बाजार में चल रही उथल-पुथल के बीच, Shriram Life Insurance के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) अजीत बनर्जी ने फार्मा (Pharma), बैंकिंग (Banking) और इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) जैसे चुनिंदा सेक्टर्स पर दांव लगाया है। बनर्जी का मानना है कि मौजूदा वोलेटाइल (Volatile) माहौल निवेशकों को अच्छे दामों पर बेहतरीन एसेट्स (Assets) खरीदने का मौका दे रहा है। इसी सोच के साथ, कंपनी ने हालिया बाजार गिरावट के दौरान इन सेक्टर्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, जो कि मजबूत इकोनॉमिक फंडामेंटल्स (Economic Fundamentals) पर टिकी हुई है।
वैश्विक अनिश्चितताओं का असर
हालांकि, इस रणनीति के सामने कई चुनौतियां भी हैं। दुनिया भर में बढ़ता जिओ-पॉलिटिकल तनाव (Geopolitical Tension), कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कमजोर पड़ता रुपया (Indian Rupee) और कुछ सेक्टर्स की अपनी दिक्कतें इस राह में रोड़ा बन सकती हैं। खासकर, मिडिल ईस्ट (Middle East) में चल रहे तनाव ने ग्लोबल मार्केट को हिला रखा है। भारत के लिए यह ट्रिपल थ्रेट (Triple Threat) लेकर आया है – कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, सप्लाई चेन (Supply Chain) में बाधाएं और कमजोर रुपया। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) हाल ही में 20% बढ़कर $110 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। इससे एनर्जी-डिपेंडेंट सेक्टर्स पर बोझ बढ़ा है और इम्पोर्ट (Import) की लागत भी बढ़ी है। भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले करीब 92.34 पर आ गया है, जिससे महंगाई (Inflation) की चिंताएं बढ़ी हैं और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आया है।
चुनिंदा सेक्टर्स का हाल
फार्मा सेक्टर (Pharmaceuticals): भारतीय दवा उद्योग के लिए FY2026 में 7-12% की ग्रोथ का अनुमान है। इसकी वजह मज़बूत डोमेस्टिक डिमांड (Domestic Demand) और यूरोप (Europe) को होने वाला स्थिर एक्सपोर्ट (Export) है। हालांकि, अमेरिका (US) के बाजार में कीमतों में गिरावट, रेगुलेटरी रिव्यू (Regulatory Review) और संभावित टैरिफ (Tariff) जैसी दिक्कतें ग्रोथ को धीमा कर सकती हैं, जहाँ ग्रोथ 3-5% रहने की उम्मीद है। कंपनियाँ अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए रॉ मटेरियल (Raw Material) यानि APIs का उत्पादन खुद बढ़ाने पर फोकस कर रही हैं। इस सेक्टर का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 32.9x है, जो पिछले तीन साल के औसत से नीचे है, यह दर्शाता है कि कुछ स्टॉक करेक्शन (Correction) हुआ है। अमेरिका की दिक्कतों के बावजूद, भरोसेमंद मांग और मजबूत कंपनी फाइनेंस की वजह से आउटलुक स्थिर है।
बैंकिंग सेक्टर (Banking): भारत की बैंकिंग व्यवस्था 2026 की शुरुआत में मजबूत स्थिति में है। एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में सुधार हुआ है, कैपिटल लेवल (Capital Levels) सॉलिड हैं और प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) अच्छी है। खराब लोन (Bad Loan) के रेश्यो में काफी गिरावट आई है। FY2026-27 के लिए अनुमानित रिटर्न ऑन एसेट्स (Return on Assets) 1.2-1.3% रहने की उम्मीद है। लोन ग्रोथ (Loan Growth) डिपॉजिट (Deposit) के मुकाबले बढ़ेगी, जो लो-टू-मिड टीन्स (low-to-mid teens) में रहने का अनुमान है। हालांकि, डिपॉजिट के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण ओवरऑल प्रॉफिटेबिलिटी थोड़ी कम हो सकती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर (Infrastructure): FY26 की तीसरी तिमाही में 4% की गिरावट के बाद इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का आउटलुक सतर्क है। ऑर्डर बुक (Order Book) का सिकुड़ना, पेमेंट में देरी और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन (Project Execution) का धीमा होना जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। सरकारी खर्च और इंफ्रा को इकोनॉमिक ड्राइवर (Economic Driver) के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन सेक्टर को नियर-टर्म ग्रोथ (Near-term Growth) और प्रॉफिट पर दबाव झेलना पड़ रहा है। ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर (Transport Infrastructure) मजबूत विस्तार के लिए तैयार है, लेकिन व्यापक एग्जीक्यूशन और ऑपरेशनल दिक्कतें कई इंजीनियरिंग फर्मों पर भारी पड़ रही हैं।
वैल्यूएशन्स और जोखिम
हालिया बाजार गिरावट के बावजूद, भारतीय इक्विटी वैल्यूएशन्स (Valuations) चिंता का विषय बने हुए हैं। निफ्टी 50 (Nifty 50) का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो करीब 20-22x है, जो इमर्जिंग मार्केट (Emerging Market) के औसत से ज्यादा है। जिओ-पॉलिटिकल अस्थिरता और बढ़ती कमोडिटी कीमतों (Commodity Prices) के प्रभावों को देखते हुए, यह थोड़ा हाई लग सकता है। इन सभी जोखिमों के बावजूद, बनर्जी का फार्मा, बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देने की उम्मीद पर आधारित है, बशर्ते कि वैश्विक अनिश्चितताएं जल्द कम हो जाएं।