत के बीच एक बड़ा अंतर बताया है। उनका मानना है कि ग्लोबल अनिश्चितताओं के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती निवेशकों को मौजूदा बाजार में गिरावट को एक 'अक्यूमुलेशन ऑपर्च्युनिटी' (Accumulation Opportunity) यानी खरीदारी का मौका मानने की वजह देती है। खेमानी के अनुसार, अगले 12 से 18 महीनों में मजबूत फंडामेंटल ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित करने वालों के लिए यह समय काफी फायदेमंद साबित हो सकता है, भले ही बाजार में कुछ अस्थिरता बनी रहे।

2022 की यादें और मजबूत नतीजे

खेमानी ने मौजूदा बाजार की तुलना 2022 से की है, जब भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन की दिक्कतें शुरू में निवेशकों को डराने के बाद बाजार में अच्छी रिकवरी देखी गई थी। उन्होंने कहा कि हालिया तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजे उम्मीदों से कहीं बेहतर रहे हैं। मजबूत क्रेडिट ग्रोथ, बढ़ते इंश्योरेंस प्रीमियम, लगातार टैक्स कलेक्शन और ऑटो सेल्स जैसे इंडिकेटर्स बताते हैं कि ग्लोबल चिंताओं के बावजूद भारत में इकोनॉमिक एक्टिविटी काफी मजबूत बनी हुई है।

"मैन्युफैक्चरिंग 2.0" का गेमचेंजर

खेमानी के आउटलुक का मुख्य आधार "मैन्युफैक्चरिंग 2.0" का कॉन्सेप्ट है। उनका मानना है कि भारत एक बड़े स्ट्रक्चरल बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जिसका लक्ष्य अगले दशक में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का GDP में योगदान 15-16% से बढ़ाकर 20-25% करना है। नए ट्रेड एग्रीमेंट्स और रुपये में आई 14-15% की गिरावट (जो रीजनल संघर्षों के चलते हुई) ने भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को ग्लोबल स्टेज पर और भी कॉम्पिटिटिव बना दिया है। इससे खासकर मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है, जहाँ मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी का एक बड़ा हिस्सा केंद्रित है।

जोखिमों पर भी पैनी नजर

इस उम्मीद भरे नजरिए के बावजूद, खेमानी जोखिमों पर भी संतुलित राय रखते हैं। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि रुपये में गिरावट जहां एक्सपोर्टर्स के लिए फायदेमंद है, वहीं डोमेस्टिक इंडस्ट्रीज के लिए इम्पोर्ट का खर्च बढ़ा सकती है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक अस्थिरता ग्लोबल ट्रेड के लिए खतरा बनी हुई है और छोटी अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव ला सकती है। बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग के लिए लगातार कैपिटल स्पेंडिंग और ऑपरेशनल सफलता जैसे एग्जीक्यूशन रिस्क भी मौजूद हैं।

आगे क्या? (Investor's Watchlist)

एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया (APMI) के चेयरमैन (अगस्त 2026 से) खेमानी का कहना है कि कुछ सेक्टर में ओवरवैल्यूएशन (Overvaluation) के बावजूद, बाजार कंसॉलिडेशन (Consolidation) फेज से बाहर निकल रहा है। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि व्यक्तिगत कंपनियां इन मैक्रो प्रेशर को कैसे झेलती हैं और अपनी अर्निंग ग्रोथ कैसे बनाए रखती हैं। इस दौरान, बड़े मार्केट ट्रेंड्स के बजाय स्ट्रक्चरल थीम्स पर फोकस करना एक अहम फैक्टर रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.