Reliance's Uneven Acquisition Trail: कहां हुई चूक?
Mukesh Ambani के नेतृत्व वाली Reliance Industries (RIL) अक्सर अपने बिजनेस पोर्टफोलियो को मजबूत करने या नए क्षेत्रों में विस्तार के लिए रणनीतिक अधिग्रहण (acquisitions) करती रही है। लेकिन, हालिया आंकड़े बताते हैं कि कंपनी का 'मिडास टच' हर बार काम नहीं आता। शेयर बाजार का वैल्यूएशन इन अधिग्रहीत कंपनियों के लिए अक्सर उनके अपने सेक्टर की स्थिति और कॉम्पिटिशन पर ज्यादा निर्भर करता है, न कि सिर्फ RIL के नाम पर।
सेक्टर-स्पेसिफिक परेशानियां और वैल्यूएशन गैप
डिजिटल स्पेस में Just Dial का मामला देखें तो Reliance Retail Ventures (RRVL) ने अक्टूबर 2021 में लगभग ₹5,700 करोड़ में 64% हिस्सेदारी खरीदी थी। लेकिन, शेयर का भाव ₹1,022.25 के ओपन ऑफर प्राइस से काफी नीचे ₹643 के आसपास ट्रेड कर रहा है। फाइनेंशियल ईयर 25 में कंपनी ने ₹584.2 करोड़ का नेट प्रॉफिट दिखाया, लेकिन इसमें ₹342 करोड़ का योगदान सिर्फ ट्रेजरी ऑपरेशन्स से था, जो ₹5,700 करोड़ के कैश रिजर्व से समर्थित है। एनालिस्ट्स का एवरेज टारगेट प्राइस ₹1,035.71 है, पर कोर लोकल सर्च और SME एडवरटाइजिंग बिजनेस की परफॉरमेंस पर सवाल बने हुए हैं। वहीं, Info Edge India का P/E 57.48 और IndiaMART InterMESH का P/E 20.09 है, जबकि Just Dial का मौजूदा P/E सिर्फ 9.88 है, जो इन कॉम्पिटिटर्स से काफी कम है।
टेक्सटाइल सेक्टर में Alok Industries का हाल चिंताजनक है। RIL ने 2020 में ₹5,050 करोड़ लगाकर 40% हिस्सेदारी ली, पर अब तक कंपनी का टर्नअराउंड नहीं हुआ है। Alok Industries के फाइनेंसियल बेहद कमजोर हैं, जहां इक्विटी निगेटिव है और डेट-टू-इक्विटी रेश्यो भी निगेटिव है, जो बताता है कि देनदारियां संपत्तियों से काफी ज्यादा हैं। वहीं, Raymonds का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 0.18 और Arvind Fashions का 0.42 है, जो कहीं ज्यादा बेहतर वित्तीय स्थिति दिखाते हैं।
इसी तरह, 2019 में ₹5,230 करोड़ में खरीदे गए Den Networks और Hathway Cable & Datacom, जिन्हें Network18 Media & Investments में इंटीग्रेट किया गया, वे भी खास कमाल नहीं दिखा पाए हैं। Den Networks का मार्केट कैप ₹1,356 करोड़ है और P/E 7.2 है, पर शेयर साल-दर-साल लगभग 20% गिर चुका है। Hathway Cable & Datacom का मार्केट कैप ₹1,989 करोड़ है, P/E 29.5 और ROE सिर्फ 1.7% है। Network18 का ROE तो -36.95% निगेटिव है। मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में तगड़ी कॉम्पिटिशन और बिखराव इन एसेट्स के प्रदर्शन पर भारी पड़ रहा है।
चमके हुए निवेश और रणनीतिक वजह
हालांकि, RIL के कुछ निवेश बेहद कामयाब रहे हैं। EIH (Oberoi Hotels) में 2010 से RIL के आने के बाद से होटल चेन की वैल्यू लगभग तीन गुना हो गई है। 2008 में ₹500 करोड़ में खरीदी गई Asian Paints से RIL ने जून 2025 तक ₹7,700 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा कमाया। Asian Paints का मार्केट कैप आज ₹2,26,774 करोड़ है और ROE 19.90% है, हालांकि हालिया 3-साल की रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ 5-6% के आसपास ही रही है, जो इसके 60.13 के P/E के मुकाबले कम है।
मार्केट का अलग-अलग नजरिया
Reliance Industries का P/E लगभग 22 है और मार्केट कैप लगभग ₹19.6 ट्रिलियन है, लेकिन अधिग्रहीत कंपनियों का वैल्यूएशन बहुत अलग है। HFCL, जो 5G रोलआउट से फायदा उठा रहा है, उसका Q3 FY26 में प्रॉफिट 41% बढ़ा है, पर P/E 200 से ऊपर है, जो भविष्य की बड़ी उम्मीदें या ओवरवैल्यूएशन दिखा रहा है।
जानकारों की चिंताएं
कई RIL अधिग्रहणों के मामले में, जानकारों का मानना है कि सेक्टर की चुनौतियों के कारण इनमें मौजूद फंडामेंटल कमजोरियां और बढ़ गई हैं। Alok Industries की निगेटिव इक्विटी डेट के बोझ को अस्थिर बनाती है। Den Networks, Hathway Cable और Network18 मीडिया के भारी कॉम्पिटिशन वाले स्पेस में फंसे हैं। Just Dial के मामले में, ऑर्गेनिक बिजनेस की कैश जेनरेट करने की क्षमता पर सवाल हैं, खासकर जब इसका बड़ा हिस्सा ट्रेजरी आय से आ रहा हो। Balaji Telefilms भी OTT स्पेस में ग्लोबल दिग्गजों से मुकाबला कर रहा है।
आगे क्या?
इन अधिग्रहीत कंपनियों का भविष्य काफी हद तक अपने-अपने सेक्टर की जटिलताओं से निपटने और प्रदर्शन को बेहतर बनाने की क्षमता पर निर्भर करेगा। RIL की वित्तीय मजबूती एक सपोर्ट देती है, लेकिन परफॉरमेंस ही निवेशकों का भरोसा बढ़ाएगी।