तेल की कीमतों में नरमी से बाजार को मिला सहारा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent क्रूड ऑयल के दाम 1.2% गिरकर $94.4 प्रति बैरल पर आ गए। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत से सकारात्मक परिणाम की उम्मीदें बढ़ने के चलते यह गिरावट आई है। तेल की कीमतें कम होने से महंगाई का डर कम होता है और अर्थव्यवस्था पर दबाव घटता है, जो सीधे तौर पर शेयर बाजारों के लिए एक बड़ा बूस्ट होता है।
ब्रॉड बाइंग (Broad Buying) ने सभी सेक्टर्स को खींचा
यह तेजी सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि लगभग सभी सेक्टर्स में खरीदारी देखने को मिली। Nifty रियल्टी इंडेक्स में सबसे ज़्यादा 2% से ज़्यादा की बढ़त दर्ज की गई। बैंकिंग, मीडिया, ऑटो, FMCG और IT जैसे प्रमुख सेक्टर्स में भी शानदार मजबूती दिखी। वहीं, भारत का वोलैटिलिटी इंडेक्स (India VIX) या 'फियर गेज' 5% से ज़्यादा गिर गया, जो आने वाले दिनों में बाजार में कम उथल-पुथल का संकेत दे रहा है।
ऑप्शन्स एक्सपायरी (Options Expiry) ने बढ़ाई शॉर्ट-कवरिंग
Nifty50 की साप्ताहिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के नजदीक आने के कारण भी बाजार में शॉर्ट-कवरिंग (Short Covering) की अच्छी-खासी गतिविधि देखने को मिली। विश्लेषकों के अनुसार, Nifty के लिए इमीडिएट रेजिस्टेंस 24,500 के स्तर पर है, जबकि नीचे की ओर सपोर्ट 24,000 पर बना हुआ है। इस हफ्ते के लिए अनुमानित ट्रेडिंग रेंज 23,600 से 24,900 के बीच रह सकती है।
ग्लोबल मार्केट का मिला-जुला रुख
दुनिया भर के शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख देखा गया। दक्षिण कोरिया का Kospi एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जापान का Nikkei भी बढ़त में रहा, जबकि यूरोपीय इंडेक्स हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। यह ग्लोबल माहौल भारतीय निवेशकों के सेंटिमेंट के लिए एक सहायक, हालांकि मिश्रित, पृष्ठभूमि प्रदान कर रहा था।
प्रमुख स्तर और जोखिम (Key Levels and Risks)
Nifty को अपनी तेजी बनाए रखने के लिए 23,850 के स्तर से ऊपर बने रहना होगा, ताकि 24,700-24,800 के टारगेट तक पहुंचा जा सके। वहीं, Sensex को नए अपट्रेंड के लिए 79,000 का स्तर पार करना होगा, जिसके बाद यह 79,300-79,500 के लक्ष्य तक जा सकता है। हालांकि, कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। इनमें अमेरिका-ईरान के बीच किसी भी संभावित सीजफायर को लेकर अनिश्चितता, भारतीय रुपये का कमजोर होना और अप्रैल महीने में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) द्वारा ₹40,000 करोड़ से ज़्यादा की बिकवाली जैसे जोखिम शामिल हैं।
