Vedanta का मास्टरस्ट्रोक: 5 कंपनियों में बंटने की तैयारी
Vedanta Limited अपने बिखरे हुए कारोबार को 5 नई, स्वतंत्र लिस्टेड कंपनियों में बदलने की एक बड़ी स्ट्रैटिजी पर काम कर रही है। यह 'डीमार्जर' 1 मई, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद Vedanta Aluminium, Vedanta Oil & Gas, Vedanta Power, Vedanta Iron & Steel, और एक बची हुई Vedanta Limited इकाई के रूप में काम करेंगी। इस कदम का मुख्य लक्ष्य 'कंग्लोमेरेट डिस्काउंट' को दूर करना है, ताकि प्रत्येक बिजनेस अपनी खास ग्रोथ स्ट्रेटेजी पर ध्यान केंद्रित कर सके और नए इन्वेस्टमेंट्स को आकर्षित कर सके। इस प्लान के तहत, मौजूदा शेयरधारकों को ओरिजिनल शेयर के बदले नई बनने वाली हर कंपनी का एक-एक शेयर मिलेगा, यानी 1:1 का रेशियो। इस साल 21 अप्रैल, 2026 को Vedanta का शेयर ₹791.70 के 52-हफ्ते के हाई पर पहुंचा था, जो बाजार के ऑप्टिमिज्म को दिखाता है, हालांकि बाद में यह 23 अप्रैल, 2026 तक गिरकर ₹735.60 पर आ गया था। यह स्ट्रैटिजी दुनिया भर में नेचुरल रिसोर्स कंपनियों के 'प्योर-प्ले' मॉडल अपनाने के ट्रेंड से मेल खाती है, जिससे पारदर्शिता और निवेशक अपील बढ़ती है।
डिविडेंड का मौसम: ABB India का बड़ा ऐलान, पर वैल्यूएशन पर चिंता
इसी डिविडेंड (Dividend) सीजन के बीच, ABB India ने अपने शेयरधारकों के लिए ₹29.59 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है, जिसकी एक्स-डिविडेंड डेट 30 अप्रैल, 2026 है। हालांकि, ABB India का शेयर इस समय हाई वैल्यूएशन (Valuation) पर चल रहा है। यह 70x से 96x के TRAILING TWELVE-MONTH (TTM) P/E रेशियो पर ट्रेड कर रहा है, जो भारतीय इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट इंडस्ट्री के औसत 27x के मुकाबले काफी ज्यादा है। कई एनालिस्ट्स (Analysts) ABB India के इस प्रीमियम वैल्यूएशन को लेकर चिंतित हैं और कुछ ने 'Reduce' रेटिंग्स के साथ संभावित गिरावट की ओर इशारा किया है।
वैल्यूएशन की तुलना और मार्केट कॉन्टेक्स्ट
इसके विपरीत, Vedanta का TTM P/E रेशियो काफी कम, लगभग 14.30x से 30x के बीच है, और इसका मार्केट कैप लगभग ₹2.9 लाख करोड़ के आसपास है। अप्रैल 2025 के मार्केट डेटा को देखें तो, जहां भारतीय शेयर बाजार में ओवरऑल मजबूती दिखी, वहीं मेटल्स सेक्टर सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर्स में से एक रहा। यह दिखाता है कि डिविडेंड जैसे शॉर्ट-टर्म फायदे अपनी जगह हैं, लेकिन Vedanta जैसे बड़े डीमार्जर स्ट्रैटिजी का मकसद साइक्लिकल सेक्टर्स की कंपनियों के लिए लंबी अवधि में वैल्यू क्रिएशन करना है।
रिस्क और चुनौतियाँ
Vedanta के डीमार्जर प्लान में एग्जीक्यूशन (Execution) संबंधी चुनौतियाँ, लिस्टिंग में संभावित देरी, और पैसिव इन्वेस्टर्स (Passive Investors) से मिलने वाले फंड में रुकावटें आ सकती हैं। कमोडिटी प्राइस (Commodity Price) के उतार-चढ़ाव भी इसके मुख्य व्यवसायों की कमाई और वैल्यूएशन पर असर डाल सकते हैं। इसके अलावा, सितंबर 2025 में भारतीय सरकार ने वित्तीय पारदर्शिता और सब्सिडियरीज (Subsidiaries) के जोखिमों पर चिंता जताई थी। वहीं, ABB India के लिए सबसे बड़ा कंसर्न उसका ओवर-स्ट्रेच्ड वैल्यूएशन है। इंडस्ट्री नॉर्म्स और अपने ऐतिहासिक स्तरों से काफी ऊपर चल रहा 90x के करीब P/E रेशियो, यह बताता है कि शेयर की मौजूदा कीमत शायद कमाई के मुकाबले ज्यादा है। अगर ग्रोथ उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, तो वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट का खतरा है।
एनालिस्ट्स का नज़रिया
एनालिस्ट्स Vedanta के डीमार्जर को लेकर ज्यादातर पॉजिटिव हैं। उनका मानना है कि यह कदम शेयर में 20% तक का अपसाइड दे सकता है। एनालिस्ट्स के एवरेज टारगेट प्राइस ₹820 से ₹859 के बीच हैं। दूसरी ओर, ABB India के लिए आउटलुक अधिक सतर्क है। एनालिस्ट्स की 'Hold' से 'Reduce' रेटिंग्स और सीमित टारगेट प्राइस, वैल्यूएशन कंसर्न के चलते शेयर में ज्यादा तेजी की संभावना को कम बताते हैं।
आगे क्या?
बाजार अब Vedanta के डीमार्जर की प्रगति पर पैनी नजर रखेगा, साथ ही ABB India की क्षमता पर भी गौर करेगा कि क्या वह अपने प्रीमियम वैल्यूएशन को बनाए रख पाता है।
