SBI Capital Markets NSE IPO में उतरेगा, बेचेगा 87.8 लाख शेयर

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AuthorAditya Rao|Published at:
SBI Capital Markets NSE IPO में उतरेगा, बेचेगा 87.8 लाख शेयर

SBI की सब्सिडियरी SBICAPS, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आने वाले IPO में एक सेलिंग शेयरहोल्डर के तौर पर जुड़ गई है। इस कदम से SBI ग्रुप की पहले से घोषित शेयर बिक्री का बंटवारा हो गया है, जबकि IPO का कुल साइज़ लगभग ₹30,000 करोड़ पर स्थिर है।

SBI Capital Markets का IPO में प्रवेश

SBI Capital Markets (SBICAPS) अब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) के बहुप्रतीक्षित IPO में शेयर बेचने वालों की लिस्ट में शामिल हो गई है। 10 अगस्त, 2026 को फाइल किए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में एक एडेंडम के जरिए यह कन्फर्म हुआ है कि कंपनी एक्सचेंज के 87.8 लाख (8.78 मिलियन) शेयर बेचेगी।

SBI ग्रुप की शेयर बिक्री में बदलाव

पहले SBI ग्रुप ने एक्सचेंज के कुल 2.475 करोड़ (24.75 million) शेयर बेचने की योजना बनाई थी। हालांकि, यह कुल वॉल्यूम अब भी अपरिवर्तित है, लेकिन इस बिक्री की जिम्मेदारी पैरेंट बैंक और उसकी सब्सिडियरी के बीच पुनर्वितरित की गई है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) अब 1.597 करोड़ (15.97 million) शेयर ऑफर करेगा, जबकि SBICAPS बाकी के 87.8 लाख (8.78 million) शेयर बेचेगी।

रेगुलेटरी नियमों का पालन

चूंकि SBICAPS इस IPO के लिए बुक-रनिंग लीड मैनेजर के तौर पर भी काम कर रही है, इसलिए उसे विशेष रेगुलेटरी नियमों का पालन करना होगा। SEBI के नियमों के अनुसार, जब कोई लीड मैनेजर सेलिंग शेयरहोल्डर भी होता है, तो वह हितों के टकराव से बचने के लिए प्राइसिंग या वैल्यूएशन चर्चाओं का नेतृत्व नहीं कर सकता। नतीजतन, SBICAPS पर केवल मार्केटिंग एक्टिविटीज़ तक सीमित रहने का प्रतिबंध है ताकि नियमों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके।

IPO का स्ट्रक्चर और निवेशकों के लिए अहमियत

यह IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में स्ट्रक्चर्ड है। इसका मतलब है कि निवेशकों से जुटाई गई सारी राशि सीधे SBI और SBICAPS जैसे सेलिंग शेयरहोल्डर्स को मिलेगी। इस पब्लिक इश्यू से जुटाई गई कोई भी राशि NSE के अपने बिजनेस ऑपरेशंस, कैपिटल स्पेंडिंग या विस्तार के लिए इस्तेमाल नहीं की जाएगी।

ऐतिहासिक रूप से देखें तो, SBICAPS द्वारा बेचे जा रहे ये शेयर मूल रूप से 2007 और 2008 के बीच बाहरी संस्थाओं से विभिन्न ट्रांसफर के माध्यम से हासिल किए गए थे। रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, इन स्पेसिफिक होल्डिंग्स की वेटेड एवरेज एक्वीजीशन कॉस्ट ₹0.38 प्रति शेयर थी।

निवेशकों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण मॉनिटरेबल IPO की टाइमलाइन है। जैसे-जैसे प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, कुल वैल्यूएशन लगभग ₹30,000 करोड़ रहने की उम्मीद है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स अब फाइनल प्राइस बैंड और पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने की तारीखों को लेकर अगले अपडेट्स का इंतजार करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.