पॉलिसी-ड्रिवन सेक्टरल रीएलोकेशन
यूनियन बजट 2026-27 के बाद InCred Equities ने अपनी इंडिया निवेश रणनीति में महत्वपूर्ण फेरबदल किया है। ब्रोकरेज फर्म ने फरवरी 2026 के लिए साइक्लिकल (cyclical) और डोमेस्टिक ग्रोथ वाले सेक्टर्स पर अपना ओवरवेट (overweight) रुख बनाए रखा है, जिनका सीधा संबंध बजट की प्राथमिकताओं से है। बजट 2026-27 में मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ाने और ग्लोबल वैल्यू चेन्स में इंटीग्रेट करने पर जोर दिया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए, InCred ने ऑटो (OEMs), ऑटो कंपोनेंट्स, एग्रीबिजनेस, सीमेंट, डिफेंस, फाइनेंसियल सर्विसेज, मेटल्स एंड माइनिंग और पावर ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन जैसे सेक्टर्स पर अपना फोकस बढ़ाया है। कैपिटल गुड्स, केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल्स जैसे क्रिटिकल सेगमेंट्स में ग्रोथ की उम्मीद है। बजट में मीडियम-टर्म में प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और सर्विस एरिया जैसे हॉस्पिटल्स और टूरिज्म में कैपेसिटी बिल्डिंग पर भी फोकस करने के संकेत दिए गए हैं। दूसरी ओर, InCred ने कंज्यूमर स्टेपल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, ऑयल एंड गैस, और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर्स पर न्यूट्रल (neutral) रुख अपनाया है। एविएशन, बिल्डिंग मैटेरियल्स, पोर्ट्स एंड लॉजिस्टिक्स और केमिकल्स जैसे सेक्टर्स को अंडरवेट (underweight) रेटिंग दी गई है, भले ही इंडिया-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) जैसे कुछ संभावित ट्रेड बेनिफिट्स हों।
मार्केट वोलेटिलिटी बनाम फंडामेंटल कंफर्ट
हाल के दिनों में, इंडियन इक्विटी मार्केट्स ने बढ़ती वोलेटिलिटी का सामना किया है। निफ्टी (Nifty) इंडेक्स में ग्लोबल इवेंट्स और जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण 4% तक की बड़ी हलचल देखी गई। इंडिया VIX, जो एक्सपेक्टेड वोलेटिलिटी को मापता है, 12-13 के स्तर पर आकर थोड़ा शांत हुआ है। InCred के अनुसार, निफ्टी का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो ऐतिहासिक औसत के करीब 22-23x पर ट्रेड कर रहा है, जो कि 18-22x की ऐतिहासिक रेंज से थोड़ा ऊपर है, लेकिन इसे एक उचित एंट्री पॉइंट माना जा रहा है। दिसंबर 2025 की तिमाही में सेल्स और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ग्रोथ में सुधार को भी एक सपोर्टिंग फैक्टर बताया गया है। हालांकि, 1 फरवरी, 2026 को यूनियन बजट की घोषणा के बाद मार्केट्स में तेज गिरावट आई। डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में वृद्धि के कारण ट्रेडिंग कॉस्ट काफी बढ़ गई, जिससे सेंटीमेंट पर नकारात्मक असर पड़ा और निफ्टी में गिरावट देखी गई।
हाई-कन्विक्शन शिफ्ट्स और स्ट्रक्चरल रिस्क
InCred ने अपनी हाई-कन्विक्शन (high-conviction) स्टॉक लिस्ट में कुछ अहम बदलाव किए हैं। UltraTech Cement और Home First Finance Company को शामिल किया गया है। UltraTech Cement को मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ, बेहतर सीमेंट प्राइसिंग, कॉस्ट एफिशिएंसी और रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी एडिशन से मिलने वाली अर्निंग्स विजिबिलिटी के कारण पसंद किया जा रहा है। एनालिस्ट्स के टारगेट ₹14,000-₹15,000 के आसपास हैं। Home First Finance को लीडरशिप कंटिन्यूटी, आकर्षक रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल और हालिया प्राइस करेक्शन के चलते पोर्टफोलियो में जगह मिली है। वहीं, Deepak Fertilisers & Petrochemicals Corporation को इसके TAN बिजनेस में स्ट्रक्चरल डाउनटर्न, ग्लोबल ओवरसप्लाई और चीन से कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग प्रेशर के कारण बाहर कर दिया गया है। यह कदम इंडस्ट्री-स्पेसिफिक स्ट्रक्चरल चुनौतियों के प्रति रेजिलिएंट कंपनियों की पहचान पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है। सितंबर 2022 से Tata Motors Commercial Vehicles और GE Vernova T&D जैसे पिछले हाई-कन्विक्शन पिक्स ने महत्वपूर्ण आउटपरफॉर्मेंस दिखाया है, जबकि Axis Bank ने हाल ही में दमदार एब्सोल्यूट रिटर्न दिया है।
ब्रॉडर मार्केट कॉन्टेक्स्ट और पीयर व्यूज
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है, जो घरेलू ग्रोथ मोमेंटम में कॉन्फिडेंस दिखाता है। अन्य ब्रोकरेज फर्म्स भी इंडिया की ग्रोथ को लेकर सकारात्मक हैं। Kotak Securities का अनुमान है कि FY27E में निफ्टी प्रॉफिट्स में बड़ा इजाफा होगा। SBI Securities टेलीकॉम, फार्मा और सीमेंट को अहम सेक्टर्स बता रहा है। ICICI Direct ने इक्विटीज के लिए 29,500 का निफ्टी टारगेट दिया है और 2026 में मिड और स्मॉल कैप्स के आउटपरफॉर्म करने की उम्मीद जताई है, जिसका कारण हालिया इंडिया-यूएस ट्रेड डील है, जिसने टैरिफ को कम किया है। घरेलू संकेतों के बावजूद, ग्लोबल जियोपॉलिटिकल रिस्क और मैक्रोइकॉनॉमिक रीकैलिब्रेशन निवेशकों की सेंटिमेंट को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे सेलेक्टिव अप्रोच और ब्रॉड मार्केट बेट्स के बजाय अर्निंग्स रेजिलिएंस पर फोकस बढ़ रहा है।