दिग्गज निवेशक Shankar Sharma ने भारतीय बाजारों के वैल्यूएशन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने रिटेल निवेशकों को SIP पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहने के प्रति आगाह करते हुए AI-आधारित स्मॉल-कैप शेयरों में मौके तलाशने की सलाह दी है।
दिग्गज निवेशक Shankar Sharma ने मौजूदा भारतीय बाजार को लेकर सतर्क रुख अपनाते हुए इसे ओवरवैल्यूड और स्थिर करार दिया है। अगस्त 2026 के अंत तक, जब प्रमुख इंडेक्स दिशाहीन नजर आ रहे हैं, शर्मा का मानना है कि पारंपरिक लार्ज-कैप शेयरों में अब ग्रोथ के सीमित संकेत बचे हैं, जिसके चलते निवेशकों को अपनी रणनीति बदलने की जरूरत है।
SIP कल्चर पर तीखी टिप्पणी
शर्मा ने SIP की बढ़ती लोकप्रियता पर चिंता जाहिर की है। उनका तर्क है कि SIP की आक्रामक मार्केटिंग ने रिटेल निवेशकों के बीच एक गलत धारणा बना दी है, जो 12% से 14% के स्थिर लॉन्ग-टर्म रिटर्न का वादा तो करती है, लेकिन इसमें इक्विटी बाजार की निहित अस्थिरता (Volatility) और जोखिमों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह कल्चर निवेशकों को बाजार के चक्रीय स्वभाव (Cyclical Nature) को पूरी तरह समझे बिना जरूरत से ज्यादा एक्सपोजर लेने के लिए प्रेरित कर रहा है।
HDFC Bank और लीडरशिप रिस्क
बैंकिंग सेक्टर में, शर्मा ने HDFC Bank के प्रति सतर्क रुख अपनाया है, जिसका मुख्य कारण नेतृत्व में बदलाव है। अक्टूबर 2026 में MD और CEO Sashidhar Jagdishan के रिटायरमेंट के साथ ही बैंक एक नाजुक दौर से गुजर रहा है। शर्मा का कहना है कि संस्थापक-केंद्रित या अत्यधिक व्यक्तिगत प्रबंधन मॉडल वाले संस्थानों को लीडर बदलने पर ज्यादा दबाव का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, नेतृत्व में इस बदलाव के दौरान बैंक के पुराने ग्रोथ मेट्रिक्स को बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा।
AI इंफ्रास्ट्रक्चर में असली मौका
ब्रॉड मार्केट के बजाय, शर्मा का ध्यान अब उस सेक्टर पर है जिसे वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बूम की 'फिजिकल प्लंबिंग' कहते हैं। उनका मानना है कि बड़ी टेक कंपनियों के वैल्यूएशन में भारी उछाल के बाद, असली अवसर उन छोटी कंपनियों में है जो AI के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा मुहैया करा रही हैं। इसमें पावर इक्विपमेंट, ऑप्टिकल फाइबर केबल और कनेक्टर्स बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं। इन निश फर्मों पर दांव लगाकर निवेशक Nifty इंडेक्स की सुस्ती से अलग 'अल्फा' जेनरेट कर सकते हैं।
