Sugar Stocks: नई एथेनॉल पॉलिसी से बदला गेम, अब अनाज पर टिका चीनी मिलों का फोकस

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AuthorAditya Rao|Published at:
Sugar Stocks: नई एथेनॉल पॉलिसी से बदला गेम, अब अनाज पर टिका चीनी मिलों का फोकस

भारत का शुगर सेक्टर 2026-27 के एथेनॉल सप्लाई ईयर में नई सरकारी पाबंदियों के साथ कदम रख रहा है। सरकार ने ईंधन के लिए गन्ने के इस्तेमाल पर सख्ती बढ़ा दी है, जिससे अब मिलों को भारी मात्रा में अनाज-आधारित प्रोडक्शन पर शिफ्ट होना पड़ रहा है।

भारत का शुगर सेक्टर 2026-27 के एथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) में एक नए रेगुलेटरी दौर से गुजर रहा है। देश में चीनी की उपलब्धता को प्राथमिकता देते हुए, सरकार ने एथेनॉल प्रोडक्शन के लिए गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी मोलासेस के इस्तेमाल पर बैन लगाने की तैयारी कर ली है। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि इस सीजन में ओपनिंग शुगर स्टॉक घटकर 37.5 लाख टन रह गया है, जो पिछले साल 50 लाख टन था।

फीडस्टॉक में बदलाव का असर

इन्वेस्टर्स के लिए सबसे बड़ा बदलाव 'ग्रेन-बेस्ड फीडस्टॉक' की ओर बढ़ता रुझान है। अब भारत का लगभग 75% एथेनॉल प्रोडक्शन गन्ने के बजाय अनाज, मुख्य रूप से मक्का (Maize) पर निर्भर है। यह केवल एक रणनीतिक फैसला नहीं, बल्कि सरकारी पाबंदियों से निपटने की मजबूरी भी है। जो कंपनियां अनाज और गन्ना, दोनों के लिए अपनी डिस्टिलेशन क्षमता को डाइवर्सिफाई करने में सफल रही हैं, वे इस बदलाव के बीच बेहतर स्थिति में बनी हुई हैं।

रेगुलेटरी दबाव और इन्वेंट्री के नियम

प्रोडक्शन के साथ-साथ सरकार महंगाई को काबू में रखने के लिए स्टॉक पर भी कड़ी नजर रख रही है। 15 अक्टूबर 2026 से नए स्टॉक-होल्डिंग नियम लागू हो रहे हैं, जिसके तहत डीलर्स के लिए स्टॉक की लिमिट 1,000 क्विंटल तय की गई है और 15 दिन में टर्नओवर पूरा करना अनिवार्य है। इसके अलावा, महाराष्ट्र और कर्नाटक में मौसम की अस्थिरता के कारण प्रोडक्शन रिस्क भी बना हुआ है, जिससे चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना है।

निवेशकों के लिए जरूरी Monitorables

मौजूदा अनिश्चितता के दौर में अब बाजार का ध्यान सिर्फ ग्रोथ पर नहीं, बल्कि बैलेंस शीट की मजबूती पर है। Dhampur Sugar Mills, Triveni Engineering and Industries और Shree Renuka Sugars जैसी इंटीग्रेटेड कंपनियां अब रडार पर हैं। Dhampur Sugar Mills ने हाल ही में अपने कमर्शियल पेपर्स का भुगतान कर कैपिटल मैनेजमेंट के प्रति अपनी गंभीरता दिखाई है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि जब सबसे अधिक मुनाफे वाले फीडस्टॉक (गन्ने का रस और बी-हेवी मोलासेस) पर पाबंदी होगी, तो ये कंपनियां अपने मार्जिन को कैसे मैनेज करती हैं। कंपनियों की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वे मक्के की सोर्सिंग और प्रोसेसिंग को कितनी कुशलता से करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.