दिग्गज बाजार विशेषज्ञ Shankar Sharma ने चेतावनी दी है कि भारतीय इक्विटी मार्केट में SIP के जरिए आने वाले रिटेल निवेश पर बहुत ज्यादा निर्भरता मैक्रो-इकोनॉमिक असंतुलन पैदा कर सकती है।
क्या वाकई भारतीय बाजारों में रिस्क बढ़ रहा है?
GQuant Investech के फाउंडर Shankar Sharma ने भारतीय इक्विटी मार्केट में बढ़ते डोमेस्टिक SIP इनफ्लो पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि बाजार का सिस्टम अब पूरी तरह से घरेलू पैसों पर निर्भर हो गया है, जबकि विदेशी निवेश (Foreign Capital) में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। हाल के महीनों में म्यूचुअल फंड्स में SIP के जरिए निवेश रिकॉर्ड ऊंचाई पर है, जिसे बाजार की मजबूती माना जा रहा है, लेकिन शर्मा इसे एक खतरे की घंटी मानते हैं।
क्यों चिंता में हैं एक्सपर्ट?
शर्मा के अनुसार, देश की इकोनॉमिक हेल्थ को सिर्फ इक्विटी ग्रोथ के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। ऑयल प्राइसेज, गिरता हुआ रुपया और महंगाई जैसे बाहरी कारक भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। उनका मानना है कि नीति निर्माताओं को सिर्फ रिटेल निवेश के भरोसे रहने के बजाय विदेशी पूंजी को आकर्षित करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
रिटर्न को लेकर सच क्या है?
शर्मा ने उस धारणा को भी चुनौती दी है कि भारतीय इक्विटी हमेशा डबल डिजिट में रिटर्न देगी। उनका दावा है कि टैक्स और मार्केट रिस्क को घटाकर देखें, तो औसत निवेशक के लिए वास्तविक रिटर्न 7-8% के आसपास ही ठहरता है। यदि वैल्यूएशन और फंडामेंटल अर्निंग्स में बड़ा अंतर बना रहा, तो भविष्य में निवेशकों को निराशा हाथ लग सकती है।
क्या है पोर्टफोलियो के लिए सलाह?
बाजार की इस अनिश्चितता को देखते हुए, Shankar Sharma ने निवेशकों को 'डिफेंसिव' रहने की सलाह दी है। उन्होंने सुझाव दिया है कि निवेश को केवल इक्विटी तक सीमित न रखकर इसे फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट्स, गोल्ड और रियल एस्टेट जैसे विकल्पों में डायवर्सिफाई करना जरूरी है। इससे बढ़ती महंगाई और मार्केट की अस्थिरता के दौर में पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखा जा सकता है।
