भारतीय शेयर बाज़ार में सोमवार को ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई। BSE Sensex **521** अंक की बढ़त के साथ **78,285** पर बंद हुआ, जो अप्रैल के बाद का उच्चतम स्तर है। NSE Nifty भी **159** अंक चढ़कर **24,430** पर पहुंच गया।
बाज़ार में लौटी रौनक, बैंकिंग और ऑयल शेयरों का कमाल!
भारतीय शेयर बाज़ारों ने सोमवार को लगातार चौथी बार जीत का सिलसिला जारी रखा। BSE Sensex 521.16 अंक यानी 0.67% की छलांग लगाकर 78,285.07 पर बंद हुआ। वहीं, NSE Nifty भी 159.50 अंक की बढ़त के साथ 24,430.35 के स्तर पर पहुंच गया। यह मजबूती अप्रैल 2026 के बाद की सबसे अच्छी क्लोजिंग है, जिसने निवेशकों को राहत दी है।
इन सेक्टर्स ने खींचा ध्यान!
इस तेज़ी के पीछे प्राइवेट बैंकिंग और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों का बड़ा हाथ रहा। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने इन सेक्टर्स को और मजबूती दी। कम तेल की कीमतें जहां एक ओर कंपनियों के मुनाफे को बढ़ाती हैं, वहीं दूसरी ओर इकोनॉमी में महंगाई के दबाव को भी कम करती हैं।
हालांकि, बाज़ार में सभी सेक्टर्स में एक जैसी चाल नहीं दिखी। ऑटो, कैपिटल गुड्स, रियलटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर्स ने अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन, IT, PSU बैंक और यूटिलिटी सेक्टर्स में बिकवाली हावी रही और वे गिरावट के साथ बंद हुए। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल घरेलू खपत और एनर्जी की कीमतों से जुड़े स्टॉक्स पर दांव लगा रहे हैं।
टेक्निकल चार्ट पर क्या दिख रहा है?
टेक्निकल जानकारों का मानना है कि बाज़ार में बुलिश मोमेंटम (Bullish Momentum) मजबूत हो रहा है। Sensex फिलहाल अपने 100-दिन और 50-दिन के मूविंग एवरेज (Moving Average) से ऊपर ट्रेड कर रहा है, जो कि एक अच्छा संकेत है। डेली रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 63 से 66 के बीच है, जो बताता है कि बाज़ार में खरीदारी का ज़ोर तो है, लेकिन अभी यह ओवरबॉट (Overbought) ज़ोन में नहीं पहुंचा है, यानी बड़ी गिरावट का खतरा फिलहाल कम है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
अब बाज़ार की नज़रें इमीडिएट सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स (Support and Resistance Levels) पर टिकी हैं। एनालिस्ट्स Sensex के लिए 77,600 से 77,800 के स्तर को महत्वपूर्ण मान रहे हैं। अगर Sensex इस रेंज से ऊपर बना रहता है, तो मजबूती जारी रह सकती है। वहीं, ऊपरी ओर 78,900 से 79,000 का स्तर एक बड़ा हर्डल (Hurdle) साबित हो सकता है। यह देखना होगा कि क्या बाज़ार की यह तेज़ी इन रेजिस्टेंस लेवल्स को पार कर पाती है या फिर कुछ मुनाफावसूली (Profit Booking) देखने को मिलती है।
