क्यों है यह खरीददारी इतनी खास?
आम तौर पर, ये निवेशक समूह अक्सर एक-दूसरे के विपरीत चाल चलते हैं। ऐसे में, जब प्रमोटर्स (जो कंपनी के अंदरूनी सूत्र होते हैं) और बड़े फंड्स (FIIs और DIIs) दोनों एक ही समय में खरीदारी कर रहे हों, तो यह एक मजबूत बुलिश सिग्नल माना जाता है। दिसंबर तिमाही में यही देखने को मिला, जब प्रमोटर्स ने अपनी होल्डिंग्स बढ़ाईं, वहीं FIIs और DIIs से भी बड़े पैमाने पर निवेश आया।
अंदरूनी और संस्थागत निवेशकों की आम राय
जब कंपनी चलाने वाले प्रमोटर्स, जिन्हें अपने बिजनेस की गहरी जानकारी होती है, वे अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते हैं, और साथ ही साथ अनुभवी संस्थागत निवेशक भी निवेश करते हैं, तो यह दर्शाता है कि वे चुनिंदा भारतीय कंपनियों के मौजूदा वैल्यूएशन या भविष्य की ग्रोथ को लेकर एक साझा राय रखते हैं। हालांकि, इस दौरान अलग-अलग शेयरों के प्रदर्शन में भिन्नता रही, लेकिन इन सभी प्रमुख वर्गों द्वारा हिस्सेदारी में की गई वृद्धि एक मजबूत भरोसे का इशारा है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
ऐतिहासिक रूप से, सभी तीनों प्रमुख निवेशक वर्गों की ओर से एक साथ इतनी बड़ी खरीददारी अक्सर बाजार में सकारात्मक चाल या टारगेट स्टॉक्स में टिकाऊ उछाल से पहले देखी गई है। ऐसे में, निवेशक अब बारीकी से उन कंपनियों की पहचान कर रहे हैं जो इस दुर्लभ गठजोड़ का फायदा उठा रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह भारतीय इक्विटीज़, खासकर उन कंपनियों के लिए बॉटम आउट (Bottoming Out) या एक नए संचय (Accumulation) चरण की शुरुआत का संकेत हो सकता है, जिन्हें सभी तरह के निवेशक मजबूत फंडामेंटल वाली मानते हैं।