Peptomist फाउंडर की चेतावनी: US मार्केट गिरा तो भारतीय शेयर्स भी धड़ाम!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Peptomist फाउंडर की चेतावनी: US मार्केट गिरा तो भारतीय शेयर्स भी धड़ाम!
Overview

Peptomist LLC के फाउंडर Jayesh Chandra Gupta ने भारतीय शेयर बाजार (Indian equities) के लिए एक बड़ी चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि अगर अमेरिकी बाजार (US Market) में बड़ी गिरावट आती है, तो भारतीय शेयर भी इससे अछूते नहीं रहेंगे और करेक्शन (Correction) दिखा सकते हैं। उन्होंने बढ़ती तेल कीमतों, कमजोर होते रुपये और AI में भारत के कम एक्सपोजर को मुख्य जोखिम बताया है।

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अमेरिकी बाजार की रैली पर सवाल?

Jayesh Chandra Gupta को जनवरी से अमेरिकी शेयर बाजार की तेजी पर भरोसा नहीं है। उनका मानना है कि यह ज्यादातर स्पेकुलेटिव कॉल ऑप्शन (speculative call option) की खरीद से प्रेरित है, जो मार्केट मेकर्स (market makers) को अपनी पोजीशन को बैलेंस करने के लिए स्टॉक और फ्यूचर्स खरीदने के लिए मजबूर करता है। यह एक 'गामा स्क्वीज' (gamma squeeze) बनाता है, जो कीमतों को तेजी से ऊपर ले जा सकता है लेकिन अस्थिर भी हो सकता है। Peptomist को mid-May से अमेरिका में मार्केट स्ट्रेस (market stress) बढ़ने की उम्मीद है और वे लंबी अवधि के S&P 500 पुट ऑप्शन (S&P 500 put options) और VIX इंडेक्स (VIX index) से जुड़े ट्रेड्स के जरिए एक संभावित गिरावट के लिए पोजीशन ले रहे हैं।

भारत पर तेल और रुपये का महंगाई का खतरा

हालांकि भारतीय शेयरों में हालिया मजबूती देखी गई है, जिसका मुख्य कारण म्यूचुअल फंड SIPs से लगातार हो रहा इनफ्लो (inflow) है, लेकिन Gupta को ग्लोबल वोलेटिलिटी (volatility) के बीच इस आउटपरफॉर्मेंस (outperformance) के जारी रहने की उम्मीद नहीं है। उन्हें बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों (crude oil prices) और कमजोर होते रुपये (weakening rupee) से नया दबाव दिखने की आशंका है। एक बड़े एनर्जी इम्पोर्टर (energy importer) के तौर पर, भारत इन बदलावों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है। Gupta ने यह भी नोट किया है कि राज्य चुनावों के संपन्न होने के बाद, सरकार के पास उच्च ईंधन लागत को अवशोषित करने के लिए कम गुंजाइश हो सकती है, जिससे अधिक बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है। इससे महंगाई (inflation) बढ़ सकती है और कंज्यूमर स्पेंडिंग (consumer spending) कम हो सकती है।

सेक्टोरल आउटलुक: IT, फार्मा पर सावधानी; इंफ्रा, कंज्यूमर गुड्स को प्राथमिकता

Gupta भारत के इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) और जेनेरिक फार्मास्युटिकल (generic pharmaceutical) सेक्टर को लेकर सतर्क हैं, जो दोनों ही अमेरिकी बाजार पर बहुत अधिक निर्भर हैं। उनका तर्क है कि भारतीय IT फर्मों का ग्लोबल AI इकोसिस्टम (AI ecosystem) में एक्सपोजर सीमित है, और आउटसोर्सिंग कंपनियों पर AI के प्रभाव के बारे में आशावाद शायद बढ़ा-चढ़ा कर बताया गया है। पारंपरिक आउटसोर्सिंग मॉडल पर दबाव है क्योंकि व्यवसाय तेजी से ऑटोमेशन (automation) के लिए AI का उपयोग कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, सस्ते इम्पोर्ट्स के लिए कंप्लायंस रूल्स (compliance rules) सख्त होने पर भारतीय जेनेरिक दवा निर्माताओं को सख्त अमेरिकी नियामक समीक्षाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके विपरीत, Gupta भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर (infrastructure sector) पर सकारात्मक बने हुए हैं, उन्हें उम्मीद है कि जारी सरकारी खर्च और शहरीकरण की प्रवृत्तियां तेजी प्रदान करेंगी। वे सिगरेट और शराब बनाने वाली कंपनियों जैसे व्यवसायों में भी क्षमता देखते हैं, जो उनकी मजबूत प्राइसिंग पावर (pricing ability) और लगातार कंज्यूमर डिमांड (consumer demand) को उजागर करते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.