ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के बीच भारतीय बाजार दबाव में है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से Brent Crude का भाव **$99** प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे महंगाई और इम्पोर्ट कॉस्ट बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
8 सितंबर, 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। Nifty 50 इंडेक्स 0.61% की गिरावट के साथ 23,635 पर बंद हुआ। फिलहाल इंडेक्स 23,600 के अहम सपोर्ट जोन को टेस्ट कर रहा है, जो कि जुलाई के बाद से सबसे निचला स्तर है। बाजार की इस कमजोरी के पीछे मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल मुख्य वजह है।
इकोनॉमी पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ने से इंपोर्ट बिल बढ़ता है। इसका सीधा असर भारतीय रुपये की वैल्यू पर पड़ता है। बाजार के जानकारों का मानना है कि तेल की ऊंची कीमतें घरेलू महंगाई को बढ़ा सकती हैं, जिससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर भी असर पड़ सकता है।
सेक्टर का हाल
तेल की कीमतों का असर अलग-अलग सेक्टर पर अलग दिख रहा है। BPCL, HPCL और Indian Oil Corporation जैसे OMCs पर दबाव है, क्योंकि मार्जिन घटने का डर है। इसके उलट, ONGC और Oil India जैसे अपस्ट्रीम प्रोड्यूसर्स के लिए यह स्थिति बेहतर रियलाइजेशन की उम्मीद जगा रही है।
वहीं, Financial Services, IT और Realty सेक्टर में चौतरफा बिकवाली दिखी है। Bank Nifty भी अपने कंसोलिडेशन रेंज को तोड़कर 56,000-56,500 के सपोर्ट बैंड की तरफ बढ़ रहा है।
आगे की राह
निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या 23,600 का स्तर टिक पाएगा। अगर इंडेक्स इसके नीचे फिसलता है, तो अगला सपोर्ट 23,300-23,200 पर हो सकता है। फिलहाल बाजार का मूड पूरी तरह से ग्लोबल जियोपॉलिटिकल खबरों और कच्चे तेल की चाल पर निर्भर है।
