बाजार में दिख रही चिंता, निफ्टी 24 हजार के सपोर्ट पर!
शेयर बाजार में इस समय चिंता का माहौल है, जिसकी वजह से Nifty 50 इंडेक्स "₹24,450" पर बंद हुआ (7 मार्च 2026)। यह स्तर इंडेक्स के हाल के "26,000" के शिखर से "6%" नीचे है। इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की लगातार बिकवाली है। मार्च के पहले हफ्ते (2-6 मार्च) में ही FPIs ने भारतीय इक्विटी से करीब "₹21,000 करोड़" की भारी निकासी की है, जो फरवरी में देखी गई मजबूत खरीदारी के ठीक विपरीत है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने खरीदारी जारी रखते हुए इस बिकवाली के असर को कुछ हद तक कम किया है।
तकनीकी विश्लेषक "24,000" के स्तर पर कड़ी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण साइकोलॉजिकल और टेक्निकल सपोर्ट ज़ोन है। अगर यह स्तर टूटता है, तो बाजार में और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। Nifty 50 का फॉरवर्ड P/E रेशियो "21.4" है और इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग "₹1,95,70,783 करोड़" है।
IT सेक्टर: संकट में सहारा या बस एक छलावा?
इसके विपरीत, Nifty IT सेक्टर इंडेक्स में अच्छी मजबूती बनी हुई है। पिछले हफ्ते जहां Nifty 50 में "3%" की गिरावट आई, वहीं IT सेक्टर में केवल "1.5%" की नरमी देखने को मिली। इस मजबूती का एक बड़ा कारण भारतीय रुपये का कमजोर होना है। 6 मार्च 2026 तक, रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग "₹91.9490" पर पहुंच गया है, जो पिछले 12 महीनों में "5.51%" कमजोर हुआ है।
यह गिरावट IT कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है, क्योंकि उनकी आय का एक बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्राओं में होता है, जिससे उनके रेवेन्यू और ऑपरेटिंग मार्जिन को सहारा मिलता है। फरवरी में आई भारी गिरावट के बाद, IT शेयरों के वैल्यूएशन भी अब कुछ हद तक आकर्षक लग रहे हैं। Nifty IT सेक्टर का फॉरवर्ड P/E रेशियो "21.4" से "21.5" के आसपास है। भारत के टेक सेक्टर से फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में "$315 बिलियन" का रेवेन्यू आने की उम्मीद है, जिसमें AI और क्लाउड सेवाओं से "6.1%" की वृद्धि संभव है।
GIFT City का पहला IPO: डॉलर जुटाने का नया मंच?
GIFT City के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) से XED इंस्टीट्यूट द्वारा लॉन्च किया गया यह पहला इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) इस उभरते हुए फाइनेंशियल हब के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। कंपनी का लक्ष्य अपने एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम के लिए "$12 मिलियन" जुटाना है। यह IPO यह देखने के लिए महत्वपूर्ण है कि GIFT City डॉलर-डिनॉमिनेटेड पूंजी जुटाने के लिए कितना प्रभावी मंच बन सकता है।
बैंकर्स का कहना है कि GIFT City में पारंपरिक घरेलू एक्सचेंजों की तुलना में अधिक आसान और तेज रेगुलेटरी माहौल है, साथ ही टैक्स में भी बचत होती है और यह ऑफशोर कैपिटल को आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। GIFT City में "10 साल" का टैक्स हॉलिडे और कुछ सिक्योरिटीज पर कैपिटल गेन टैक्स से छूट जैसे कई फायदे मिलते हैं। इसका लक्ष्य सिंगापुर और दुबई जैसे प्रमुख ग्लोबल फाइनेंशियल सेंटरों को टक्कर देना है। जून 2025 तक, GIFT IFSC में "272" फंड रजिस्टर्ड थे, जिनकी कुल वैल्यू "$22.11 बिलियन" थी।
आगे क्या? जोखिम और उम्मीदें
बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक संघर्ष है, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतें "$90" प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं। इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, चालू खाते के घाटे (current account deficit) और करेंसी की स्थिरता पर पड़ता है। FPIs की बिकवाली जारी रहने और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स को लेकर चिंताओं से भी बाजार पर दबाव बना रह सकता है।
IT सेक्टर को जहां कमजोर रुपये का फायदा मिल रहा है, वहीं वैश्विक मंदी जो क्लाइंट खर्च को प्रभावित कर सकती है, और AI टूल्स से आने वाले संभावित व्यवधानों का भी सामना करना पड़ सकता है। GIFT City की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कितना अधिक और विविध पूंजी आकर्षित कर पाता है।
भविष्य की बात करें तो Nifty 50 की चाल भू-राजनीतिक तनाव कम होने और विदेशी पूंजी के प्रवाह पर निर्भर करेगी। विश्लेषकों के लक्ष्य मार्च 2026 तक "22,850" से लेकर "26,800" तक फैले हुए हैं, जो बाजार को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। IT सेक्टर में AI और क्लाउड सेवाओं पर फोकस के साथ धीमी लेकिन स्थिर वृद्धि की उम्मीद है, हालांकि निकट अवधि में प्रदर्शन धीमा रह सकता है।