ट्रेड डीलों की चमक और IT सेक्टर का अंधेरा
भारतीय शेयर बाजार में आज बाज़ार में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। जहाँ एक तरफ हाल ही में अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के साथ हुई ट्रेड डीलों से निवेशकों में उम्मीद की एक लहर दौड़ गई है, वहीं दूसरी तरफ टेक्नोलॉजी यानी IT सेक्टर में जारी गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है। Nifty 50 इंडेक्स, भारी दबाव के बावजूद, 25,600 के अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के ऊपर बना हुआ है। यह दिखाता है कि गिरावट की कोशिशों के बावजूद खरीदार सक्रिय हैं, लेकिन ऊंचे स्तरों पर खरीदारी का उत्साह अभी कम दिख रहा है।
EU और अमेरिका के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) को लेकर बाजार में सकारात्मकता है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे Nifty 50 साल 2026 के अंत तक 30,000 के स्तर तक जा सकता है। EU-India डील से भारत की GDP में 0.12-0.13% की वृद्धि और द्विपक्षीय व्यापार में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद है। वहीं, अमेरिका के साथ हुई डील, जिसमें टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है, को पॉलिसी अनिश्चितता को कम करने वाला एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे फॉरेन इन्वेस्टमेंट और प्राइवेट सेक्टर कैपिटल एक्सपेंडिचर में बढ़ोतरी की उम्मीद जगी है। हालांकि, यह भी देखना होगा कि इन डीलों का भारतीय एक्सपोर्ट्स पर तुरंत कितना असर पड़ता है, क्योंकि कुछ अनुमानों के अनुसार, टैरिफ एडजस्टमेंट के बावजूद अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट में 22-26% तक की गिरावट आ सकती है।
IT सेक्टर पर निराशा के बादल
दूसरी ओर, टेक्नोलॉजी सेक्टर की कमजोरी बाजार की चाल को भारी पड़ रही है। Nifty IT इंडेक्स में हाल ही में 6 साल से भी ज़्यादा समय की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट देखी गई है, जो वैश्विक टेक्नोलॉजी शेयरों में आई बिकवाली को दर्शाती है। कुछ जानकारों का मानना है कि यह गिरावट ज़रूरत से ज़्यादा हो सकती है, लेकिन बाज़ार में इस सेक्टर को लेकर अभी भी विश्वास की कमी साफ दिख रही है। मैक्रो-इकोनॉमिकल डेवलपमेंट के बावजूद, सेक्टर-स्पेसिफिक कमजोरी बाजार में ब्रॉड-बेस्ड रैली के रास्ते में रोड़ा बन रही है।
RBI का लिक्विडिटी मैनेजमेंट और MPC की बैठक
सभी की निगाहें अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) पर टिकी हैं, जो 2026 की अपनी पहली पॉलिसी मीटिंग करने जा रही है। हालांकि, रेपो रेट में कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है, लेकिन MPC का लिक्विडिटी मैनेजमेंट को लेकर रुख सबसे अहम होगा। सरकार FY27 के लिए ₹17.2 लाख करोड़ का बड़ा बरोइंग प्लान लेकर आ रही है, और सिस्टम में लिक्विडिटी (पैसे की तरलता) RBI के कम्फर्ट लेवल से नीचे बनी हुई है। ऐसे में, RBI यह सुनिश्चित करेगा कि सिस्टम में फंड्स की कमी न हो। पिछली बार दिसंबर 2024 में CRR (कैश रिजर्व रेशियो) में कटौती के बाद बैंकिंग स्टॉक्स में अच्छी रिकवरी देखने को मिली थी। ऐसे में, लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए CRR कट जैसे उपायों पर भी चर्चा हो रही है।
नतीजों का सीजन और स्टॉक-स्पेसिफिक चाल
शुक्रवार का ट्रेडिंग सेशन कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों (Quarterly Results) के रिएक्शन से भी प्रभावित होगा। Bharti Airtel, Tata Motors PV, LIC, Hero MotoCorp, और Tata Steel जैसी दिग्गज कंपनियां अपने नंबर्स पेश करने वाली हैं। इस भारी-भरकम अर्निंग कैलेंडर की वजह से स्टॉक्स में काफी उठा-पटक देखने को मिल सकती है, जिससे एक 'बाइफर्केटेड' यानी बंटा हुआ बाजार देखने को मिल सकता है। ऐसे में, निवेशकों के लिए इंडिविजुअल स्टॉक पर फोकस करना ज़्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।
वैल्यूएशन और टेक्निकल लेवल्स
Nifty 50 फिलहाल 22.38 के P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है, जो एक रीज़नेबल रेंज में माना जा रहा है, हालांकि ऐतिहासिक आंकड़े ऊपर-नीचे की गुंजाइश दिखाते हैं। वहीं, Nifty Bank इंडेक्स का P/E लगभग 16.3 के आसपास है। प्रमुख कंपनियों के वैल्यूएशन की बात करें तो Bharti Airtel का P/E करीब 39 है, जबकि Tata Steel का P/E 33-37 के बीच चल रहा है। टेक्निकल चार्ट्स पर, Nifty 50 का सपोर्ट 25,600 पर है, जबकि 25,755 और 25,818-26,000 के ज़ोन में रेजिस्टेंस (बड़ी रुकावट) दिख रही है। Nifty Bank के लिए 59,800 और 59,600 महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल्स हैं, और 60,300 से 60,350 के बीच रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है।
