Vijay Kedia: शेयर बाजार में अमीर बनना है? इस निवेशक ने बताई लंबी छलांग लगाने की सीक्रेट स्ट्रैटेजी!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Vijay Kedia: शेयर बाजार में अमीर बनना है? इस निवेशक ने बताई लंबी छलांग लगाने की सीक्रेट स्ट्रैटेजी!

दिग्गज निवेशक विजय केडिया ने शेयर बाजार में लंबी अवधि की दौलत बनाने का राज खोला है। केडिया के मुताबिक, जल्दी-जल्दी ट्रेड करने या भावों पर नजर रखने के बजाय, क्वालिटी बिज़नेस को **10 साल** या उससे ज़्यादा समय तक होल्ड करने में ही असली 'वेल्थ क्रिएशन' है।

सब्र का फल मीठा: केडिया का 'लॉन्ग-टर्म' मंत्र

विजय केडिया का मानना है कि शेयर बाजार में सफल होने के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है 'धैर्य'। उन्होंने कहा कि निवेशक को ऐसे बिज़नेस खोजने चाहिए जिनमें उन्हें 10 साल तक बने रहने का भरोसा हो। छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव पर घबराकर शेयर बेचने की कोशिश करना अक्सर नुकसानदेह साबित होता है, क्योंकि बाजार की वोलेटिलिटी (Volatility) एक हकीकत है।

अंधेरे में टॉर्च की तरह निवेश

केडिया ने निवेश की तुलना एक ऐसे सफर से की, जहाँ मुसाफिर टॉर्च की रोशनी में बस कुछ कदम ही देख पाता है। यानी, निवेशक को पूरे दशक का अनुमान लगाने के बजाय, कंपनी के 'नियर-फ्यूचर' पर ध्यान देना चाहिए। छोटे-छोटे लक्ष्यों पर फोकस करके, निवेशक बाजार के मुश्किल दौर में अपनी भावनाओं पर बेहतर काबू पा सकते हैं। यह सोच, सिर्फ भावों के अनुमान से हटकर, कंपनी की असल क्षमता को समझने पर ज़ोर देती है।

50-60% गिरावट से भी नहीं घबराए

किसी भी निवेशक के लिए यह सबसे मुश्किल होता है जब पोर्टफोलियो का मूल्य अचानक बहुत गिर जाए। केडिया ने बताया कि उनके कई सबसे सफल निवेशों ने भी होल्डिंग पीरियड के दौरान 50% से 60% तक की भारी गिरावट देखी। उनका कहना है कि ये उतार-चढ़ाव प्रक्रिया का हिस्सा हैं और ज़रूरी नहीं कि कंपनी के फंडामेंटलज़ (Fundamentals) कमजोर हो गए हों। जब कोई कंपनी फंडामेंटली मजबूत होती है, तो शेयर की कीमत में तेज गिरावट बेचने का संकेत नहीं, बल्कि निवेशक के सब्र की परीक्षा होती है।

कंपाउंडिंग की ताकत

खुद केडिया का निवेश इतिहास इस बात का गवाह है कि लंबे समय तक बने रहने से क्या फ़ायदा होता है। लगभग 2 दशक की वोलेटिलिटी के बावजूद होल्डिंग बनाए रखने से, उन्हें न केवल शेयर की कीमतों में बढ़ोतरी का लाभ मिला, बल्कि लगातार डिविडेंड (Dividend) भी मिलता रहा। एक खास उदाहरण में, 16 सालों में मिले डिविडेंड, शेयरों की मूल खरीद कीमत से 3 गुना से भी ज़्यादा थे। इतना ही नहीं, बोनस इश्यू (Bonus Issue) जैसे कॉर्पोरेट एक्शन (Corporate Action) ने भी समय के साथ उनके होल्डिंग का मूल्य और बढ़ा दिया। यह दिखाता है कि कंपाउंडिंग (Compounding) के लिए समय और बाजार के शोर से बचकर, धैर्य बनाए रखना ज़रूरी है। निवेशकों के लिए कुंजी यह है कि बिज़नेस के फंडामेंटलज़ पूरी यात्रा के दौरान मजबूत रहें, ताकि समय की ताकत से दौलत बन सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.