शांति की आहट से वैश्विक बाज़ारों में तेज़ी
US और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों ने गुरुवार को ग्लोबल मार्केट में जान फूँक दी। भू-राजनीतिक (geopolitical) जोखिमों में कमी और स्थिर कमोडिटी कीमतों की उम्मीदों के चलते एशियाई और अमेरिकी शेयर बाज़ारों ने रिकॉर्ड हाई छुए।
US के बाज़ारों में बुधवार को ज़बरदस्त तेजी रही, जहाँ S&P 500 1.46% चढ़कर 7,365.12 पर और Nasdaq Composite 2.02% बढ़कर 25,838.94 पर बंद हुआ। एशियाई बाज़ारों में भी रौनक दिखी, जापान का Nikkei 225 4% से ज़्यादा उछलकर रिकॉर्ड 62,000 के स्तर पर पहुँच गया।
इस बीच, तेल की कीमतों में पहले तो भारी गिरावट आई, लेकिन बाद में स्थिरता देखने को मिली। Brent क्रूड $102.11 के करीब और WTI फ्यूचर्स $96.23 के आसपास ट्रेड कर रहे थे।
भारत में उलझे निवेशक
जहां दुनिया भर के बाज़ार गुलजार थे, वहीं भारत का रुख थोड़ा अलग रहा। भारत के GIFT Nifty फ्यूचर्स 52 पॉइंट नीचे 24,465 पर थे, जो घरेलू निवेशकों की सतर्कता का संकेत दे रहा था। बुधवार को NSE Nifty 50 और BSE Sensex तो 1.24% और 1.22% की बढ़त के साथ बंद हुए थे।
आंकड़े बताते हैं कि 6 मई, 2026 को फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) यानी विदेशी संस्थागत निवेशकों ने ₹4,882.15 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) यानी घरेलू संस्थागत निवेशकों ने ₹5,934.38 करोड़ की खरीदारी की। इससे यह संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशक मौजूदा तेज़ी को लेकर थोड़े आशंकित हो सकते हैं।
वैल्यूएशन और कमोडिटीज़
6 मई, 2026 को Nifty 50 का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 21.2 था, जो पिछले 10 साल के औसत से थोड़ा ही कम है। BSE Sensex का PE रेश्यो 21.520 था। ये वैल्यूएशन बताते हैं कि बाज़ार अभी ज़्यादा महंगा नहीं है और इसमें ग्रोथ की संभावनाएँ हैं।
कमोडिटीज़ में सोने (Gold) की कीमतों में 1.59% का इजाफा हुआ और यह ₹1,52,450 प्रति 10 ग्राम (24-कैरेट) पर पहुँच गया। चांदी (Silver) भी 3.84% चढ़कर ₹2.53 लाख प्रति किलोग्राम हो गई। जानकारों का अनुमान है कि सोना $6,000-$6,300 और चांदी $85-$100 तक जा सकती है।
सेक्टर्स का प्रदर्शन
सेक्टर्स की बात करें तो ट्रांसपोर्ट स्टॉक्स में 6.34% की बढ़त दिखी, जिसका मुख्य कारण सस्ता तेल हो सकता है। वहीं, इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट सेक्टर 1.56% गिर गया।
आगे क्या?
हालांकि, US-ईरान शांति समझौते से तात्कालिक जोखिम कम हुए हैं, लेकिन इसके क्रियान्वयन में बड़ी चुनौतियाँ आ सकती हैं। तेल की कीमतों में अचानक आई गिरावट और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भारत में थोड़ी चिंता पैदा करती है। निवेशकों की नज़रें अब US के आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की नीतियों पर रहेंगी।
